WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
← Back to article
Rex TV India
Latest News राष्ट्रीय Digital Newsletter 13 Sep 2026 · 12:21 PM

1971 की जंग का पूरा सच, तस्वीरों और गवाहों ने खोला इतिहास का पन्ना

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, दिल्ली। 1971 की जंग को उन लोगों की आवाज और यादों के जरिए फिर से सामने लाने वाली एक खास प्रस्तुति ने राजधानी में दर्शकों का ध्यान खींचा। ट्रिब्यून न्यूज सर्विस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में विजन टू विक्ट्री 1971 नाम से 90 मिनट की प्रस्तुति हुई। इसमें उन लोगों की गवाही, तस्वीरों और अभिलेखीय फुटेज का इस्तेमाल किया गया जिन्होंने युद्ध को करीब से देखा और उसे दिशा देने में भूमिका निभाई। प्रस्तुति पहले केवल राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज और प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों में दिखाई जाती थी। यह पहली बार था जब इसे आम दर्शकों के लिए पेश किया गया।  [विडियो]   [1]

युद्ध की असली आवाज

प्रस्तुति की शुरुआत 25 मार्च 1971 को पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन सर्चलाइट से हुई। इस कार्रवाई के बाद बंगाली राष्ट्रवादी आंदोलन पर हिंसक दमन बढ़ा और बड़ी संख्या में शरणार्थी भारत पहुंचे। प्रस्तुति में बताया गया कि भारत ने संकट के दौरान 61 देशों से मदद की अपील की लेकिन ज्यादातर देशों ने हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखी। उस दौर में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रधान सचिव पीएन हक्सर ने यह सुझाव दिया था कि बांग्लादेश के स्वतंत्रता आंदोलन को निर्वासित बांग्लादेश सरकार के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जाए। इससे संघर्ष को राजनीतिक आधार देने की कोशिश तेज हुई।

प्रस्तुति में 17 अप्रैल 1971 को मुजीबनगर में बांग्लादेश की अस्थायी सरकार के शपथ ग्रहण की दुर्लभ तस्वीरें भी दिखाई गईं। यह सरकार पूरे युद्ध के दौरान कलकत्ता में सीमा सुरक्षा बल की एक सुविधा से काम करती रही। युद्ध के लिए संसाधन जुटाने की प्रक्रिया में भारतीय बैंक खाते के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया। इसके अलावा अमेरिका से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक भारत की कूटनीतिक कोशिशों और दुनिया की सीमित प्रतिक्रिया को दिखाया गया। दर्शकों को उन घटनाओं से भी परिचित कराया गया जिनका असर युद्ध के अंतिम दौर और पाकिस्तान की सैन्य हार पर पड़ा।

ढाका तक पहुंची जीत

प्रस्तुति में 15 दिसंबर 1971 की एक अहम घटना पर भी ध्यान दिया गया। उस समय पाकिस्तान के विदेश मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पोलैंड के युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। प्रस्तुति के अनुसार अगर उस समय युद्धविराम स्वीकार कर लिया जाता तो भारत के लिए ढाका में पाकिस्तानी सेना का आत्मसमर्पण कराना मुश्किल हो सकता था। इसके अगले दिन 16 दिसंबर को युद्ध का निर्णायक अंत हुआ। सैन्य अभियानों में लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह के नेतृत्व वाली चौथी कोर की भूमिका भी सामने आई जिसने कठिन मेघना नदी को हेलीकॉप्टरों की मदद से पार कर ढाका की ओर बढ़त बनाई।

1971 की जंग के सैन्य पक्ष में मेजर शमशेर यानी शम्मी मेहता की भूमिका को भी प्रमुखता दी गई। उन्होंने पीटी 76 उभयचर टैंकों से लैस 5 इंडिपेंडेंट आर्मर्ड स्क्वाड्रन का नेतृत्व किया और मेघना पार करने के अभियान में हिस्सा लिया। यह भारतीय बख्तरबंद दल था जिसने ढाका में प्रवेश किया। प्रस्तुति का समापन लेफ्टिनेंट जनरल एसएस मेहता के संदेश से हुआ जिसमें उन्होंने संघर्ष को लोकतंत्र की सैन्य शासन पर जीत और मानवीयता की बर्बरता पर विजय के रूप में याद किया। 16 दिसंबर को 92,000 पाकिस्तानी सैनिकों के आत्मसमर्पण के साथ 1971 की जंग खत्म हुई और यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े सैन्य आत्मसमर्पणों में शामिल रही।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार स्रोतों और ऐतिहासिक अभिलेखों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। 1971 के युद्ध से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों को उपलब्ध दस्तावेजों और प्रत्यक्षदर्शी गवाहियों के आधार पर समझा जाना चाहिए तथा अलग स्रोतों में विवरण की प्रस्तुति अलग हो सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 13, 2026: 12:21 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
— End of Article —