बीकानेर, राजस्थान। गुरु गौरव सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले 26 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। लोकराग फाउंडेशन और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में संभागीय आयुक्त बीकानेर विश्राम मीणा ने कहा कि शिक्षा सिर्फ ज्ञान हासिल करने का जरिया नहीं बल्कि संस्कार और चरित्र निर्माण की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि शिक्षक कर्मशीलता, क्षमाशीलता और समर्पण जैसे गुणों के साथ शिक्षित समाज और विकसित भारत की नींव तैयार करते हैं। गुरु गौरव सम्मान इसी योगदान को सार्वजनिक रूप से सम्मान देने का प्रयास रहा।
वैटेनरी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान देने के साथ जीवन की चुनौतियों से मुकाबले का आत्मविश्वास और सही दिशा भी देते हैं। उनके मुताबिक अच्छे शिक्षक की पहचान उनके विद्यार्थियों की सफलता और व्यक्तित्व में नजर आती है। प्रतिष्ठित साहित्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि गुरु का योगदान कभी सीमित नहीं होता। शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और व्यवहार से विद्यार्थियों के जीवन पर स्थायी छाप छोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु का सम्मान दरअसल ज्ञान, संस्कार और मानवीय मूल्यों का सम्मान है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की उस प्रक्रिया का हिस्सा हैं जिसका परिणाम आने वाली पीढ़ियों के रूप में सामने आता है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में शिक्षकों का सम्मान होता है वहां ज्ञान और संस्कारों को भी सम्मान मिलता है। उनके अनुसार शिक्षकों के समर्पण और सेवाभाव को पहचानना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम की शुरुआत में लोकराग फाउंडेशन के निदेशक आनंद आचार्य ने आयोजन की रूपरेखा, शिक्षकों के चयन और समारोह की महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का मंच संचालन रेखा आचार्य ने किया।
गुरु गौरव सम्मान पाने वाले शिक्षकों में अमित सोनी जीके, सुरेन्द्र सोलंकी, रमाकांत सिंह बिठ्ठू, शफी मोहम्मद, हर्ष बाला पाराशर, डॉ. वर्षा मक्कड़, राजीव गौतम, डॉ. हुकमचंद चौधरी, आरिफ अली, अमीना फातिमा, ओम प्रकाश राजपुरोहित, डॉ. नरसिंह बिन्नाणी, डॉ. विक्रम योगी, डॉ. मंजू राठौड़, डॉ. ईश्वर लाल जल, गिरिराज खैरीवाल, डॉ. मुकेश हर्ष, सुरेश कुमार, सुनील कुमार, खैरूनिशा, राज रतन चांडक, श्याम सुंदर छिंपा, मोहर सिंह सलावद, निशा लिम्बा, इप्शिता शर्मा सहित एक अन्य शिक्षक शामिल रहे। इन सभी को शिक्षा में समर्पण, सेवाभाव, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
लोकराग फाउंडेशन के निदेशक विनय थानवी ने गुरुजनों के सम्मान में भेंट किए गए अभिनंदन पत्र का वाचन किया। निदेशक योगेश खत्री ने अतिथियों, सम्मानित शिक्षकों और आगंतुकों का आभार जताते हुए कहा कि गुरुजनों के प्रति सम्मान की भावना को सामाजिक स्तर पर और व्यापक बनाने की जरूरत है। समारोह में डॉ. कुलदीप सिंह बिठ्ठू, डॉ. महेश शर्मा, शिक्षक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष जोशी, जयदीप सिंह, वीरेन्द्र जोशी, मनोज व्यास, प्रकाश सामसूखा, डॉ. शिशिर शर्मा, शरद कालरा, सीए दीपक व्यास, एफसीए राजेश पारीक और शांतिलाल भोजक सहित शहर के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
समारोह के आयोजन में शांति लाल भोजक और राहुल मरवाह का विशेष योगदान रहा। व्यवस्थाओं से लेकर कार्यक्रम को गरिमापूर्ण स्वरूप देने में उनके सहयोग की सराहना की गई। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और गणमान्य नागरिकों ने सम्मानित शिक्षकों के योगदान को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। गुरु गौरव सम्मान के जरिए शिक्षा के साथ संस्कार और गुरु शिष्य परंपरा के महत्व को भी रेखांकित किया गया। वक्ताओं का संदेश साफ रहा कि शिक्षक सिर्फ कक्षा में पाठ पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य को दिशा देने वाला मार्गदर्शक भी होता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट उपलब्ध विश्वस्त स्रोतों और आयोजन से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सम्मानित शिक्षकों और समारोह से जुड़ी जानकारी आयोजन में उपलब्ध कराए गए विवरण के आधार पर प्रस्तुत की गई है और संबंधित संस्थाओं की ओर से भविष्य में इसमें संशोधन संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 13, 2026: 6:59 PM
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