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Rex TV India
Latest News नियम और कानून Digital Newsletter 16 Sep 2026 · 12:48 PM

केरल उच्च न्यायालय ने विधवा पत्नी को संरक्षित भ्रूण उपयोग की इजाजत दी

प्रतीकात्मक फोटो

कोच्चि, केरल। केरल उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए एक विधवा महिला को अपने दिवंगत पति के साथ फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के दौरान क्रायोप्रिजर्व (संरक्षित) किए गए भ्रूण का उपयोग करने की अनुमति दे दी है। महिला ने अदालत का रुख तब किया था जब अस्पताल ने पति की मृत्यु के बाद विशिष्ट लिखित सहमति के अभाव में उसे भ्रूण सौंपने से इनकार कर दिया था। इस कानूनी मामले में केंद्र सरकार और अस्पताल पक्ष ने दलील दी थी कि अस्पताल के सहमति फॉर्म में पत्नी को लाभार्थी के रूप में नहीं दर्शाया गया था।  [1]

न्यायालय का निर्णय

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति हरिशंकर वी. मेनन ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के सहमति फॉर्म में पत्नी को भ्रूण सौंपने का स्पष्ट विकल्प नहीं था, जिसके कारण पति ने अज्ञात जोड़ों को भ्रूण देने का विकल्प चुना था। अदालत ने कहा कि तकनीकी कमियों या कागजी खामियों के आधार पर महिला की याचिका को खारिज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि मृत पति का मुख्य आशय भ्रूण के वास्तविक उपयोग को सुनिश्चित करना था। 

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि केरल उच्च न्यायालय के समक्ष पेश किए गए तथ्यों के अनुसार पति के अनुमानित इरादे और पत्नी की माता बनने की स्वाभाविक इच्छा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस व्यवस्था के तहत केरल उच्च न्यायालय ने संबंधित अस्पताल को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता महिला को सहायता प्राप्त प्रजनन (एआरटी) के लिए संरक्षित भ्रूण का उपयोग करने की अनुमति दे।

कानूनी पहलू

असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) अधिनियम और नियमों के प्रावधानों का विश्लेषण करते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में मृत व्यक्ति की मंशा का सम्मान करना बेहद जरूरी है। इस संवेदनशील मामले में केरल उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी कि किसी भी तकनीकी चूक के कारण महिला के अधिकारों और मातृत्व की इच्छा को दरकिनार नहीं किया जा सकता। 

इस फैसले से उन महिलाओं को एक बड़ी कानूनी राहत मिली है जो अपने पति के निधन के बाद क्रायोप्रिजर्व्ड भ्रूण के जरिए परिवार आगे बढ़ाने की कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। जानकारों का मानना है कि केरल उच्च न्यायालय के इस अदालती आदेश से भविष्य में इस तरह के अन्य पारिवारिक और चिकित्सा मामलों में भी स्पष्ट मार्गदर्शन मिलेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कानूनी मामलों और चिकित्सा नीतियों से जुड़े इस मामले में समय और परिस्थितियों के अनुसार नए तथ्य सामने आ सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 16, 2026: 12:48 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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