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Rex TV India
Latest News समीक्षा Digital Newsletter 19 Sep 2026 · 11:04 AM

घटती बच्चो की संख्या से देश में मंडराने लगा है गंभीर जनसांख्यिकीय संकट

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, भारत। देश में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चल रही पुरानी नीतियां अब एक नई और बड़ी समस्या बनती जा रही हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में परिवार नियोजन नीतियों का दायरा बदलने की सख्त जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में घटती बच्चो की संख्या लगातार कम हो रही है, जिससे भविष्य में बुजुर्गों की आबादी भारी मात्रा में बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दिशा में समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में देश को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।   [1]

बड़ी चेतावनी

देश में जन्म लेने वाले बच्चों की कुल संख्या पिछले 25 वर्षों में लगभग 20 प्रतिशत तक कम हो चुकी है। वर्ष 2001 में यह संख्या लगभग 2.93 करोड़ थी, जो वर्ष 2023 में घटकर केवल 2.32 करोड़ रह गई है। इस आंकड़े से साफ पता चलता है कि देश में घटती बच्चो की संख्या अब एक सामान्य बात नहीं रही बल्कि यह एक गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुकी है। सरकार द्वारा चलाई जा रही पुरानी योजनाओं और प्रोत्साहन कार्यक्रमों के बावजूद समाज में जन्म दर का स्तर लगातार नीचे गिर रहा है, जिसके परिणाम आने वाले दशकों में बहुत ही घातक साबित हो सकते हैं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि यदि उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों को बाहर कर दिया जाए, तो पूरे देश की राष्ट्रीय प्रजनन दर घटकर केवल 1.6 रह जाती है। यह आंकड़ा अमेरिका और उत्तरी यूरोप जैसे विकसित देशों के बिल्कुल बराबर है। इसके अलावा दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्यों में प्रजनन दर पहले ही बेहद निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। देश की औसत आयु अब 30 वर्ष के बजाय तेजी से आगे बढ़ रही है। इन तमाम राज्यों में स्थिति यह हो चुकी है कि वहां कामकाजी युवाओं की तुलना में बुजुर्गों की संख्या लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है, जो एक बड़ा आर्थिक संकट पैदा कर सकती है।

बदलाव की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अब जनसंख्या को और अधिक दबाने वाली नीतियों को तुरंत बंद कर देना चाहिए। दुनिया के अन्य देशों का इतिहास यह गवाही देता है कि जब एक बार प्रजनन दर निर्धारित सामाजिक स्तर से नीचे चली जाती है, तो उसे दोबारा वापस ऊपर उठाना लगभग असंभव हो जाता है। इसके बावजूद हमारे देश का सिस्टम आज भी नसबंदी और परिवार नियोजन को वित्तीय पुरस्कार देकर बढ़ावा देने में पूरी तरह जुटा हुआ है। देश के कई राज्यों में आज भी ऐसी नीतियां लागू हैं जो इस बात को नजरअंदाज करती हैं कि घटती बच्चो की संख्या भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन सकती है।

देश के विभिन्न राज्यों में आज भी जनसंख्या नियंत्रण को लेकर विरोधाभासी नियम और कानून धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं। एक तरफ जहां कुछ राज्य सरकारों ने बड़े परिवारों या बच्चों के जन्म पर प्रोत्साहन राशि देने के नियम बनाए हैं, वहीं दूसरी तरफ नसबंदी के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए भारी भरकम बजट खर्च किया जा रहा है। आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में विवाहित महिलाओं की नसबंदी का आंकड़ा 70 प्रतिशत तक पहुंच चुका है जो देश में सबसे अधिक है। इन विरोधाभासी नीतियों के कारण समाज में सही संतुलन नहीं बन पा रहा है और नीति निर्माताओं को समझ नहीं आ रहा है कि इस गंभीर स्थिति से कैसे निपटा जाए।

भविष्य का संकट

आने वाले समय में यदि इन पुरानी और नुकसानदायक नीतियों में समय रहते कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया, तो देश के कई विकसित राज्य उम्रदराज समाजों में पूरी तरह बदल जाएंगे। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में औसत आयु तेजी से विकसित देशों की श्रेणी में पहुंच रही है। इन सभी राज्यों में भविष्य में कार्यबल की भारी कमी देखने को मिल सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है। यदि हमने अभी से कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो घटती बच्चो की संख्या देश के सामने एक ऐसा संकट खड़ा कर देगी जिससे पार पाना बेहद कठिन हो जाएगा।

इस पूरी स्थिति से निपटने के लिए अब समय आ गया है कि देश की केंद्र और राज्य सरकारें अपनी पुरानी सोच को छोड़कर नई नीतियों को अपनाएं। जनसंख्या विस्फोट का पुराना डर अब पूरी तरह बेबुनियाद साबित हो चुका है और हमें आधुनिक समय के हिसाब से अपनी रणनीतियों में बदलाव करना होगा। नीति निर्माताओं को चाहिए कि वे युवाओं और परिवारों को भविष्य की चुनौतियों के प्रति जागरूक करें ताकि देश का सामाजिक और आर्थिक संतुलन हमेशा बना रहे। अंत में यही कहा जा सकता है कि यदि घटती बच्चो की संख्या पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो देश के सुनहरे भविष्य को बचाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य परिवार नियोजन और जनसांख्यिकीय नीतियों से जुड़े आंकड़ों और बदलावों की जानकारी पाठकों तक पहुँचाना है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 19, 2026: 11:04 AM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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