कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। शहर के प्रख्यात और आस्था के बड़े केंद्र रिद्धि-सिद्धि नगर स्थित चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में इन दिनों पर्युषण पर्व यानी दसलक्षण महापर्व की धूम मची हुई है। उत्तम संयम धर्म के पवित्र अवसर पर मंदिर परिसर में विविध प्रकार के धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया है। इन आयोजनों में भाग लेने के लिए कोटा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर पहुंचने लगे हैं। इस पावन उत्सव से पूरा मंदिर प्रांगण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आ रहा है, जहाँ हर कोई धर्म लाभ कमाने में जुटा हुआ है।
उत्सव के दौरान आयोजित प्रातःकालीन विशेष ध्यान शिविर में आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के आशीर्वाद से गणधर मुनि संघ ने उपस्थित श्रद्धालुओं को तीन लोक के स्वरूप का गहरा ध्यान कराया। मुनि संघ ने उर्ध्वलोक, मध्यलोक एवं अधोलोक का बहुत ही सुंदर ध्यान कराते हुए त्रिलोक की संपूर्ण संरचना और उसके आध्यात्मिक महत्व से सभी श्रद्धालुओं को विस्तार से परिचित कराया। इस साधना और ध्यान प्रक्रिया से सभी साधकों को मानसिक शांति और असीम ऊर्जा की अनुभूति हुई, जिससे उनका मन पूरी तरह ईश्वर की भक्ति में लीन हो गया।
जैन मंदिर में प्रातःकालीन मुख्य प्रवचन सत्र में मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज ने उत्तम संयम धर्म की बहुत ही सुंदर और वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए श्रद्धालुओं को जीवन का अनमोल संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपनी पांचों ज्ञानेंद्रियों के साथ-साथ सभी इंद्रियों के राजा कहे जाने वाले मन को भी अपने कड़े नियंत्रण में रखना चाहिए। मुनि श्री ने समझाया कि जिसका मन निरंतर यहाँ-वहाँ भटकता रहता है, वह कभी भी धर्म मार्ग में स्थिर नहीं हो सकता। जीवन को पूरी तरह संयमित और अनुशासित बनाकर ही धर्म के ऊंचे से ऊंचे सोपानों को प्राप्त किया जा सकता है।
धर्मसभा और प्रवचन कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने गहरी आस्था दिखाते हुए मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज का विधि-विधान से पाद प्रक्षालन किया तथा सभी मुनियों को सविनय शास्त्र भेंट किए। मंदिर समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बार के दसलक्षण पर्व के तहत प्रतिदिन अपराह्नकाल में पवित्र तत्त्वार्थ सूत्र का पूजन एवं उसके एक-एक अध्याय का विस्तृत व्याख्यान मुनि संघ द्वारा किया जा रहा है। इसके साथ ही संध्याकालीन वेला में आयोजित होने वाले प्रतिक्रमण के माध्यम से सभी श्रावकों को अपने जीवन के पापों से निवृत्ति पाने और प्रायश्चित करने के विभिन्न सोपानों का अभ्यास कराया जा रहा है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने पूरे आयोजन की जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस पावन अवसर पर मुनि श्री के पाद प्रक्षालन का परम सौभाग्य आशीष-शिल्पी एवं भौमिक सेठिया परिवार को प्राप्त हुआ है। उन्होंने आगे बताया कि दसलक्षण पर्व के इन दिनों में प्रतिदिन मंदिर में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से यह साबित होता है कि समाज के लोगों में धार्मिक और नैतिक संस्कारों के प्रति कितना अधिक लगाव है। समिति के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मिलकर इन आयोजनों को पूरी सफलता के साथ संचालित कर रहे हैं ताकि आने वाले हर भक्त को सुगमता से दर्शन और धर्म लाभ मिल सके।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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Author:अजय त्यागी
September 21, 2026: 9:51 PM
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