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Rex TV India
Latest News बाज़ार और निवेश Digital Newsletter 22 Sep 2026 · 4:17 PM

रूसी तेल की मांग बढ़ी, आपूर्ति संकट ने बदली भारत की खरीद रणनीति

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, भारत। रूसी तेल की मांग को लेकर Axis Bank Economic Research की रिपोर्ट ने कीमतों में छूट से अलग एक अहम कारण बताया है। पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधित होने के बाद भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात औसतन 60 मिलियन बैरल प्रति माह रहा, जबकि वित्त वर्ष 2023 से 2026 के दौरान यह औसत 46 मिलियन बैरल प्रति माह था। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से करीब 298 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात किया है। रिपोर्ट में इसे आपूर्ति परिस्थितियों से जुड़ी वृद्धि बताया गया है।  [1]

आपूर्ति संकट 

रूसी तेल की मांग में मौजूदा बढ़ोतरी को केवल कीमतों से जोड़ना रिपोर्ट के अनुसार पर्याप्त नहीं है। मार्च 2026 से रूस से अतिरिक्त करीब 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल आने की बात कही गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि 2023 से रूसी कच्चे तेल और पश्चिम एशियाई तेल के बीच औसत छूट लगभग 3 से 5 डॉलर प्रति बैरल रही है। इसके बावजूद भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी ऐसे समय भी बढ़ी, जब रूसी तेल पर पश्चिम एशिया के मुकाबले 7 डॉलर प्रति बैरल तक प्रीमियम देखा गया। इससे आपूर्ति की भूमिका महत्वपूर्ण दिखती है।

रूस की हिस्सेदारी भारत के आयातित कच्चे तेल के मिश्रण में मार्च 2022 से जून 2023 के बीच लगभग 0 प्रतिशत से बढ़कर 30 प्रतिशत हुई थी। Axis Bank की रिपोर्ट ने इस शुरुआती बदलाव को उस समय उपलब्ध छूट से जोड़ा था। लेकिन मौजूदा रूसी तेल की मांग में बढ़ोतरी के लिए रिपोर्ट ने आपूर्ति उपलब्धता को अधिक महत्वपूर्ण बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर अतिरिक्त 60 से 80 मिलियन बैरल तेल खुले बाजार से खरीदा जाता, तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें मौजूदा स्तर से अधिक हो सकती थीं। यह आकलन पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधाओं के संदर्भ में दिया गया है।

व्यापार पर असर

रिपोर्ट में ऊर्जा बाजार के साथ भारत के व्यापक व्यापार परिदृश्य का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अब तक भारत के निर्यात में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स, धातु तथा रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों ने इस वृद्धि में योगदान दिया है। अमेरिका को भारत के निर्यात में भी सुधार के संकेत बताए गए हैं। रिपोर्ट ने अमेरिकी टैरिफ नीति और कच्चे तेल की कीमतों के संबंध को भी रेखांकित किया है। उसके अनुसार, ऊंची तेल कीमतों का अमेरिकी खुदरा महंगाई पर सीधा असर पड़ सकता है, जबकि टैरिफ का प्रभाव व्यापारिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

रूसी तेल की मांग पर Axis Bank का आकलन बताता है कि हालिया आयात वृद्धि को समझने में पश्चिम एशिया की आपूर्ति स्थिति महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट ने यह भी बताया कि भारत के रूसी कच्चे तेल आयात की मात्रा बढ़ने के दौरान कीमतों में स्थायी अतिरिक्त छूट नहीं दिखी। इससे इतना स्पष्ट है कि उपलब्धता और आपूर्ति सुरक्षा मौजूदा आयात आंकड़ों की व्याख्या में महत्वपूर्ण कारक हैं। हालांकि, रिपोर्ट के आंकड़े बाजार की एक अवधि को दर्शाते हैं और भविष्य के आयात या कीमतों की दिशा की निश्चित भविष्यवाणी नहीं करते। आगे के रुझान वैश्विक आपूर्ति, कीमतों और व्यापार परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इसमें दिए गए बाजार और व्यापार संबंधी आंकड़े संबंधित रिपोर्टों में उपलब्ध अवधि और आकलन पर आधारित हैं तथा भविष्य के तेल आयात, कीमतों या व्यापार परिस्थितियों की गारंटी नहीं देते। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 22, 2026: 4:17 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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