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Rex TV India
Latest News राजस्थान Digital Newsletter 22 Sep 2026 · 6:56 PM

कोटा में तप की महत्ता बताते हुए मुनि श्री ने बाह्य और आंतरिक तप समझाए

मुनि श्री का एतिहासिक आयोजन

कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। रिद्धि-सिद्धि नगर में गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के शिष्य गणधर मुनि श्री 108 विवर्धन सागर जी महाराज ने प्रवचन में तप की महत्ता बताते हुए कहा कि तप दो प्रकार का होता है—बाह्य तप और आंतरिक तप। तप के माध्यम से व्यक्ति शरीर के प्रति ममत्व का त्याग कर आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ता है। मुनि श्री ने बाह्य तप के छह अंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि अनशन, उनोदरी, वृत्ति-परिसंख्यान, विविक्त शय्यासन, रस-परित्याग और कायक्लेश बाह्य तप के प्रमुख स्वरूप हैं। वहीं प्रायश्चित, विनय, वैयावृत्य, स्वाध्याय, व्युत्सर्ग और ध्यान आंतरिक तप के अंग हैं। उन्होंने कहा कि शरीर के प्रति ममत्व छोड़ना अत्यंत आवश्यक है। जब तक व्यक्ति शरीर और सांसारिक विषयों के प्रति आसक्ति से ऊपर नहीं उठता, तब तक संयमपूर्वक तप की साधना करना कठिन होता है। इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से समाज में नैतिकता और अनुशासन की भावना का निरंतर विकास होता है, जो मानवीय जीवन को एक नई और सकारात्मक दिशा प्रदान करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।

आंतरिक साधना

उन्होंने कहा कि तप केवल शारीरिक कष्ट सहने का नाम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आंतरिक परिवर्तन की साधना है। इस विशेष प्रसंग में जैन संतों द्वारा समझाई गई तप की महत्ता को जीवन में उतारना बेहद आवश्यक माना गया है। सच्ची श्रद्धा और सम्यक भाव के बिना किया गया तप अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर सकता। तप में बाहरी अनुशासन के साथ मन की निर्मलता और आत्मचिंतन भी आवश्यक है। आधुनिक युग में भौतिकता की दौड़ के बीच इस तरह के धार्मिक और आध्यात्मिक विचार मनुष्य को मानसिक शांति और सही मार्ग दिखाने का कार्य करते हैं। मुनि श्री के वचनों को सुनने के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे, जिन्होंने धर्म लाभ उठाया और अपने जीवन को नैतिक मूल्यों के आधार पर संचालित करने का गहरा संकल्प लिया।

धार्मिक आयोजन

मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि कार्यक्रम में पाद प्रक्षालन का सौभाग्य महावीर कुमार, पंकज-वंदना, गीतांश एवं मानस खटोड़ (गढ़हाला) परिवार को प्राप्त हुआ। इस आयोजन के दौरान वक्ताओं ने भी इस बात पर विशेष जोर दिया कि जैन दर्शन में तप की महत्ता का बहुत बड़ा स्थान है। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने महाराजश्री के प्रवचन को अत्यंत ध्यानपूर्वक सुना और अपने जीवन में इन उच्च आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प दोहराया। इस प्रकार के भव्य धार्मिक आयोजनों से न केवल आपसी सौहार्द और भाईचारे की भावना मजबूत होती है बल्कि संपूर्ण क्षेत्र में एक सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार भी होता है, जो समाज को एकता के सूत्र में बांधकर आगे बढ़ाने के लिए बेहद मददगार साबित होता है।

भविष्य की राह

भविष्य में भी इस प्रकार के प्रेरणादायक प्रवचन कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला को लगातार जारी रखने का निर्णय लिया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग आध्यात्मिक ज्ञान से लाभान्वित हो सकें। विद्वानों ने अपने संबोधन में एक बार फिर से इस बात को रेखांकित किया कि जीवन में तप की महत्ता को समझकर ही मनुष्य अपने आंतरिक विकारों को दूर कर सकता है। वक्ताओं ने कहा कि धर्म के मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति अपने जीवन के वास्तविक लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर कर सकता है। इस पूरी धर्मसभा के समापन के बाद उपस्थित सभी भक्तों ने मिलकर एक साथ भोजन और सेवा कार्यों में सहभागिता निभाई, जिससे आपसी प्रेम और सहयोग का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिला और सभी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक करार दिया।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के अंतर्गत दी गई तप की महत्ता से जुड़ी सभी जानकारियां वर्तमान उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 22, 2026: 6:56 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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