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Rex TV India
Latest News राजस्थान Digital Newsletter 22 Sep 2026 · 10:12 PM

भादवा सुदी द्वादशी पर कोडमदेसर भैरव मंदिर में भरेगा दो दिवसीय मेला

कोडमदेसर भैरव जी मंदिर

बीकानेर, राजस्थान। बीकानेर से 24 किलोमीटर दूर ऐतिहासिक व सर्व जाति-समुदाय के श्रद्धालुओं के आस्था केंद्र कोडमदेसर में भैरवजी का सालाना मेला 23 व 24 सितंबर को भरेगा। अनेक श्रद्धालु पैदल व विभिन्न वाहनों से 23 सितंबर को सुबह रवाना होकर कोडमदेसर गांव पहुंचेंगे तथा रात को ठहर कर भैरवजी की स्तुति वंदना व भक्ति करेंगे। श्री देदारामजी गहलोत वंशज सार्वजनिक प्रन्यास के पदाधिकारियों व पुजारी परिवार की सभा में मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, भीड़ नियंत्रण, सुगमता से दर्शन, पूजन और आकर्षक रोशनी की व्यवस्था की गई है, जिससे आने वाले सभी भक्तों को पूरी सुविधा मिल सके।

प्रन्यास की पहल

श्री देदारामजी प्रन्यास के अध्यक्ष विजय गहलोत ने बताया कि भादवा सुदी द्वादशी बुधवार को भैरवजी का पूजन, विशेष श्रृंगार, भोग व महा आरती के साथ विधि-विधान से मेले की शुरुआत होगी। मेला स्थल पर खान-पान की वस्तुओं, खिलौनों व प्रसाद की दुकानें लगनी शुरू हो गई हैं। बीकानेर शहर व आसपास के गांवों के श्रद्धालु बुधवार सुबह ही पैदल व वाहनों में भैरव नाथ का जयकारा लगाते हुए मंदिर में दर्शन वंदन करने पहुंचेंगे। प्रन्यास की ओर से जिला व प्रशासन को ज्ञापन देकर मेले के दौरान चोरी रोकने, अस्थाई अतिक्रमण हटाने और यातायात को सुव्यवस्थित करने के लिए माकूल व्यवस्था करने की मांग की गई है।

सेवा शिविर

बीकानेर की चूंगी चौकी से लेकर कोडमदेसर गांव तक अनेक सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों की ओर से सेवा शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में चाय, नाश्ता, पेयजल, पकौड़ी, फल व आइसक्रीम आदि की सेवा की जाएगी। मंगलवार को ही अनेक सेवा संगठनों ने टेंट लगवा लिए हैं। बीकानेर स्थापना से पूर्व सन् 1465 के आसपास राव बीकाजी के समय का यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक महत्ता के लिए जाना जाता है। कोडमदेसर नाम राव जोधा की पुत्री और राव बीका की बहन राजकुमारी कोडमदे के नाम पर पड़ा है। मंदिर के ठीक पीछे एक बड़ा तालाब है, जिस पर 1459 ईस्वी के ऐतिहासिक तथ्य अंकित हैं।

खुले आसमान के नीचे

भैरवजी की मूर्ति खुले आसमान के नीचे स्थापित है तथा इस मंदिर पर कोई छत नहीं है। कोडमदेसर भैरवजी को बीकानेर नगर ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ और अन्य क्षेत्रों के लोग भी अपना रक्षक मानते हैं। श्री देदारामजी गहलोत के पूर्वजों ने भैरवजी की मूर्ति को यहां स्थापित किया था, इसलिए आज भी गहलोत परिवार पुजारी के रूप में सेवा करते हैं। रियासतकाल में महाराजा गंगासिंह ने इटली के संगमरमर से मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। मेले के दौरान राजपरिवार की ओर से छत्र व भेंट चढ़ाने की परंपरा रही है, जो इस ऐतिहासिक आयोजन के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को और अधिक बढ़ा देती है।

धार्मिक परंपरा

मेले के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। दूर-दराज से आने वाले पदयात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि सभी भक्त शांतिपूर्ण तरीके से बाबा के दर्शन कर सकें। इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से न केवल स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिलता है बल्कि आपसी भाईचारे की भावना भी मजबूत होती है। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अनुशासन बनाए रखें और इस ऐतिहासिक मेले को सफल बनाने में अपना पूरा सहयोग प्रदान करें।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के अंतर्गत दी गई कोडमदेसर भैरवजी का मेला से जुड़ी सभी जानकारियां वर्तमान उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 22, 2026: 10:12 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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