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Rex TV India
Latest News समीक्षा Digital Newsletter 23 Sep 2026 · 10:06 AM

देशभर के तकनीकी संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या ने बढ़ाई चिंता

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, दिल्ली। देश के 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में पिछले पांच वर्षों के दौरान कुल 45 विद्यार्थियों ने अपनी जान गंवाई है। इनमें से 28 पीड़ित छात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग समुदायों से संबंधित थे। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सरकारी आंकड़े हाल ही में संसद में साझा किए गए हैं, जिससे उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।  [1]

आरक्षित श्रेणियां

आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जाति के 9, अनुसूचित जनजाति के 7 और अन्य पिछड़ा वर्ग के 12 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की है। इसके अलावा सामान्य वर्ग के 16 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का 1 छात्र इस सूची में शामिल है। वर्ष 2023 और 2024 के दौरान इन मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। इन आंकड़ों को लोकसभा में प्रस्तुत किए गए एक प्रश्न के उत्तर के माध्यम से संकलित किया गया है। शिक्षा जगत से जुड़े जानकारों का मानना है कि परिसरों में छात्रों के मानसिक दबाव को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की बेहद आवश्यकता है ताकि युवाओं को बचाया जा सके।

संस्थान की स्थिति

विभिन्न परिसरों में दर्ज मामलों की बात करें तो आंकड़ों में भिन्नता देखने को मिलती है। हैदराबाद स्थित परिसर में सबसे अधिक 7 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा खड़गपुर, दिल्ली और कानपुर परिसरों में ऐसे 6-6 मामले दर्ज किए गए हैं। मद्रास में 5 और वाराणसी में 4 विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की पुष्टि हुई है। वर्ष 2024 और 2025 के दौरान कुल 13 विद्यार्थियों ने अपनी जीवन लीला समाप्त की, जिनमें विभिन्न आरक्षित श्रेणियों के छात्र भी शामिल रहे हैं। इन आंकड़ों के आने के बाद विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है।

प्रशासनिक जांच

इन तमाम मामलों के बीच प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता और कारणों की गहराई से पड़ताल की मांग उठ रही है। हालांकि उपलब्ध दस्तावेजों में छात्रों की पढ़ाई के पाठ्यक्रम या आत्महत्या के सटीक कारणों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसके अतिरिक्त इन 45 मामलों के अलावा 8 अन्य अप्राकृतिक मौतों का भी रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। विभिन्न छात्र संगठनों ने कुछ परिसरों में इसको लेकर प्रदर्शन भी किए हैं। इस बीच शिक्षण संस्थानों के भीतर मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्रों को और अधिक मजबूत बनाने तथा छात्रों के तनाव को कम करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

भविष्य की राह

देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार और संस्थान प्रशासन मिलकर नई नीतियां तैयार कर रहे हैं। आत्महत्या का यह पूरा दौर शिक्षण संस्थानों में अकादमिक दबाव और सामाजिक भेदभाव के मुद्दों को भी गहराई से उजागर करता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि परिसरों में एक ऐसा अनुकूल वातावरण बनाया जाना चाहिए जहां छात्र बिना किसी डर या मानसिक तनाव के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। आने वाले समय में इन संस्थानों में काउंसलिंग सेवाओं को अनिवार्य और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है ताकि युवाओं की जान बचाई जा सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट में दी गई संख्याएं और विवरण आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 23, 2026: 10:06 AM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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