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Rex TV India
Latest News राजस्थान Digital Newsletter 23 Sep 2026 · 9:55 PM

श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम त्याग धर्म का विशेष आयोजन

पाद प्रक्षालन सौभाग्य

कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। रिद्धि-सिद्धि नगर स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार को उत्तम त्याग धर्म पूरी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर सुबह के सत्र में चतुर्गति में तिर्यंच गति का ध्यान कराया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इसके बाद मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया जिनमें भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी निष्ठा प्रकट की। इस पावन पर्व पर पूरे जैन मंदिर का माहौल भक्तिमय और अनुशासन से परिपूर्ण नजर आया।

प्रवचन के मुख्य बिंदु

प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के सुशिष्य मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज ने पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व के उत्तम त्याग धर्म की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज तक जितने भी महापुरुष हुए हैं, उन्होंने त्याग के मार्ग को अपनाकर ही महानता प्राप्त की है। चक्रवर्ती सम्राट भरत ने भी अपने राज्य, ऐश्वर्य और समस्त भोगों का त्याग किया था, तब जाकर उन्हें केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी। मुनि श्री ने समझाया कि मनुष्य अपने जीवन में अनेक वस्तुओं के परिग्रह में उलझा रहता है, लेकिन सच्ची त्याग भावना का विकास सम्यकदृष्टि व्यक्ति के जीवन में ही संभव हो पाता है।

चार प्रकार के दान

मुनि श्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि उत्तम त्याग का भाव केवल व्यक्तिगत जीवन तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के कल्याणकारी कार्यों में भी दान के माध्यम से अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए। जैन दर्शन में चार प्रमुख प्रकार के दान बताए गए हैं जिनमें अभयदान, शास्त्रदान, आहारदान और औषधदान शामिल हैं। इन चारों प्रकार के पवित्र दानों के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता की जा सकती है और अपने जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।

समितियों के सेवाकार्य

मंदिर के अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा तथा मंत्री पंकज खटोड़ ने इस आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर चित्र अनावरण एवं पाद प्रक्षालन का सौभाग्य ताराचंद, महावीर प्रसाद, पदम कुमार, अशोक कुमार, दिनेश और विपिन बड़ला के परिवार ने प्राप्त किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने समाधिसम्राट गणाचार्य 108 विराग सागर जी महाराज की विशेष पूजन भी पूरी श्रद्धाभाव के साथ संपन्न की। मंदिर में दिनभर धार्मिक आयोजनों का सिलसिला चलता रहा जिसमें भक्तों ने बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

शाम की महाआरती

दोपहर के समय श्रद्धालुओं के लिए तत्वार्थ सूत्र का वाचन किया गया जिसके बाद सभी ने ध्यान और पठन में समय व्यतीत किया। वहीं शाम के वक्त भगवान श्री चंद्रप्रभु तथा आचार्य विराग सागर जी महाराज सहित समस्त मुनि संघ की भव्य आरती भक्तों द्वारा अत्यंत धूमधाम से की गई। आरती के दौरान गूंजे जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा और अंत में सभी उपस्थित भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट कोटा में आयोजित जैन धर्म के धार्मिक कार्यक्रमों और प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक जागरूकता के उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े नियम और परंपराएं संतों एवं मंदिर समितियों के मार्गदर्शन के अधीन होती हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 23, 2026: 9:55 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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