बीकानेर, राजस्थान। एचपीवी टीकाकरण एवं लाडो प्रोत्साहन योजना की प्रगति की समीक्षा के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद श्रीमती शैलजा पांडे की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित की गई। बैठक में ब्लॉकवार तथा आवश्यकता के अनुसार संस्थानवार एचपीवी टीकाकरण की प्रगति एवं लाडो प्रोत्साहन योजना की पेंडेंसी की समीक्षा की गई। श्रीमती शैलजा पांडे ने तेईस से तीस सितंबर तक संचालित विशेष एचपीवी टीकाकरण अभियान के दौरान सीनियर सेकेंडरी स्तर के विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं कोचिंग संस्थानों तक सीधे पहुंचकर समन्वय स्थापित करने तथा अधिकाधिक पात्र किशोरियों का टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पुखराज साध ने कहा कि लाडो प्रोत्साहन योजना एवं जननी सुरक्षा योजना जैसी डीबीटी लाभ योजनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पूर्ण सतर्कता के साथ समयबद्ध कार्य करते हुए पेंडेंसी समाप्त करने तथा मुख्यालय पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए। जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ भवानी शंकर गहलोत द्वारा एचपीवी टीकाकरण तथा लाडो प्रोत्साहन योजना की गहन समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए गए।
बैठक में डॉ गहलोत एवं यूएनडीपी कार्यक्रम अधिकारी योगेश शर्मा ने एचपीवी टीकाकरण की माइक्रो प्लानिंग, सत्र निर्माण, विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजन तथा अभिभावकों के लिए पीटीएम आयोजित करने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की और आवश्यक निर्देश दिए। जिला कार्यक्रम समन्वयक आईईसी मालकोश आचार्य ने एचपीवी टीकाकरण को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रांतियों के विरुद्ध सोशल मीडिया के माध्यम से सकारात्मक एवं तथ्यपरक सूचनाएं तथा वीडियो प्रसारित करने संबंधी जानकारी दी।
डॉ गहलोत ने बताया कि एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। एचपीवी टीकाकरण संक्रमण से बचाव और भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान विशेष अभियान में चौदह से पंद्रह वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों को लक्षित किया गया है। बीकानेर जिले में कुल 27,707 किशोरियों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके विरुद्ध अब तक 9 हजार किशोरियों का टीकाकरण हो चुका है।
लाडो प्रोत्साहन योजना राजस्थान सरकार की योजना है, जिसका उद्देश्य बालिका के जन्म के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना तथा उसके पालन-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना है। योजना के संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र बालिका को कुल 1.50 लाख रुपये की राशि सात किश्तों में डीबीटी के माध्यम से दी जाती है। पहली छह किश्तें बालिका के माता-पिता या अभिभावक के बैंक खाते में तथा सातवीं किश्त बालिका के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है। योजना का उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा एवं स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।
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Author:अजय त्यागी
September 24, 2026: 10:44 PM
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