कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। अनंत चतुर्दशी के इस अत्यंत पावन और पवित्र अवसर पर विज्ञान नगर जैन मंदिर में सुबह से लेकर शाम तक विभिन्न धार्मिक आयोजनों की धूम मची रही। दिन की शुरुआत में सबसे पहले भगवान महावीर का विधिवत अभिषेक और शांतिधारा का पवित्र अनुष्ठान संपन्न हुआ। इसके पश्चात दोपहर के समय एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई जिसमें बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने अपार उत्साह के साथ भाग लिया। इस यात्रा के दौरान महिलाएं विशेष रूप से एक जैसी पीली साड़ियों में और पुरुष पारंपरिक सफेद कुर्ता-पायजामा पहनकर शामिल हुए, जिससे पूरे मार्ग में एक अद्भुत और अनुशासित दृश्य देखने को मिला।
अनंत चतुर्दशी पर कार्यक्रम के दौरान अपने आशीर्वचन देते हुए शास्त्री सीताराम अग्रवाल ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि अपनी समस्त विषय-वासनाओं से मन को पूरी तरह हटाकर अपने आत्मस्वरूप में लगाना ही सच्चा ब्रह्मचर्य धर्म है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महान धर्म के सही पालन से ही मनुष्य के लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। मंदिर समिति के मंत्री पी.के. हरसोरा ने जानकारी देते हुए बताया कि भगवान महावीर का मुख्य अभिषेक और शांतिधारा श्री महावीर अजमेरा तथा पवन पांडेया के द्वारा संपन्न की गई। इसके अलावा शांतिधारा करने वाले अन्य गणमान्य लोगों में समाज के कई प्रतिष्ठित और समर्पित श्रद्धालु शामिल रहे।
दोपहर के समय विज्ञान नगर के प्रमुख मार्गों से जब भव्य शोभायात्रा गुजरी तो पूरा शहर भक्तिमय हो गया। इस दौरान कठिन तपस्या करने वाले तपस्वी रितेश सेठी, अमित जैन चिकू और रिंकू गोधा को विशेष रूप से सुंदर बग्घी में बैठाकर सम्मानित किया गया। यात्रा के पूरे मार्ग में जगह-जगह रुककर श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर स्वामी की आरती उतारी और उनका अभिनंदन किया। महामंत्री अनिल ठौरा ने बताया कि इसी दौरान वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस के पावन अवसर पर मंदिर के भीतर निर्वाण कांड और विशेष पूजन का कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें सभी ने बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

अनंत चतुर्दशी के इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान भगवान को मुख्य मोदक चढ़ाने का परम सौभाग्य सुनील सरला कासलीवाल को प्राप्त हुआ। इसके साथ ही सायंकाल के समय हुए विशेष अभिषेक के उपरांत पावन माला प्राप्त करने का सौभाग्य मंजू नमन सेठी, अनिल बाकलीवाल और कैलाश-अंकुश जैन को मिला। इन सभी आयोजनों ने मंदिर परिसर के माहौल को पूरी तरह से आध्यात्मिक और आनंदमय बना दिया, जिससे हर एक श्रद्धालु का मन प्रफुल्लित हो उठा और सभी ने इस प्रकार के आयोजनों को अपनी संस्कृति के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
इस पूरे दिन चलने वाले धार्मिक कार्यक्रमों का समापन महावीर युवा मंडल के विशेष तत्वावधान में आयोजित की गई एक भव्य महाआरती के साथ हुआ। इस महाआरती के समय पूरा मंदिर परिसर एक साथ जगमगाते हुए 1008 दीपों की रोशनी से पूरी तरह जगमगा उठा। इस अद्भुत दृश्य ने सभी का मन मोह लिया। इसके तुरंत बाद 48 सुंदर दीपों की उपस्थिति के बीच पवित्र रिद्धि मंत्रों के साथ सामूहिक रूप से भक्तामर पाठ का आयोजन किया गया, जिसने इस पावन पर्व को हमेशा के लिए सभी की स्मृतियों में अमर बना दिया।
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Author:अजय त्यागी
September 25, 2026: 7:09 PM
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