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Rex TV India
Latest News दिल्ली Digital Newsletter 26 Sep 2026 · 7:25 PM

न्यायमूर्ति नागरत्ना का बयान, पारिवारिक विवादों में वैकल्पिक समाधान

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना

नई दिल्ली, भारत। देश की सर्वोच्च अदालत से इस वक्त एक बेहद अहम और वैचारिक रूप से संवेदनशील खबर सामने आ रही है, जो न्याय प्रणाली से जुड़ी हुई है। सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा है कि देश में बढ़ रहे पारिवारिक विवाद मामलों को सामान्य मुकदमों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि वैवाहिक और घरेलू मामलों के त्वरित तथा संवेदनशील समाधान के लिए पारंपरिक न्यायिक प्रक्रिया के साथ वैकल्पिक विवाद समाधान यानी एडीआर पद्धतियों का मेल होना बहुत जरूरी है।  [1]

न्यायिक दृष्टिकोण

अपने इस महत्वपूर्ण संबोधन के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने स्पष्ट रूप से यह रेखांकित किया कि अदालतों में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए मध्यस्थता एक अचूक हथियार साबित हो सकती है। उनका यह मानना था कि पारिवारिक विवाद जैसे मामलों में अक्सर दोनों पक्षों के बीच भावनात्मक और मानवीय रिश्ते जुड़े होते हैं, जिन्हें केवल अदालती फैसलों से हमेशा के लिए ठीक नहीं किया जा सकता है। पारंपरिक अदालती मुकदमेबाजी कई बार आपसी कड़वाहट को और अधिक बढ़ा देती है, जबकि मध्यस्थता के जरिए परिवारों को टूटने से बचाने और आपसी सहमति से समझौते तक पहुंचने के अनगिनत रास्ते आसानी से खुल जाते हैं।

संवेदनशील पहलू

न्यायमूर्ति ने अपने भाषण में इस बात को भी गहराई से समझाया कि बच्चों की कस्टडी, भरण-पोषण और आपसी अधिकारों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। पारिवारिक विवाद के इन पेचीदा पहलुओं को सुलझाने के लिए जज और वकीलों को भी पारंपरिक कानूनी दांवपेच से ऊपर उठकर एक काउंसलर की भूमिका निभाने की जरूरत है। उन्होंने देश भर के सभी न्यायविदों से यह अपील की कि वे मुकदमों की संख्या बढ़ाने के बजाय मुवक्किलों के बीच आपसी संवाद को फिर से बहाल करने का प्रयास करें। इस प्रकार का सकारात्मक दृष्टिकोण अदालतों के प्रति आम जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

मध्यस्थता महत्व

वैकल्पिक विवाद समाधान यानी एडीआर तंत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि लोक अदालत और मध्यस्थता केंद्र अदालतों का बोझ हल्का करने का सबसे बड़ा माध्यम हैं। पारिवारिक विवादों से पीड़ित महिलाओं और बच्चों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में यदि मध्यस्थता को अनिवार्य रूप से जोड़ दिया जाए, तो मामलों का निस्तारण बेहद कम समय में संभव हो सकेगा। पूर्व के कई मामलों में यह देखा गया है कि जिन विवादों को पारंपरिक अदालतों में दशकों लग जाते हैं, वे आपसी बातचीत और प्रशिक्षित मध्यस्थों के सहयोग से कुछ ही बैठकों में सफलतापूर्वक सुलझ जाते हैं, जिससे दोनों पक्षों का समय और पैसा दोनों बचते हैं।

कानूनी सुधार

देश के मौजूदा कानूनी ढांचे में और अधिक सुधार करने की आवश्यकता जताते हुए उन्होंने पारिवारिक अदालतों की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने का सुझाव भी दिया है। पारिवारिक विवाद के मामलों से निपटने वाले न्यायाधीशों को विशेष रूप से मनोवैज्ञानिक और संवाद कौशल का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि वे मामलों की तह तक आसानी से पहुंच सकें। बार काउंसिल और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की भी यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने मुवक्किलों को लंबी अदालती लड़ाई में उलझाने के बजाय सुलह और समझौते के रास्ते अपनाने के लिए प्रेरित करें। इस तरह की वैचारिक क्रांति से ही देश की न्याय व्यवस्था को अधिक मानवीय और सुलभ बनाया जा सकता है।

विशेषज्ञ प्रतिक्रिया

न्यायाधीश के इस दूरदर्शी बयान का देश भर के कानूनी विशेषज्ञों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और समाज सुधारकों द्वारा व्यापक स्तर पर स्वागत किया जा रहा है। कई वरिष्ठ वकीलों का यह कहना है कि पारिवारिक विवादों के बढ़ते ग्राफ को रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर भी काउंसलिंग सेंटरों को मजबूत करने की सख्त आवश्यकता है। जब तक समाज और न्यायपालिका मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक घरेलू विघटन की इन समस्याओं का स्थाई समाधान ढूंढ पाना बेहद कठिन साबित होगा। पूरी कानूनी बिरादरी अब इस बात पर विचार कर रही है कि किस प्रकार मध्यस्थता को अदालती कार्यवाही का एक अभिन्न और अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट में शामिल बयानों और दावों की पुष्टि हमारा संस्थान नहीं करता है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी September 26, 2026: 7:25 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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