सिंगापुर। अमेरिकी डॉलर बुधवार को यूरो के मुकाबले इस साल के अपने उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। सितंबर के महीने में डॉलर ने अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में शानदार प्रदर्शन किया है, जिसका मुख्य कारण मजबूत अमेरिकी आर्थिक वृद्धि और बढ़ती ब्याज दरें हैं। इसके विपरीत, यूरोप ऊर्जा संकट और कर्ज के बढ़ते बोझ जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, जिससे यूरोपीय मुद्रा पर लगातार दबाव बना हुआ है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषकों का कहना है कि यह अंतर मुद्रा बाजार में डॉलर की स्थिति को और अधिक मजबूत कर रहा है। [1]
मुद्रा बाजार के आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय साझा मुद्रा यूरो में इस महीने भारी गिरावट दर्ज की गई है और यह अपने कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया है। फ्रांस के राजनीतिक गतिरोध और बढ़ते कर्ज के आंकड़ों ने यूरोपीय बाजारों की चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है। इसके अलावा, बेंचमार्क यूरोपीय गैस की कीमतों में हालिया उछाल ने वहां की अर्थव्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। निवेशकों का रुझान यूरोपीय संपत्तियों से हटकर सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी बाजारों की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहा है।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और लगातार मजबूत होती आर्थिक रिपोर्टों ने डॉलर की इस छलांग में मुख्य भूमिका निभाई है। अमेरिका में उपभोक्ता खर्च और रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं, जिससे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि फेडरल रिजर्व मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए अपनी मौद्रिक नीति को और सख्त कर सकता है। इस नीतिगत अंतर के कारण वैश्विक निवेशक अपने फंड को अमेरिकी डॉलर में निवेश करना अधिक सुरक्षित मान रहे हैं।
डॉलर की इस आंधी में केवल यूरो ही नहीं, बल्कि दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राएं भी कमजोर होती नजर आ रही हैं। स्विस फ्रैंक और ब्रिटिश पाउंड जैसी मुद्राएं भी डॉलर के मुकाबले अपने बहुचर्चित निचले स्तरों के आसपास कारोबार कर रही हैं। जापानी येन पर भी लंबे समय से दबाव बना हुआ है, हालांकि कैरी ट्रेड रणनीतियों में बदलाव के कारण इसमें कुछ उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। कुल मिलाकर, वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में इस समय ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर का एकछत्र प्रभाव दिखाई दे रहा है।
आगामी हफ्तों में आने वाले अमेरिकी रोजगार के आंकड़े और महंगाई के आंकड़े यह तय करेंगे कि डॉलर की यह तेजी कब तक जारी रहेगी। यूरोपीय अर्थव्यवस्था के सामने खड़े भू-राजनीतिक और ऊर्जा संकट का समाधान जब तक नहीं निकलता, तब तक यूरो की स्थिति नाजुक बनी रह सकती है। निवेशकों और नीति निर्माताओं की नजरें अब केंद्रीय बैंकों के आगामी निर्णयों पर टिकी हुई हैं। जानकारों का अनुमान है कि जब तक वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है, तब तक मुद्रा बाजार में डॉलर का यह दबदबा कायम रह सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
September 30, 2026: 10:36 AM
© 2026 Rex TV India
Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com