बीकानेर, राजस्थान। बीकानेर नगर की विभिन्न प्रमुख संस्थाओं द्वारा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित युवा फोटो जर्नलिस्ट अज़ीज़ भुट्टा का एक गरिमामयी कार्यक्रम में भव्य सम्मान किया गया। इस विशेष कार्यक्रम के दौरान उनकी शानदार उपलब्धियों और कलात्मक योगदान की खुलकर चर्चा की गई। मुक्ति संस्था के सचिव राजेंद्र जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि एक चित्र हजार शब्दों को बयां करता है और अजीज द्वारा खींचे गए छायाचित्र मूक नहीं बल्कि बेहद जीवंत प्रतीत होते हैं। जोशी ने आगे कहा कि भुट्टा के पर्व, त्योहार, घटना और दुर्घटना के चित्र पूरी कहानी बयान करते नजर आते हैं। फोटो पत्रकार अज़ीज़ भुट्टा ने हमेशा अपने श्वेत-श्याम व रंगीन छायाचित्रों से पाठकों को गहराई से आकर्षित किया है।
शब्दरंग साहित्य एवं कला संस्थान के संयोजक अशफ़ाक कादरी ने कहा कि फोटो जर्नलिस्ट अज़ीज़ भुट्टा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीकानेर का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। इनकी दिव्य दृष्टि से खींचा गया पहला ऐतिहासिक फोटो 'बवंडर' इक्कीस साल का हो चुका है, जिसे जुलाई दो हजार पांच में बीकानेर में आए भीषण बवंडर के दौरान कैमरे में कैद किया गया था और इस पर उन्हें इफ़्रो एशिया अवार्ड अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल पुरस्कार से नवाजा गया था। उनकी यह तस्वीर आज भी फोटोग्राफी के क्षेत्र में एक मील का पत्थर मानी जाती है, जिसे देखकर हर कोई उनकी अद्भुत कला कौशल और सूझबूझ की जमकर सराहना करता है।
शब्दरंग के सचिव, कवि तथा कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि फोटो जर्नलिस्ट अज़ीज़ भुट्टा बीकानेर की असली शान हैं, जो पिछले तीन दशकों से अपने कैमरे के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और जन सरोकारों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भुट्टा की तस्वीरें केवल समाचारों का दस्तावेज मात्र नहीं हैं, बल्कि यह आने वाले समय के लिए इतिहास को संजोने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण माध्यम साबित हो रही हैं। उनके कैमरे की नजर ने हमेशा जमीनी हकीकत को बिना किसी लाग-लपेट के दुनिया के सामने बेबाकी से रखा है, जो उनकी पत्रकारिता के प्रति सच्ची निष्ठा और समर्पण भाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
मरू नवकिरण मंच के संयोजक डॉ. अजय जोशी ने कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए कहा कि अज़ीज़ भुट्टा बीकानेर की सोंधी माटी से पूरी तरह जुड़े हुए एक ऐसे वरिष्ठ छायाकार हैं, जिनके चित्रों में इस नगर की असली संस्कृति और लोक जीवन साफ नजर आता है। वक्ताओं ने एक स्वर में माना कि उनकी फोटोग्राफी ने शहर की कला और संस्कृति को एक नई और वैश्विक पहचान दिलाई है। इस सम्मान समारोह के दौरान शहर के तमाम गणमान्य लोग, साहित्यकार, पत्रकार और कलाप्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिन्होंने अज़ीज़ भुट्टा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें इसी प्रकार पूरी निष्पक्षता और लगन के साथ समाजहित में अपने कैमरे का सफर जारी रखने के लिए प्रेरित किया।
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Author:अजय त्यागी
September 30, 2026: 4:40 PM
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