भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। आस्था, संयम और साधना के दृढ़ संकल्प के साथ कठोर तपस्या करने वाली सुश्राविकाओं का बुधवार को स्थानीय यश विहार में भव्य एवं गरिमामयी सम्मान आयोजित हुआ। शीतल यश प्रोत्साहन महिला मंडल की ओर से आयोजित किए गए इस विशेष समारोह में सिद्धि तप की कठिन आराधना करने वाली अट्ठाइस सुश्राविकाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनका बहुमान किया गया। इस धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम के दौरान मंडल की कार्याध्यक्ष नीता बाबेल ने उपस्थित सभी तपस्वियों के सत्कार और सम्मान का सौभाग्य प्राप्त किया। वहीं दूसरी ओर ग्यारह उपवास की लंबी तपस्या पूर्ण करने पर मंडल की अन्य सभी सदस्यों ने मिलकर कार्याध्यक्ष नीता बाबेल का भी शॉल ओढ़ाकर बहुमान किया।
कार्यक्रम के अगले चरण में मंडल अध्यक्ष रेखा नानेचा ने सभी को संबोधित करते हुए बताया कि इस विशेष मासिक बैठक की औपचारिक शुरुआत जैन नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप के साथ की गई। इसके पश्चात सभी उपस्थित सदस्यों ने एक स्वर में सामूहिक रूप से यश चालीसा का पाठ कर धर्माराधना और प्रार्थना की। बैठक के दौरान आगामी दिनों में महिला मंडल द्वारा क्षेत्र में प्रस्तावित विभिन्न सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही संस्था द्वारा चलाए जा रहे सेवा कार्यों को भविष्य में और अधिक प्रभावी तथा उपयोगी बनाने के लिए सभी सदस्यों ने अपने बहुमूल्य सुझाव भी साझा किए।
इस गरिमामयी समारोह के दौरान अठाई से अधिक लंबी तपस्या एवं सिद्धि तप की कठोर आराधना करने वाली प्रमुख सुश्राविकाओं मैना बाफना, रेखा नानेचा, राखी खमेसरा, बिंदू धूपिया, अंगुरबाला पीपाड़ा, कांता सोनी, लाड़ बम्ब, मैना चंडालिया, शकुंतला खमेसरा, सुशीला बिलवाड़िया, मंजू डागा और सीमा संचेती सहित अन्य सभी तपस्विनियों का माला पहनाकर स्वागत और सम्मान किया गया। शीतल यश प्रोत्साहन महिला मंडल की पूरी कार्यकारिणी की ओर से सभी तपस्विनियों की महान तप आराधना की भरपूर अनुमोदना करते हुए उन्हें हार्दिक साधुवाद अर्पित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में मंडल की मंत्री राखी खमेसरा ने मंच से सभी का आभार व्यक्त किया। इस महत्वपूर्ण बैठक में महिला मंडल की बड़ी संख्या में उत्साही सदस्य बहनों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज करवाते हुए भाग लिया। इस प्रकार के धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में धर्मपरायणता, संयम और आपसी सहयोग की भावना को और अधिक मजबूती मिलती है। साथ ही ऐसी प्रेरणादायी बैठकों से युवा और नई पीढ़ी को भी जैन धर्म के संयम के मार्ग पर चलने की गहरी प्रेरणा प्राप्त होती है।
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Author:अजय त्यागी
September 30, 2026: 7:30 PM
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