बीकानेर, राजस्थान। कभी-कभी अपनों की तकलीफें इंसान की जिंदगी और पेशेवर सफर को एक नया मोड़ दे देती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक दास्तान एक समर्पित फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. भरत खत्री की है जिनकी जीवनसंगिनी लंबे समय तक वर्टिको जैसी जटिल समस्या से जूझती रहीं। तमाम कोशिशों के बाद भी जब उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली तो चिकित्सक पति ने इसे व्यक्तिगत चुनौती के रूप में लिया। पत्नी की बीमारी ने उन्हें इस विषय की गहराई तक जाने के लिए मजबूर कर दिया ताकि वे मेडिकल साइंस की मदद से इस रहस्य को सुलझा सकें और पीड़ित मानवता की सेवा कर सकें।
वर्टिको मूल रूप से एक ऐसी शारीरिक स्थिति है जिसमें मरीज को बिस्तर से उठते या लेटते वक्त तेज चक्कर आने का गंभीर अहसास होता है। इसके अलावा रोगी को अपने आसपास की हर चीज घूमती हुई महसूस होने लगती है। इस अध्ययन के दौरान डॉ. भरत खत्री ने पीसी-बीपीपीवी से ग्रसित कुल 105 प्रतिभागियों को अपने दायरे में शामिल किया। वैज्ञानिक आंकड़ों के जरिए मरीजों के शारीरिक संतुलन, चक्कर आने से पैदा होने वाली अक्षमता और उनके जीवन की समग्र गुणवत्ता जैसे पहलुओं का बेहद बारीकी से विश्लेषण किया गया, जिससे पत्नी की बीमारी के असली कारणों को समझने में भी बड़ी मदद मिली।
इस अनूठे शोध का सबसे खास पहलू यह रहा कि इसमें सिर्फ तात्कालिक राहत पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया। डॉक्टर खत्री ने यह भी परखा कि चक्कर बंद होने के बाद भी मरीजों के मन में गतिविधियों को लेकर कितना डर रहता है। कई मामलों में बीमारी ठीक होने के बाद भी कुछ समय तक शरीर का संतुलन पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाता है। इसी जरूरत को समझते हुए वेस्टिब्युलर रिहैबिलिटेशन के वैज्ञानिक योगदान को इस अध्ययन का मुख्य हिस्सा बनाया गया ताकि मरीजों को स्थायी रूप से इस समस्या से उबारा जा सके और पत्नी की बीमारी जैसे मामलों में प्रभावी इलाज मिल सके।
अपने निजी जीवन के इन कड़े और चुनौतीपूर्ण अनुभवों को एक सार्थक वैज्ञानिक दस्तावेज में बदलते हुए उन्होंने अपनी पीएचडी की डिग्री पूरी कर ली। उनके इस प्रयास से चिकित्सा जगत को एक नई राह मिली है और तमाम मरीजों का डॉक्टरों पर भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है। वर्टिको जैसी जटिल समस्या के समाधान में डॉक्टर का शोध एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह पूरी यात्रा साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो हर मुश्किल चुनौती को एक बेहतरीन अवसर में बदला जा सकता है और पत्नी की बीमारी से उपजी पीड़ा को एक बड़े वैज्ञानिक समाधान में परिवर्तित किया जा सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा वर्टिको और पीसी-बीपीपीवी पर किए गए इस शोध से जुड़े सभी चिकित्सीय तथ्य और आंकड़े उनके अध्ययन के अनुसार हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Author:अजय त्यागी
October 1, 2026: 10:36 AM
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