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Rex TV India
Latest News राष्ट्रीय Digital Newsletter 05 Oct 2026 · 10:32 AM

किसानों के लिए AI का नया मॉडल, यूपी की महिलाओं का दिया उदाहरण

विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा - फाइल फोटो

वॉशिंगटन, अमेरिका। किसानों के लिए AI को विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने भारत और दूसरे विकासशील देशों के लिए बड़ा अवसर बताया है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसानों और दूसरे कामगारों की जिंदगी बदल सकती है, जबकि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में नौकरियों पर पड़ने वाले तत्काल दबाव जैसा असर विकासशील देशों में अभी उतना स्पष्ट नहीं है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में CNN के फरीद जकारिया के साथ बातचीत में बंगा ने उत्तर प्रदेश की एक पहल का उदाहरण दिया, जहां महिला किसान साधारण मोबाइल फोन की मदद से फसलों में बीमारी की पहचान कर रही हैं। उनके मुताबिक ऐसी तकनीक ज्ञान तक पहुंच को आसान बनाती है।  [1]

कृषि में AI मदद

अजय बंगा ने विकसित देशों में AI को लेकर चल रही बहस और विकासशील देशों की जरूरतों के बीच अंतर बताया। उनके अनुसार बड़े लैंग्वेज मॉडल और जेनरेटिव AI के लिए बहुत अधिक कंप्यूटिंग पावर, ऊर्जा, डेटा, कुशल लोगों और पूंजी की जरूरत होती है। कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं में ये सभी संसाधन एक साथ उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में किसानों के लिए AI का वह रूप अधिक उपयोगी हो सकता है, जिसे बंगा ने छोटे AI के तौर पर बताया। इसमें भविष्यवाणी करने वाले ऐसे टूल शामिल हैं, जो कृषि उत्पादकता के साथ शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए बंगा ने बताया कि Google के साथ मिलकर ऐसी एप्लीकेशन शुरू की गई हैं, जिनसे सहकारी संस्था से जुड़ी महिला किसान तकनीक का इस्तेमाल कर सकती हैं। किसान 3G फोन पर बोल सकती है और किसी बीमार पौधे की पत्ती के पीछे कैमरा करने पर तकनीक बीमारी की पहचान में मदद करती है। इसके साथ स्थानीय सहकारी संस्था से 25 रुपये में संबंधित कीटनाशक उपलब्ध होने की जानकारी भी मिल सकती है। बंगा के मुताबिक इससे तकनीकी विशेषज्ञता या महंगे उपकरण के बिना एक महिला किसान को उपयोगी जानकारी तक पहुंच मिलती है। उन्होंने इसे किसानों के लिए AI के व्यावहारिक इस्तेमाल का उदाहरण बताया।

AI का रोजगार असर

बंगा ने AI और रोजगार के प्रभाव को लेकर भी विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच अंतर बताया। उनके अनुसार विकसित देशों में लार्ज लैंग्वेज मॉडल से एक तिहाई तक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जबकि मध्यम आय वाले देशों में यह हिस्सा एकल अंक में हो सकता है। कम आय वाले देशों के संदर्भ में उन्होंने इसका प्रभाव शून्य तक रहने की बात कही। उनका तर्क है कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के पास उत्पादकता और रोजगार बढ़ाने की अभी काफी गुंजाइश है। इसलिए वहां AI को नौकरी खत्म करने वाली तकनीक के बजाय उत्पादकता और सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने वाले साधन के रूप में इस्तेमाल करने की अधिक तत्काल संभावना दिखाई देती है।

बंगा ने कहा कि बड़े AI मॉडल को चलाने के लिए जरूरी संसाधनों की कमी के कारण उभरते बाजारों में छोटे AI का अवसर अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। उनके अनुसार ऐसे प्रेडिक्टिव टूल किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के अलावा शिक्षा, स्किलिंग और स्वास्थ्य सेवाओं में क्षमता सुधार सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हेल्थकेयर और दूसरे क्षेत्रों में समान अवसर मौजूद हैं। इस नजरिए में किसानों के लिए AI का महत्व केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण आबादी को बेहतर जानकारी और सेवाओं से जोड़ने से भी है। हालांकि इन तकनीकों की उपयोगिता उनके वास्तविक इस्तेमाल, उपलब्धता और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास पर निर्भर करेगी।

भारत के लिए अवसर

बंगा की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब AI के रोजगार पर असर को लेकर दुनिया भर में बहस तेज है। चर्चा में उनके साथ मौजूद ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस ने विकसित देशों में मध्यम वर्ग पर AI और रोबोटिक्स के दोहरे दबाव की चिंता जताई। उन्होंने कहा कि AI सफेदपोश नौकरियों को प्रभावित कर सकता है और रोबोटिक्स विनिर्माण क्षेत्र की बची नौकरियों पर असर डाल सकता है। इसके मुकाबले बंगा ने विकासशील देशों के लिए किसानों और दूसरे कामगारों की उत्पादकता बढ़ाने में AI की संभावनाओं पर जोर दिया। इससे AI के प्रभाव को केवल रोजगार विस्थापन के नजरिए से देखने के बजाय विकास और अवसर के नजरिए से देखने की बात सामने आती है।

भारत के संदर्भ में उत्तर प्रदेश की महिला किसानों का उदाहरण यह दिखाता है कि किसानों के लिए AI का इस्तेमाल हमेशा अत्यधिक जटिल तकनीकी ढांचे पर निर्भर नहीं होना चाहिए। मोबाइल फोन जैसे पहले से उपलब्ध साधनों के जरिए फसल संबंधी जानकारी तक पहुंच बनाना इसका व्यावहारिक मॉडल हो सकता है। बंगा का जोर इसी तरह के छोटे और उद्देश्य आधारित AI टूल पर है, जो स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम करें। किसानों के लिए AI की वास्तविक क्षमता इस बात से तय होगी कि ऐसी तकनीक कितनी आसानी से उपलब्ध होती है और किसान उसे अपने रोजमर्रा के फैसलों में कितना प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर पाते हैं।

अस्वीकरण, Disclaimer:

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी October 5, 2026: 10:32 AM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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