नई दिल्ली, दिल्ली। तेल की कीमत में सोमवार को गिरावट दर्ज हुई, क्योंकि मध्य पूर्व से कच्चे तेल का निर्यात बढ़ने और जी7 देशों के रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने की योजना ने आपूर्ति को लेकर तत्काल चिंता कम कर दी। ब्रेंट क्रूड 66 सेंट या 0.65 प्रतिशत गिरकर 101.59 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 95 सेंट या 1.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 90.12 डॉलर प्रति बैरल रहा। बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे पर हमलों और ईरान युद्ध को लेकर जोखिम अब भी बना हुआ है। [1]
तेल की कीमत पर दबाव की एक वजह मध्य पूर्वी निर्यात में सुधार है। शिपिंग आंकड़ों के अनुसार सितंबर के अंतिम सप्ताह में 7 में से 4 दिनों में मध्य पूर्व से कच्चे तेल का निर्यात युद्ध से पहले के स्तर से ऊपर रहा। साथ ही जी7 देशों ने 100 मिलियन बैरल डीजल और कच्चे तेल को आपात भंडार से जारी करने पर सहमति जताई है। इस फैसले ने तत्काल आपूर्ति संकट की चिंता को कम किया है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार सऊदी अरब से निर्यात मात्रा भी युद्ध से पहले के स्तर की ओर लौटती दिख रही है, हालांकि परिवहन लागत अधिक और मार्ग कम प्रभावी हैं।
तेल की कीमत में गिरावट के बावजूद खाड़ी क्षेत्र में जोखिम समाप्त नहीं हुआ है। हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने रियाद और खुरैस क्षेत्र में सऊदी अरामको के ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे। संगठन ने इसे पिछले 12 घंटों में यमन पर सऊदी नेतृत्व वाले 50 हवाई और मिसाइल हमलों के जवाब में बताया। सऊदी अरब की ओर से इस दावे की पुष्टि नहीं की गई। इसी बीच सऊदी समर्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार ने हूतियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों को वापस लेने के लिए सैन्य अभियान की घोषणा की है। इससे ऊर्जा ढांचे पर आगे हमले का जोखिम बना हुआ है।
तेल की कीमत के लिए एक अहम चुनौती यह है कि खाड़ी क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बढ़ रहे हैं और ऊर्जा ढांचे को नुकसान का जोखिम बना हुआ है। इसके बावजूद बाजार में तत्काल आपूर्ति को लेकर दबाव कुछ कम हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार जी7 के रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने का फैसला बाजार से कुछ आपूर्ति चिंता निकाल रहा है। सऊदी निर्यात के युद्ध से पहले के स्तर की ओर लौटने की संभावना भी कीमतों पर दबाव डाल रही है। हालांकि ये आपूर्ति ऊंची लागत और कम प्रभावी मार्गों से आगे बढ़ रही है। इसलिए बाजार में राहत के साथ जोखिम भी बना हुआ है।
तेल की कीमत अभी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है और बाजार विश्लेषकों के अनुसार इसकी वजह लगातार भू राजनीतिक तनाव तथा खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर बढ़ते हमले हैं। सऊदी अरामको ने एशिया के लिए नवंबर के कच्चे तेल के आधिकारिक बिक्री मूल्य में अप्रत्याशित कटौती भी की है, जो 6 साल के निचले स्तर तक पहुंच गया। उधर ओपेक प्लस ने 2027 के तेल उत्पादन कोटा तय करने वाली समीक्षा को टाल दिया है। मध्य पूर्व में युद्ध के कारण क्षमता विस्तार से जुड़ी परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे भविष्य के उत्पादन अनुमान को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है।
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Author:अजय त्यागी
October 5, 2026: 12:17 PM
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