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Rex TV India
Latest News प्रादेशिक Digital Newsletter 06 Oct 2026 · 12:55 PM

बिहार में डोमिसाइल नियम क्यों चर्चा में, शादीशुदा महिलाओं पर असर

प्रतीकात्मक फोटो

पटना, बिहार। बिहार का डोमिसाइल नियम अब शिक्षक भर्ती की मौजूदा प्रक्रिया में एक अहम मुद्दा है। सितंबर 2026 में बिहार लोक सेवा आयोग ने शिक्षक भर्ती परीक्षा 4 के लिए 32,388 पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की है और आवेदन 25 सितंबर से 26 अक्टूबर तक निर्धारित हैं। इसी प्रक्रिया में विवाहित महिलाओं के लिए निवास, जाति और नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। अगर कोई महिला बिहार से बाहर की निवासी है और शादी के बाद बिहार में रह रही है, तो केवल पति के पते के आधार पर उसे बिहार का मूल निवासी मानकर आरक्षण नहीं मिलेगा। यही डोमिसाइल नियम चर्चा में है।  [1]

नियम की समझ

डोमिसाइल नियम को समझने के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि आरक्षण का लाभ बिहार के मूल निवासियों से जुड़ा है। मौजूदा व्यवस्था में राज्य के बाहर के उम्मीदवारों को बिहार के आरक्षण का लाभ नहीं मिलता और वे निर्धारित खुले पदों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। विवाहित महिला अगर आरक्षण चाहती है तो उसके जाति, निवास और नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र माता पिता के स्थायी पते से जुड़े होने चाहिए। यानी शादी के बाद पति का पता बदल जाने से उसके लिए बिहार का मूल निवासी होने का दावा अपने आप स्थापित नहीं होगा। यह प्रावधान डोमिसाइल नियम को लागू करने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस बदलाव को वर्तमान शिक्षक भर्ती के संदर्भ में समझना जरूरी है। इससे पहले की तीन शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में बिहार की डोमिसाइल नीति लागू नहीं थी, इसलिए विवाहित महिला अभ्यर्थियों के लिए पति के पते से जुड़े दस्तावेज इस्तेमाल करने की स्थिति बनी रही। अब राज्य सरकार की डोमिसाइल नीति पहली बार इस भर्ती चक्र में प्रभावी रूप से लागू हो रही है। बीपीएससी के अनुसार, बिहार के बाहर के उम्मीदवारों के लिए राज्य आरक्षण का प्रावधान नहीं है। ऐसे उम्मीदवार खुले पदों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। डोमिसाइल नियम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दस्तावेजों की जांच सीधे आरक्षण पात्रता से जुड़ती है।

भर्ती पर असर

मौजूदा शिक्षक भर्ती में कुल 32,388 पद हैं। इनमें कक्षा 1 से 5 के लिए 3,847, कक्षा 6 से 8 के लिए 8,563, कक्षा 9 से 10 के लिए 3,877 और कक्षा 11 से 12 के लिए 16,101 पद बताए गए हैं। बिहार की नीति के तहत राज्य के स्थायी निवासियों को आरक्षण का लाभ मिलता है, जबकि बाहर के उम्मीदवार केवल खुले पदों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। ऐसे में डोमिसाइल नियम उन अभ्यर्थियों के लिए खास महत्व रखता है जो विवाह, निवास और आरक्षण के दस्तावेजों को लेकर अलग स्थिति में हैं। आवेदन करते समय प्रमाण पत्रों का सही प्रारूप और पता जांचना जरूरी है।

आज के संदर्भ में इस डोमिसाइल नियम का सबसे बड़ा असर उन शादीशुदा महिलाओं पर पड़ सकता है जो बिहार में विवाह के बाद रह रही हैं, लेकिन मूल रूप से किसी दूसरे राज्य की निवासी हैं। उनके लिए पति के बिहार वाले पते के आधार पर आरक्षण हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। दूसरी ओर, बिहार की मूल निवासी महिला के लिए पिता के स्थायी पते से जारी जरूरी प्रमाण पत्र उसकी आरक्षण पात्रता साबित करने में महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल शिक्षक भर्ती परीक्षा 4 की आवेदन प्रक्रिया चल रही है और उम्मीदवारों को अंतिम आवेदन से पहले बीपीएससी के मौजूदा निर्देशों के अनुसार अपने दस्तावेज जांचने चाहिए। डोमिसाइल नियम का वास्तविक महत्व इसी दस्तावेजी जांच में सामने आता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी October 6, 2026: 12:55 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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