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Rex TV India
Latest News मोटिवेशनल Digital Newsletter 21 Oct 2026 · 2:33 PM

धीरज हलदार का अनोखा मिशन, 1 रुपये में बच्चों को माइम सिखाते हैं

A practice session in the open

मचलंदपुर, पश्चिम बंगाल। आर्थिक तंगी के कारण धीरज हलदार की पढ़ाई कक्षा 8 के बाद छूट गई और उन्हें पिता की साइकिल मरम्मत की दुकान पर काम करना पड़ा। लेकिन अभिनय के प्रति उनका लगाव खत्म नहीं हुआ। इसी दुकान से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर वंचित बच्चों को मूक अभिनय सिखाने के मिशन में बदल गया। धीरज हलदार ने 1 रुपये गुरु दक्षिणा लेकर ऐसे बच्चों को मंच और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया, जो पढ़ाई छोड़ चुके थे या कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे थे।  [1]    [Video]     

संघर्ष से शुरुआत

धीरज हलदार मचलंदपुर के रहने वाले हैं, जो हाबरा से करीब 11 किलोमीटर दूर है। उनके पिता कुमुद हलदार दिहाड़ी मजदूरी करते थे और तीन बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो गया था। राजबल्लभपुर हाई स्कूल से कक्षा 8 पूरी करने के बाद धीरज को पढ़ाई छोड़नी पड़ी। उन्होंने रेलवे स्टेशन के पास साइकिल मरम्मत की दुकान पर काम शुरू किया। स्कूल से लौटते बच्चों को देखकर उन्हें अपनी अधूरी पढ़ाई और अभिनय के सपने याद आते थे। कुछ समय बाद उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की और ठाकुरनगर हाई स्कूल से माध्यमिक परीक्षा पास की।

माइम कला क्या है

माइम या मूक अभिनय ऐसी प्रदर्शन कला है, जिसमें बिना बोले चेहरे के भावों, शारीरिक मुद्राओं और इशारों से बात कही जाती है। धीरज हलदार ने इसी कला को उन बच्चों तक पहुंचाने का फैसला किया, जिनके पास महंगे प्रशिक्षण या मंच तक पहुंचने के साधन नहीं थे। शुरुआत में गांव के लोगों के लिए माइम एक अपरिचित कला थी। उन्होंने अपने घर के बरामदे में बच्चों को सिखाना शुरू किया और रेलवे लाइन के पास बस्तियों में रहने वाले बच्चों को जोड़ा। उनका उद्देश्य केवल अभिनय सिखाना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करना भी था।

इमोन माइम सेंटर

धीरज हलदार ने 1996 में इमोन माइम सेंटर की शुरुआत कुछ बच्चों के साथ की थी। यहां मासिक शुल्क के तौर पर केवल 1 रुपये लिया जाता है, जिसे गुरु दक्षिणा माना जाता है। लगभग 30 वर्षों में यह छोटा प्रशिक्षण केंद्र विकसित होकर ऐसी संस्था बन गया है, जहां अब 250 से अधिक विद्यार्थी माइम सीखते हैं। इनमें घरेलू काम करने वाले, स्थानीय ट्रेनों में मूंगफली बेचने वाले और पढ़ाई छोड़ चुके बच्चे भी शामिल हैं। इस केंद्र ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को कला सीखने और अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर दिया है।

स्कूलों तक पहुंच

धीरज हलदार का प्रशिक्षण अब उत्तर 24 परगना जिले के कई स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। कुछ स्कूलों में माइम को विद्यार्थियों के वार्षिक मूल्यांकन का हिस्सा भी बनाया गया है। उन्हें कोलकाता विश्वविद्यालय, सिटी कॉलेज और बैरकपुर के स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय में मूक अभिनय की कक्षाएं लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। उनके केंद्र के कलाकारों को असम और त्रिपुरा में प्रदर्शन तथा प्रशिक्षण के लिए भी बुलाया गया। दिल्ली से भी निमंत्रण मिलने की जानकारी सामने आई है। इससे इस कला और उनके प्रशिक्षण कार्य को राज्य से बाहर भी पहचान मिली है।

नई पीढ़ी की प्रेरणा

भारत सरकार ने धीरज हलदार को नाट्यगुरु की उपाधि दी है, जिसके बाद इमोन माइम सेंटर की पहचान और बढ़ी है। उनकी छात्रा रित्विका शील भविष्य में इसी कला को दूसरों को सिखाना चाहती हैं। चंपा मुंडा घरेलू काम करने के बाद प्रशिक्षण लेती हैं और असम में प्रस्तुति भी दे चुकी हैं। एक अभिभावक रेखा माली हलदर के अनुसार, माइम आधारित शिक्षा से उनके बच्चे का मोबाइल इस्तेमाल कम हुआ और पढ़ाई पर ध्यान बढ़ा। धीरज हलदार का लक्ष्य इस कला को राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाना है, ताकि वंचित बच्चों को सीखने और आगे बढ़ने के अवसर मिलें।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

 

 

Rex TV India Author:अजय त्यागी October 21, 2026: 2:33 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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