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Rex TV India
Latest News आलेख Digital Newsletter 21 Oct 2026 · 2:50 PM

नारायण सूक्तम् की प्रेरणा से स्वस्थ हृदय और संतुलित जीवन की राह

प्रतीकात्मक फोटो

नारायण सूक्तम्, तैत्तिरीय आरण्यक परंपरा से संबद्ध एक महत्त्वपूर्ण वैदिक सूक्त है, जो परमात्मा की उपस्थिति को हृदय से जोड़कर देखता है। इसका संदेश केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और संतुलित जीवन के लिए भी प्रेरणा प्रदान करता है। सूक्त में कहा गया है। पद्मकोशप्रतीकाशं हृदयं चाप्यधोमुखम्। अर्थात् हृदय को कमल की कली के समान बताया गया है। आध्यात्मिक दृष्टि से हृदय पुण्डरीक अंतःचेतना, आत्मबोध और परमात्मा के ध्यान का प्रतीक है।

यहाँ शारीरिक और आध्यात्मिक हृदय के बीच अंतर समझना आवश्यक है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार, हृदय रक्त पंप करने वाला महत्त्वपूर्ण अंग है, जबकि भारतीय दर्शन में हृदय अंतःकरण और चेतना का प्रतीक भी है। सूक्त में वर्णित अग्नि, नाड़ियाँ और सूक्ष्म प्रकाश को वैदिक ध्यान की भाषा में समझना चाहिए, न कि आधुनिक शरीर विज्ञान के शाब्दिक विवरण के रूप में। स्वस्थ हृदय की अवधारणा को इस आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जोड़ते समय शारीरिक अंग और दर्शन में वर्णित चेतना के प्रतीक के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है।

आध्यात्मिक चेतना 

हृदय में श्रद्धा हो, मन में सजगता हो, आहार में संतुलन हो, शरीर में सक्रियता हो और स्वास्थ्य के प्रति व्यवहार में उत्तरदायित्व हो। हृदय में नारायण के निवास का आध्यात्मिक विचार तभी दैनिक जीवन में सार्थक बनता है, जब वह हमें अपने शरीर की उपेक्षा करने के बजाय उसकी देखभाल करने, अपने मन को समझने और दूसरों के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित करे। स्वस्थ हृदय की दिशा में यह दृष्टिकोण व्यक्तिगत स्वास्थ्य के प्रति सजगता और जीवन के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को महत्त्व देता है।

स्वस्थ जीवनशैली

अंततः, स्वस्थ जीवन का लक्ष्य केवल रोग से बचना नहीं है। इसका अर्थ है अधिक सजगता से जीना, अपने शरीर की आवश्यकताओं को समझना, मन को संतुलित रखना और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना। आज उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग जैसी जीवनशैली संबंधी समस्याएँ सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्रमुख चुनौतियाँ हैं। असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता, अपर्याप्त नींद, तंबाकू का सेवन और लगातार तनाव इनके जोखिम को बढ़ा सकते हैं। नारायण सूक्तम् से प्रेरित आत्मचिंतन को आधुनिक निवारक स्वास्थ्य विज्ञान के साथ जोड़कर स्वस्थ जीवन की दिशा में व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं।

ध्यान और मानसिक संतुलन

प्रतिदिन 10 मिनट ध्यान, प्रार्थना या सहज श्वसन का अभ्यास तनाव प्रबंधन और आत्म जागरूकता में सहायक हो सकता है। नियमित अभ्यास व्यक्ति को अपने मन की स्थिति के प्रति सजग रहने और दैनिक जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित कर सकता है। आध्यात्मिक चिंतन के साथ अपने स्वास्थ्य के प्रति उत्तरदायित्व भी आवश्यक है। स्वस्थ हृदय के लिए मानसिक सजगता के साथ शरीर की आवश्यकताओं पर ध्यान देना, नियमित गतिविधियों को अपनाना और जीवनशैली में संतुलन बनाए रखना महत्त्वपूर्ण है। ये उपाय चिकित्सा के विकल्प नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली के सहायक अभ्यास हैं।

सक्रिय शरीर, स्वस्थ हृदय

नियमित पैदल चलना, योग तथा उपयुक्त व्यायाम अपनाएँ। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वयस्कों को पर्याप्त स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए प्रति सप्ताह 150 से 300 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक शारीरिक गतिविधि अथवा 75 से 150 मिनट की तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि, या दोनों के समकक्ष संयोजन का अभ्यास करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, सप्ताह में कम से कम 2 दिन प्रमुख मांसपेशी समूहों को मजबूत करने वाले व्यायाम भी करने चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ हृदय और सक्रिय शरीर की देखभाल के लिए महत्त्वपूर्ण है।

आहार, नींद और अनुशासन

फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज, दालें और मेवे शामिल करें। अतिरिक्त चीनी, अधिक नमक, तले हुए खाद्य पदार्थ और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन सीमित रखें। नियमित सोने जागने का समय बनाएँ और पर्याप्त नींद लें। तंबाकू से दूर रहें तथा शराब से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को समझें। स्वस्थ हृदय के लिए संतुलित आहार, शारीरिक सक्रियता और नियमित दिनचर्या को जीवन का हिस्सा बनाना उपयोगी है। इन आदतों के साथ अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना और आवश्यक चिकित्सा सलाह का पालन करना भी महत्त्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य जाँच और निष्कर्ष

रक्तचाप, रक्त शर्करा, कोलेस्ट्रॉल और वजन की निगरानी करें। पहले से किसी रोग से पीड़ित व्यक्ति निर्धारित उपचार जारी रखें। नारायण सूक्तम् का हृदय केंद्रित चिंतन हमें अपने भीतर झाँकने, विवेक विकसित करने और जीवन के प्रति उत्तरदायी बनने की प्रेरणा देता है। आधुनिक विज्ञान इस प्रेरणा को स्वस्थ आदतों, नियमित व्यायाम, संतुलित पोषण और समय पर चिकित्सा के माध्यम से व्यावहारिक रूप प्रदान करता है। हृदय में श्रद्धा, मन में सजगता, आहार में संतुलन और व्यवहार में अनुशासन, यही आध्यात्मिक प्रेरणा और आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान का सार्थक संगम है। स्वस्थ हृदय के लिए आध्यात्मिक अभ्यास सहायक हो सकते हैं, लेकिन वे चिकित्सा, आवश्यक जाँच या निर्धारित दवाओं का विकल्प नहीं हैं।

लेखक - प्रोफेसर डॉ. महेंद्र सिंह आशावत, 
निदेशक सह प्राचार्य, 
लोरेट इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, ज्वालाजी, 
कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।

अस्वीकरण (Disclaimer):

आलेख में प्रस्तुत विचार लेखक के अपने स्वतंत्र विचार हैं। किसी अन्य का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी October 21, 2026: 2:50 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
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