WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
← Back to article
Rex TV India
Latest News राजस्थान Digital Newsletter 03 Nov 2026 · 8:10 PM

बीकानेर में पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की पुण्यतिथि पर मांड गीतों के संरक्षण का आह्वान

पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की पुण्यतिथि

बीकानेर, राजस्थान। प्रसिद्ध मांड कोकिला पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की 34वीं पुण्यतिथि के अवसर पर शहर की जयनारायण व्यास कॉलोनी में राजस्थान की लोकगायिका पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई के मांड लोकगीतों विषयक एक विशेष चर्चा का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देश-विदेश के संगीत प्रेमियों ने वर्चुअल माध्यम से भी शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले बड़े कब्रिस्तान पहुंचकर पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की मजार पर कुरआनखानी का पाठ किया गया और उपस्थित गणमान्य लोगों द्वारा भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की गई।

लोकसंगीत और मानवीय संवेदनाएं

अल्लाह जिलाई बाई मांड गायिकी प्रशिक्षण संस्थान के प्रबंध निदेशक डॉ अजीज अहमद सुलेमानी ने अपने संबोधन में कहा कि जाईमां अल्लाह जिलाई बाई राजस्थान के लोकसंगीत के प्रति पूरी तरह समर्पित एक महान कलाकार थीं, जिनके हृदय में मानवीय संवेदनाओं का अथाह सागर था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कवि, कथाकार एवं संस्कृतिकर्मी राजेंद्र जोशी ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई और मांड गायिकी एक-दूसरे का पर्याय हैं, जिनके गीतों में आम जनमानस की लोक चेतना के सुर स्पष्ट रूप से सुनाई देते हैं।

नारी मन की सशक्त अभिव्यक्ति

मुख्य वक्ता शबनम अजीज ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि स्व पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई के गाए हुए गीतों में नारी मन की बेहद सशक्त और प्रभावशाली अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी कला साधना के बल पर अपने परिवार और आने वाली पीढ़ियों को हिम्मत, आत्मसम्मान तथा इंसानियत की एक महान विरासत सौंपी है। इस दौरान गीतकार एवं कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने अपनी सुंदर राजस्थानी काव्य रचना के माध्यम से पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई के योगदान को याद करते हुए सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मांड गायिकी की ऐतिहासिक यात्रा

कार्यक्रम के संयोजक एवं वरिष्ठ लेखक अशफाक कादरी ने बताया कि पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई ने अपने संपूर्ण जीवनकाल में राजदरबारों, महफिलों, आकाशवाणी, दूरदर्शन और राष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला का जादू बिखेरा। उन्होंने कहा कि उनकी स्मृति में जूनागढ़ से प्रारंभ हुई मांड संगीत की यह पावन यात्रा बीते 33 वर्षों में जन-जन तक पहुंच चुकी है। फिल्मकार मंजूर अली चंदवानी और डॉ हनुमान सिंह कस्वां ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की स्मृतियों और उनकी अमूल्य विरासत को संजोए रखना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

विशेष प्रसारण और गणमान्य उपस्थिति

इस अवसर पर आकाशवाणी के विशेष कार्यक्रम रेडियो का सफरनामा के माध्यम से भी पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई के लोकप्रिय लोकगीतों और उनकी स्मृतियों को साझा किया गया। कार्यक्रम में डॉ एस एन हर्ष, डॉ बाघ सिंह, डॉ एम एम बागड़ी, डॉ धनपत कोचर, रजिया बेगम, अयाज अजीज और अब्दुल वाहिद सहित परिवार के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों के जरिए इस पूरे आयोजन का सीधा प्रसारण किया गया, जिससे वैश्विक स्तर पर संगीत प्रेमियों ने इस श्रद्धांजलि सभा का लाभ उठाया।

Disclaimer:

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की पुण्यतिथि, मांड गीतों के संरक्षण और बीकानेर में आयोजित इस सांस्कृतिक चर्चा से संबंधित इस खबर में दी गई सभी जानकारियां जनहित को ध्यान में रखकर प्रस्तुत की गई हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV India Author:अजय त्यागी November 3, 2026: 8:10 PM © 2026 Rex TV India Contact @ 91 6376887816 | rextvindia@gmail.com
— End of Article —