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राजस्थान

सांवरिया सेठ के अलौकिक कूर्म अवतार की झांकी से भक्त हुए भावविभोर

नौगांवा सांवरिया सेठ मंदिर में भगवान के अलौकिक कूर्म अवतार का श्रृंगार किया गया है, जिसके दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। सांवरिया सेठ के मंदिर में इन दिनों ठाकुर जी का बेहद भव्य और अलौकिक श्रृंगार भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। इस बार प्रभु को भगवान विष्णु के द्वितीय अवतार कूर्म यानी कछुआ अवतार के रूप में सजाया गया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद सोडाणी के अनुसार, झांकी में समुद्र मंथन के पौराणिक प्रसंग को बेहद सजीव और आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रहा है।

अलौकिक श्रृंगार दर्शन

प्रभु के मुख्य विग्रह को गहरे लाल और सुनहरे बॉर्डर से निर्मित एक विशाल कछुए की पीठ पर विराजमान किया गया है। मंदिर के गर्भगृह में नीले जल और सफेद लहरों वाले वस्त्रों के जरिए क्षीर सागर का अद्भुत दृश्य तैयार किया गया है, जबकि ठाकुर जी के शीश पर शेषनाग का दिव्य छत्र सुशोभित है। "प्रभु के सम्मुख कृत्रिम गुलाबी कमल के फव्वारे, पीतल का कलश और शंख रखे गए हैं।"

भक्तों के लिए यह दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि इसमें बारीकियों का विशेष ध्यान रखा गया है। पीले मिष्ठान का भव्य भोग अर्पित करने के बाद से ही मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है। लोग दूर-दराज के क्षेत्रों से इस अलौकिक रूप के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। सांवरिया सेठ की यह विशेष झांकी सनातन संस्कृति और समुद्र मंथन के पौराणिक महत्व को भी खूबसूरती से प्रदर्शित करती है।

गौमाता का महामहोत्सव

इसी क्रम में, रविवार 24 मई को ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी पर गौमाता को छप्पन भोग लगाकर महाआरती की जाएगी। मंदिर सचिव कैलाश डाड के अनुसार, इस महोत्सव की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि 10 पूजनीय गौमाताओं को पूर्ण वस्त्र, आकर्षक झालरों और सुंदर आभूषणों से सजाया जाएगा। "गौमाताओं के सम्मुख छप्पन प्रकार के सात्विक व्यंजनों का भव्य भोग अर्पित किया जाएगा," जो इस उत्सव का मुख्य आकर्षण होगा।

उत्सव की शुरुआत प्रातःकालीन विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ होगी, जो सायंकाल तक अनवरत रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जारी रहेगी। मुख्य आयोजन सायं 4.30 बजे से शुरू होगा, जहां गौमाता के सानिध्य में महाआरती का आगाज़ होगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह गौ-सेवा के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने का भी एक पुनीत प्रयास है, जिसे बड़ी संख्या में भक्त सफल बनाएंगे।

प्रसाद और तुलादान

आयोजकों ने जानकारी दी है कि मंदिर में पधारने वाले सभी भक्तों के लिए महाप्रसाद के रूप में 'गुड़ लापसी' का वितरण किया जाएगा। सायंकाल को गौमाता की भव्य महाआरती के समय सैकड़ों श्रद्धालु एक साथ दीप प्रज्वलित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। इसके अलावा, मंदिर परिसर में गौमाता के लिए तुलादान की विशेष व्यवस्था की गई है, जहां भक्त अपनी श्रद्धा अनुसार पुण्य लाभ अर्जित कर सकेंगे।

यह पूरा कार्यक्रम क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का संचार कर रहा है। सांवरिया सेठ के आशीर्वाद से आयोजित होने वाला यह गौ-सेवा महोत्सव लोगों को धर्म और संस्कृति से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम है। मंदिर ट्रस्ट का प्रयास है कि अधिक से अधिक श्रद्धालु इस अनूठे आयोजन में शामिल होकर गौमाता का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें और पुण्य के भागी बनें। यह आयोजन निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक छाप छोड़ने वाला है।

भक्ति का संगम

मंदिर की भव्यता और सांवरिया सेठ के प्रति अटूट आस्था का ही परिणाम है कि हर आयोजन में भीड़ उमड़ पड़ती है। कूर्म अवतार की झांकी से लेकर गौमाता के छप्पन भोग तक, हर गतिविधि का उद्देश्य भक्तों के मन में धर्म के प्रति गहरी निष्ठा जगाना है। इस तरह के भव्य आयोजन न केवल मंदिर की परंपराओं को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में एकता और भक्ति की भावना को भी निरंतर प्रोत्साहित करते रहते हैं।

अंततः, इस आयोजन का समापन दीपदान के साथ होगा, जो सायं के समय अद्भुत आभा बिखेरेगा। भक्तों के चेहरों पर दिख रही प्रसन्नता इस बात की साक्षी है कि वे इस उत्सव को लेकर कितने उत्साहित हैं। सांवरिया सेठ के पावन धाम में आयोजित होने वाले ये धार्मिक कार्यक्रम प्रत्येक श्रद्धालु के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेंगे, ऐसी सभी भक्तों की दृढ़ मान्यता है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी मंदिर ट्रस्ट द्वारा उपलब्ध कराए गए तथ्यों और धार्मिक आयोजनों पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। धार्मिक अनुष्ठानों की समय-सारणी और मंदिर की दर्शन व्यवस्था के लिए आधिकारिक सूचनाओं की पुष्टि करना उचित होगा। इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या परिणामों के लिए लेखक एवं प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief