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राजस्थान

घटिया सामग्री से बना स्टेट हाईवे 37बी उच्च स्तरीय जांच की मांग 

स्टेट हाईवे 37बी निर्माण में भारी अनियमितताएं और घटिया सामग्री का उपयोग सामने आया है। मामले की जांच व दोषियों पर कार्रवाई की उठी मांग।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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नीमकाथाना (शिंभु सिंह शेखावत)। स्टेट हाईवे 37बी का निर्माण कार्य अब भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता का एक जीवंत उदाहरण बन चुका है। करोड़ों रुपये की लागत से बनाई जा रही यह सड़क अपने उद्घाटन से पहले ही दम तोड़ती नजर आ रही है। सामाजिक कार्यकर्ता हरीश देवन्दा ने इस परियोजना में व्याप्त गंभीर खामियों को उजागर करते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता को एक कड़ा पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच की पुरजोर मांग की है।

अनियमितताओं का पुलिंदा

इस परियोजना के लिए 5818.77 लाख रुपये की भारी धनराशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन परिणाम शून्य के बराबर है। 14.633 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर जगह-जगह दरारें और गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। "सड़क किनारों से उखड़ रही है, डामर परत टूट चुकी है तथा जगह-जगह गिट्टी बाहर निकल आई है," जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बिल्कुल नहीं है।

निर्माण कार्य में दिखाई दे रही असमानता और खराब जॉइंटिंग ने स्थानीय लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों ने मिलकर जनता के पैसों का खुलेआम दुरुपयोग किया है। सड़क की ऊपरी सतह को देखकर कोई भी समझ सकता है कि इसमें कितनी घटिया तकनीक और सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जो किसी भी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसा है।

सुरक्षा से खिलवाड़

यह सड़क वर्तमान में वाहन चालकों के लिए किसी मौत के जाल से कम नहीं है। "सड़क आमजन एवं वाहन चालकों के लिए खतरा बनी हुई है तथा दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है," क्योंकि उखड़ी हुई गिट्टी और गहरे गड्ढे वाहन अनियंत्रित करने के लिए काफी हैं। प्रशासन ने इस पूरे निर्माण कार्य की निगरानी में जो लापरवाही बरती है, वह किसी भी सूरत में अक्षम्य है और इसकी गहरी जांच आवश्यक है।

आम जनता का आरोप है कि यदि समय रहते अधिकारियों ने कार्य का निरीक्षण किया होता, तो यह नौबत नहीं आती। अब सड़क की यह दयनीय स्थिति विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाती है। अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता अब अपने हक के लिए सड़क पर उतरने को तैयार है। विकास कार्यों में यह लापरवाही सीधे तौर पर मानवीय जीवन के साथ खिलवाड़ है।

कड़े कदम जरूरी

शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि मामले की तुरंत निष्पक्ष तकनीकी जांच और लेबोरेटरी टेस्टिंग करवाई जाए। दोषी ठेकेदार को न केवल ब्लैकलिस्ट किया जाए, बल्कि उस पर भारी आर्थिक दंड भी लगाया जाए। "सड़क का उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री से पुनर्निर्माण करवाने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी उठाई गई है," ताकि भविष्य में कोई भी एजेंसी ऐसे घटिया निर्माण का साहस न कर सके।

क्षेत्र के लोग इस स्टेट हाईवे 37बी की बदहाली को लेकर बेहद आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि यह विकास नहीं, बल्कि सरकारी खजाने की लूट है। प्रशासन को अब अपनी कार्यशैली में सुधार लाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता बनी रहे। यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो जनता के मन में सरकारी परियोजनाओं के प्रति अविश्वास की भावना और भी अधिक गहरा जाएगी।

जवाबदेही की मांग

सरकारी बजट से जनता की सुख-सुविधाओं के लिए जो निर्माण किए जाते हैं, वे लंबे समय तक टिकने चाहिए। लेकिन स्टेट हाईवे 37बी के मामले में सब कुछ उल्टा दिखाई दे रहा है। अगर प्रशासनिक स्तर पर यह लापरवाही जारी रही, तो आने वाले समय में अन्य सड़कों का भी यही हश्र होगा। अधिकारियों को अपनी जवाबदेही समझनी होगी और दोषियों को कानून के शिकंजे में लाना ही होगा, अन्यथा यह भ्रष्टाचार की कड़ी कभी नहीं टूटेगी।

अंत में, यह मामला केवल एक स्टेट हाईवे 37बी की मरम्मत का नहीं, बल्कि संपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता का है। निर्माण एजेंसियों को यह समझना होगा कि वे जनता के प्रति जवाबदेह हैं। गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नागरिकों की सुरक्षा पर एक हमला है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाना ही एकमात्र रास्ता है, जिससे जनता का भरोसा फिर से बहाल हो सके।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए तथ्यों और प्राप्त शिकायतों पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। प्रशासनिक विभागीय जांच और सरकारी आंकड़ों की पुष्टि के लिए आधिकारिक दस्तावेजों का संदर्भ लेना उचित होगा। इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या परिणामों के लिए लेखक एवं प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief