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राजस्थान

श्री विठ्ठल नामदेव छीपा समाज मंदिर की संपत्ति और संस्था का विवाद

श्री विठ्ठल नामदेव छीपा समाज ने मंदिर संपत्ति में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रेस वार्ता में जानकारी देते वक्ता

प्रेस वार्ता में जानकारी देते वक्ता

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राजसमन्द (शिंभु सिंह शेखावत)। श्री विठ्ठल नामदेव छीपा समाज ने कांकरोली में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर अपनी मंदिर संपत्ति और संस्था से जुड़े गंभीर विवादों को उजागर किया है। समाज के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि कुछ बाहरी संस्थाओं द्वारा फर्जी तरीके से कार्य करते हुए करोड़ों रुपये की संपत्ति का गबन किया जा रहा है। इस प्रेस वार्ता के माध्यम से उन्होंने प्रशासन पर बाहरी दबाव में आकर भेदभावपूर्ण कार्रवाई करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

विवाद की पृष्ठभूमि

विवाद तब गहराया जब 19 मई को प्रस्तावित एक धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रम को प्रशासन ने अनुमति के अभाव में निरस्त कर दिया। इस कार्यक्रम में स्थानीय विधायक और प्रशासनिक अधिकारी अतिथि के रूप में शामिल होने वाले थे। "कार्यक्रम रद्द होने के बाद स्थानीय समाज में भारी रोष व्याप्त हो गया," जिसके चलते समाजजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।

समाजजनों का कहना है कि वर्ष 1955 में स्थानीय सदस्यों ने स्वयं के चंदे से जमीन खरीदी और मंदिर का निर्माण कराया था। लेकिन वर्ष 1984 से 2026 तक फर्जी संस्थाओं के माध्यम से बाहरी लोगों ने मंदिर की संपत्ति और रकम का दुरुपयोग किया है। उनकी मांग है कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच हो और तब तक मंदिर में सभी प्रकार के सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।

निष्पक्ष जांच की मांग

समाज ने मांग की है कि मंदिर जमीन विवाद के निस्तारण तक वहां एक रिसीवर नियुक्त किया जाए ताकि संपत्ति सुरक्षित रहे। "स्थानीय समाज ने आम मेवाड़ चौकला कमेटी को पाबंद करने और बाहरी लोगों के हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की है।" समाज के मदन लाल बाकलीवाल, छीतर मल जोशी, रमेश जड़िया और दुर्गेश अमरवाल सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने प्रेस वार्ता में यह स्पष्ट किया कि वे अपनी धरोहर की रक्षा के लिए अंत तक संघर्ष करेंगे।

आरोप है कि कुछ लोग समाज की आवाज दबाने और अवैध आधिपत्य स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। समाजजनों का मानना है कि प्रशासन यदि निष्पक्ष जांच करे तो सच्चाई सामने आ जाएगी। वे चाहते हैं कि वर्ष 1984 के बाद से मंदिर में आई आय और संपत्ति के ब्योरे की ऑडिट कराई जाए, ताकि गबन करने वालों के नाम उजागर हों और उन पर कानूनी रूप से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

भविष्य का संघर्ष

यह केवल एक जमीन का विवाद नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की रक्षा का मुद्दा है। श्री विठ्ठल नामदेव छीपा समाज अब अपनी संपत्ति को बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि वे किसी के दबाव में न आएं और केवल कानूनी प्रक्रिया का पालन करें। समाज के लोगों का यह स्पष्ट मानना है कि जब तक विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकल जाता, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे।

इस मुद्दे ने पूरे क्षेत्र में चर्चा छेड़ दी है। आने वाले समय में श्री विठ्ठल नामदेव छीपा समाज इस मामले को लेकर और भी बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन कर सकता है। प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि कलेक्टर स्तर पर संज्ञान लेने के बाद उचित कार्रवाई होगी। संपत्ति की सुरक्षा के लिए विठ्ठल नामदेव छीपा समाज ने कमर कस ली है और वे न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने को भी तैयार हैं।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत जानकारी संबंधित समाज के पदाधिकारियों द्वारा प्रेस वार्ता में साझा किए गए तथ्यों और ज्ञापनों पर आधारित है। यह केवल जनहित में सूचना साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। विवादों की कानूनी स्थिति और सरकारी जांच के परिणामों के लिए संबंधित जिला प्रशासन के आधिकारिक दस्तावेजों की पुष्टि करना उचित होगा। इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या परिणामों के लिए लेखक एवं प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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