सोने की कीमतों में तेजी: वैश्विक तनाव कम होने से मिला सहारा
ईरान युद्ध में शांति की उम्मीदों के कारण सोने की कीमतों में तेजी देखी गई है। डॉलर और तेल के दाम गिरने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में तेजी का रुख सोमवार को साफ तौर पर दिखाई दिया। ईरान युद्ध के जल्द खत्म होने और शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों ने निवेशकों का मनोबल बढ़ाया है, जिसके कारण सोने के भावों में 1 प्रतिशत से अधिक की उछाल दर्ज की गई है। इस बदलाव ने न केवल डॉलर को कमजोर किया, बल्कि तेल की बढ़ती कीमतों को भी नीचे लाने में मदद की है।
वर्तमान में स्पॉट गोल्ड 1.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,561.51 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है, जबकि जून डिलीवरी के अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी 0.9 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है। यद्यपि मेमोरियल डे के कारण अमेरिकी बाजार बंद थे, फिर भी निवेशकों में काफी उत्साह है। यह सकारात्मक रुख वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर माना जा रहा है।[1]
बाजार का रुख
ईरान और अमेरिका भले ही किसी तात्कालिक समझौते की संभावनाओं को कमतर बता रहे हों, लेकिन बाजार की धारणाएं अलग हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर बातचीत का संकेत देने के बाद से ही निवेशकों ने उम्मीदें बढ़ा दी हैं। हालांकि, अभी भी कई जटिल मुद्दे हैं जिन्हें हल करना जरूरी है।
"वित्तीय संपत्ति वर्तमान में तेल की कीमतों से गहराई से प्रभावित है, और सोने की कीमतें भी इसका अपवाद नहीं हैं," यूबीएस के विश्लेषक जियोवानी स्टोनोवो ने कहा। उनका मानना है कि तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा असर फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर पड़ेगा, जिससे सोने की मांग बढ़ना स्वाभाविक है और यह ट्रेंड निकट भविष्य में जारी रहने की संभावना है।
मुद्रास्फीति और फेड
ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से सोने की कीमतों में अब तक लगभग 14 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी थी। इसका मुख्य कारण ऊर्जा की उच्च कीमतें थीं, जिन्होंने मुद्रास्फीति की चिंताएं बढ़ा दी थीं और अमेरिकी ब्याज दरों के बढ़ने की आशंका पैदा कर दी थी। पहले जहाँ अर्थशास्त्री इस वर्ष दो बार ब्याज दरों में कटौती की भविष्यवाणी कर रहे थे, वहीं अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है।
वर्तमान में ट्रेडर दिसंबर में फेड द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि की 40 प्रतिशत संभावना देख रहे हैं। केविन वॉर्श ने हाल ही में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला है। वे ऐसे समय में आए हैं जब मध्य-पूर्व संघर्ष के कारण पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे उपभोक्ता धारणा को भी गहरा नुकसान पहुंचा है।
अन्य धातुओं का प्रदर्शन
सोने की कीमतों में तेजी के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं ने भी बाजार में शानदार प्रदर्शन किया है। स्पॉट सिल्वर में 2.5 प्रतिशत की चढ़त देखी गई और इसका भाव 77.41 डॉलर प्रति औंस हो गया है। इसी तरह, प्लेटिनम भी 1.9 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,959.30 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है, जबकि पैलेडियम में 2.8 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है।
यह सोने की कीमतों में तेजी दर्शाती है कि बाजार अब अनिश्चितताओं से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। कम होते हुए तेल के दाम न केवल उद्योगों के लिए फायदेमंद हैं, बल्कि यह आम उपभोक्ताओं के लिए भी राहत लेकर आएंगे। विश्लेषकों का मानना है कि यदि शांति प्रक्रिया जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में बाजार में अधिक स्थिरता देखने को मिलेगी और धातुएं और मजबूत होंगी।
निवेशकों की रणनीति
निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है क्योंकि फेड की नीतियों में बदलाव की आहट ने बाजार की दिशा बदल दी है। सोने की कीमतों में तेजी यह संकेत देती है कि लोग सुरक्षित निवेश की ओर वापस लौट रहे हैं। हालांकि, युद्ध की जटिलताओं को नजरअंदाज करना जल्दबाजी होगी। जब तक पूर्ण शांति स्थापित नहीं हो जाती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की पूरी संभावना है।
अंत में, यह समझना आवश्यक है कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां सोने की चमक को सीधे प्रभावित करती हैं। तेल की कीमतें और केंद्रीय बैंक की नीतियां ही आने वाले समय में सोने का भविष्य तय करेंगी। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की खबरों पर पैनी नजर रखें और किसी भी बड़े निर्णय से पहले व्यापक आर्थिक संकेतकों का बारीकी से विश्लेषण करना न भूलें।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
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