ईद-उल-अजहा और रूहानी सुकून का दरगाह में दिखा अनोखा संगम
ईद-उल-अजहा और रूहानी सुकून का अद्भुत नजारा दरगाह में देखने को मिला। जन्नती दरवाजे से हाजिरी लगा श्रद्धालुओं ने अमन की दुआएं मांगी।
जन्नती दरवाजा आज खोला गया
ईद-उल-अजहा और रूहानी सुकून की तलाश में आज हजारों श्रद्धालु ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पहुंचे। फज्र की नमाज के बाद जब ऐतिहासिक 'जन्नती दरवाजा' जायरीन के लिए खोला गया, तो पूरा परिसर आस्था के सैलाब से भर उठा। सूफी संस्कृति के इस सबसे बड़े केंद्र पर आज का दिन इबादत, त्याग और भाईचारे के अनूठे संदेश के साथ शुरू हुआ। हर तरफ अकीदत के फूल बिछे थे और हवाओं में अमन की महक थी।
दरगाह परिसर में उमड़ी भीड़ में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी एक ही धुन में नजर आए। हजारों लोगों ने जन्नती दरवाजे से गुजरकर ख्वाजा साहब की बारगाह में अपनी हाजिरी दर्ज कराई। इस दौरान सऊदी अरब से आए विशेष 'गिलाफे काबा' का दीदार करना हर जायरीन के लिए एक गौरवपूर्ण अनुभव रहा। ऐसा रूहानी माहौल, जहां लोग दुनियादारी को भूलकर सिर्फ रचयिता की इबादत में लीन थे, अजमेर की पहचान को और अधिक समृद्ध बनाता है।[1]
प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था
त्योहार की भीड़ को देखते हुए दरगाह कमेटी, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम सुनिश्चित किए हैं। केसरगंज ईदगाह से लेकर दरगाह क्षेत्र तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि ईद-उल-अजहा और रूहानी सुकून के इस पाक अवसर पर किसी भी श्रद्धालु को जियारत में कोई परेशानी न हो। दरगाह का यह ऐतिहासिक जन्नती दरवाजा साल में केवल ईद, ईद-उल-अजहा, ख्वाजा साहब के सालाना उर्स और उनके पीरे मुर्शिद के उर्स के मौके पर ही खोला जाता है।
आला अधिकारी खुद सुबह से ही व्यवस्थाओं पर कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शांतिपूर्ण माहौल में सभी श्रद्धालु इबादत कर सकें। पुलिस की चाक-चौबंद व्यवस्था से दरगाह क्षेत्र में सुरक्षा का वातावरण बना हुआ है।
नेताओं के ट्विटर संदेश
आज के इस मुबारक मौके पर देश के वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों को ईद की बधाई दी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, "ईद-उल-अजहा के अवसर पर, मैं सभी देशवासियों, विशेषकर मुस्लिम भाइयों और बहनों को हार्दिक बधाई देती हूं। यह त्योहार आत्म-समर्पण, त्याग और भक्ति का प्रतीक है और हमें मानवता, विशेषकर वंचित वर्गों की सेवा करने के लिए प्रेरित करता है।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा, "ईद-उल-अजहा की बधाई! यह अवसर हमारे समाज में भाईचारे और खुशी की भावना को गहरा करे। मैं सभी की सफलता और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करता हूं।" लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया, "आपको और आपके परिवार को ईद-उल-अजहा की हार्दिक शुभकामनाएं। आशा है कि आपका घर आज खुशियों और गर्मजोशी से भरा रहे।" वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी बधाई देते हुए कहा, "सभी को ईद-उल-अजहा मुबारक! यह खुशियों भरा अवसर हर घर में शांति, प्यार और समृद्धि लाए।"
इबादत और नेक इरादे
ईद-उल-अजहा, जिसे बलिदान के त्योहार के रूप में जाना जाता है, हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति अटूट आस्था और समर्पण की याद दिलाता है। भारत समेत दुनिया भर में यह पर्व तीन दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें कुर्बानी के बाद मांस का वितरण जरूरतमंदों और प्रियजनों के बीच किया जाता है। अजमेर में आज का दिन इसी भावना के साथ संपन्न हुआ, जहां लोग नमाज के बाद देश की तरक्की और अमन की दुआएं मांग रहे थे।
ईद-उल-अजहा और रूहानी सुकून का यह मिलन स्पष्ट करता है कि आस्था की शक्ति कितनी महान होती है। आज की भीड़ और अकीदत का दृश्य यही बताता है कि जब लोग एकजुट होकर सकारात्मक दिशा में चलते हैं, तो समाज में नफरत के लिए कोई जगह नहीं बचती। पुलिस की निगरानी और जन-सहयोग ने साबित कर दिया है कि किसी भी बड़े त्यौहार को शांतिपूर्ण ढंग से मनाना जनभागीदारी से ही संभव है।