पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता और आपूर्ति पर सरकार का बड़ा दावा
पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता और आपूर्ति पर सरकार ने दी सफाई। कहा, देश में ईंधन का भरपूर स्टॉक है और कमी की खबरें केवल अफवाह हैं।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर देश भर में जारी चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार ने बुधवार को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि घरेलू मांग को पूरा करने के लिए ईंधन की कोई कमी नहीं है। स्थानीय स्तर पर आ रही कमी की खबरों को सरकार ने गलत बताते हुए इसे कुछ बल्क ग्राहकों द्वारा की जा रही जमाखोरी और डायवर्जन का नतीजा बताया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने जानकारी दी कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी हुई है, जिसका असर कीमतों पर पड़ रहा है। सरकार ने यह भी कहा कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दे रही हैं। ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों का बोझ आम जनता पर नहीं डाल रही हैं और प्रतिदिन लगभग 550 करोड़ रुपये का नुकसान खुद झेल रही हैं।[1]
आर्बिट्राज और जमाखोरी
सरकार के अनुसार, देश में कुल रिफाइनिंग क्षमता घरेलू खपत से काफी अधिक है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में भारत ने 243.2 मिलियन टन घरेलू खपत के मुकाबले पर्याप्त ईंधन का उत्पादन किया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कुछ औद्योगिक खरीदार अपने बल्क चैनल के बजाय खुदरा पेट्रोल पंपों से खरीदारी कर रहे हैं, ताकि वे खुदरा कीमतों पर मिल रही सब्सिडी का लाभ उठा सकें। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर कृत्रिम दबाव बन रहा है।
मंत्रालय ने कहा, "देश में किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कोई कमी नहीं है। कुछ इलाकों में 'आर्बिट्राज' का एक पैटर्न है, जो कमी का आभास पैदा कर रहा है।" सरकारी कंपनियों ने पाया है कि निजी खुदरा विक्रेताओं की डीजल बिक्री में करीब 38 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि बल्क औद्योगिक उठाव भी 29 प्रतिशत तक गिर गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि ईंधन को अनुचित तरीके से डाइवर्ट किया जा रहा है।
सख्त कार्रवाई के निर्देश
पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता और आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे कालाबाजारी, जमाखोरी और ईंधन के अनधिकृत भंडारण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। राज्यों को विशेष प्रवर्तन दल (Special Enforcement Squads) गठित करने के लिए कहा गया है ताकि आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जा सके जो आम जनता के लिए बने ईंधन को डाइवर्ट कर रहे हैं।
सरकार ने उद्योग जगत के संगठनों को भी निर्देश दिया है कि वे अपने सदस्यों को इस प्रकार की अनैतिक प्रथाओं से दूर रहने के लिए जागरूक करें। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी लगातार सरकारी ओएमसी और राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर रहे हैं ताकि आपूर्ति में कोई बाधा न आए। केंद्रीय मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित
भारत की रिफाइनिंग क्षमता और केंद्र-राज्य के बीच सक्रिय समन्वय हमारी ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए सरकार स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है। सरकारी ओएमसी का अनुशासन और सक्रिय संचालन यह सुनिश्चित कर रहा है कि उपभोक्ताओं को ईंधन की आपूर्ति निर्बाध रूप से मिलती रहे। इन प्रयासों का उद्देश्य यह है कि आम उपभोक्ताओं, किसानों और यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
अंततः, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता और आपूर्ति के मोर्चे पर देश पूरी तरह सुरक्षित है। यह सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है कि जो ईंधन आम जनता के लिए है, वह उन तक ही पहुँचे। किसी भी प्रकार की जमाखोरी या डायवर्जन को रोकने के लिए प्रशासन अब पूरी सख्ती के साथ कदम उठा रहा है, जिससे भविष्य में ऐसी समस्याओं को पूरी तरह खत्म किया जा सके।