महायान बौद्ध प्रैक्टिस सेंटर: वैश्विक शैक्षणिक सहयोग की नई शुरुआत
महायान बौद्ध प्रैक्टिस सेंटर की स्थापना भारत में बौद्ध अध्ययन के लिए बड़ी उपलब्धि है। जानिए कैसे यह केंद्र वैश्विक मूल्यों को बढ़ाएगा।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
(वाराणसी, उत्तर प्रदेश)। महायान बौद्ध प्रैक्टिस सेंटर की स्थापना के साथ ही भारत में बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। बीएचयू के पालि और बौद्ध अध्ययन विभाग में शुक्रवार को त्जूची महायान बौद्ध प्रैक्टिस सेंटर का उद्घाटन किया गया। यह पहला अवसर है जब किसी विदेशी बौद्ध संस्था ने भारत में अपना समर्पित सेंटर खोला है, जिसे अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।[1]
इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य बौद्ध दर्शन, करुणा, माइंडफुलनेस और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना है। स्थापना कार्यक्रम के दौरान त्जूची फाउंडेशन ने विभाग के 10 मेधावी विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप देने की घोषणा भी की। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की उपस्थिति में हुए इस आयोजन ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक परिवेश में अंतरराष्ट्रीय सहभागिता की नई उम्मीदें जगा दी हैं।
वैश्विक मूल्यों का प्रसार
यह केंद्र न केवल अध्ययन का स्थान होगा, बल्कि यह थेरवाद और महायान बौद्ध साहित्य के प्रकाशन, अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों और कार्यशालाओं के लिए एक हब के रूप में कार्य करेगा। यहाँ ध्यान कार्यक्रमों और व्याख्यानमालाओं के माध्यम से छात्रों को बौद्ध विरासत से गहराई से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। केंद्र का लक्ष्य अंतर-सांस्कृतिक शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
फाउंडेशन की उपाध्यक्ष पीयू लिन ने बौद्ध धर्म की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा:
"बौद्ध धर्म की करुणा, मैत्री और मानव सेवा की शिक्षा आज की दुनिया में व्याप्त दुख और अलगाव की पीड़ा का सबसे सटीक समाधान प्रदान कर सकती है।"
बौद्ध विरासत और शिक्षा
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह केंद्र बौद्ध विरासत को सहेजने और वैश्विक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सेतु का कार्य करेगा। कार्यक्रम में 100 से अधिक विदेशी छात्र, भिक्षु और शोधार्थियों ने भाग लिया, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय महत्ता स्पष्ट होती है। विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप की घोषणा ने शोध कार्यों को एक नई गति प्रदान की है।
बीएचयू में महायान बौद्ध प्रैक्टिस सेंटर का खुलना शोधार्थियों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगा। इस केंद्र के माध्यम से न केवल बौद्ध शिक्षा का प्रचार-प्रसार होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर छात्रों को एक साझा मंच भी मिलेगा। विभाग का यह प्रयास भविष्य में बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में भारत को पुनः वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध हो सकता है।
अकादमिक और सांस्कृतिक मिलन
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार यादव ने किया। इस दौरान कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सुषमा घिल्डियाल और अंतरराष्ट्रीय केंद्र के समन्वयक प्रो. राजेश सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने माना कि महायान बौद्ध प्रैक्टिस सेंटर के माध्यम से बौद्ध धर्म की शिक्षाएं आधुनिक समाज को एक नई दिशा दिखाएंगी और शांति का संदेश फैलाएंगी।
अंत में, यह केंद्र भारत और अन्य देशों के बीच शैक्षणिक संबंधों को प्रगाढ़ करेगा। आने वाले दिनों में यहाँ से होने वाले प्रकाशन और शोध कार्य बौद्ध धर्म के अध्ययन में नए मानक स्थापित करेंगे। महायान बौद्ध प्रैक्टिस सेंटर आने वाले समय में विश्वभर के बौद्ध विचारकों के लिए एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा, जो कि इस पूरी यात्रा का एक सुखद और प्रेरणादायक परिणाम होगा।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह रिपोर्ट विश्वविद्यालय के आधिकारिक कार्यक्रम और संस्थान द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है। इसे केवल सूचनात्मक उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसके आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।