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राजस्थान

त्रिविध पुरुषोत्तम सेवा का आयोजन: पुण्य प्राप्ति का महाभियान

त्रिविध पुरुषोत्तम सेवा का आयोजन अधिक मास के पावन अवसर पर किया गया है, जिसमें महिलाओं ने बढ़-चढ़कर सेवा कार्यों में अपनी भागीदारी निभाई है।

By अजय त्यागी
1 min read
त्रिविध पुरुषोत्तम सेवा का आयोजन

त्रिविध पुरुषोत्तम सेवा का आयोजन

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भीलवाड़ा, राजस्थान (पंकज पोरवाल)। त्रिविध पुरुषोत्तम सेवा का आयोजन एक ऐसी आध्यात्मिक और सामाजिक प्रक्रिया है, जो दिखाती है कि भक्ति का सही मार्ग मंदिरों की चौखट से शुरू होकर जरूरतमंदों की सेवा तक जाता है। बसंत विहार गांधी नगर माहेश्वरी महिला मंडल की महिलाओं ने अधिक मास के इस पावन अवसर को केवल व्रत-उपवास तक सीमित न रखकर उसे जनसेवा का माध्यम बनाया। रामधाम गौशाला में एकत्रित होकर महिलाओं ने अन्न, जल और वायु तत्व से जुड़ी सेवाओं का संकल्प लिया।

जब समाज में दिखावे की होड़ मची हो, तब मंडल अध्यक्ष शोभा राठी और सचिव सुनीता लढ़ा के नेतृत्व में महिलाओं का यह जत्था जमीन पर काम करता नजर आया। गौमाता को हरा चारा खिलाना हो या फिर भीषण गर्मी में प्यासे पंछियों के लिए दाने की व्यवस्था करना, यह सब एक सोची-समझी कार्ययोजना का हिस्सा था। हालांकि, यह आयोजन एक सराहनीय पहल है, लेकिन समाज सेवा को जीवन का स्थाई हिस्सा बनाना ही इसका असली उद्देश्य होना चाहिए।

अन्नदान और राहत कार्य

त्रिविध पुरुषोत्तम सेवा का आयोजन के तहत 100 से अधिक जरूरतमंदों को नाश्ता कराकर जो अन्नदान किया गया, वह इस बात की तस्दीक करता है कि भूख मिटाने से बड़ा कोई धर्म नहीं है। भीषण गर्मी में जब लोग घर से निकलने में कतराते हैं, तब मंदिरों में पंखे दान करना एक व्यावहारिक कदम है। इन पंखों की हवा उन दर्शनार्थियों को राहत देगी जो अपनी आस्था के लिए कतारों में खड़े होते हैं। यह छोटा सा कदम बड़ी राहत लेकर आया है।

कार्यक्रम की प्रभारी रेखा लढ़ा, मीता सोमानी और उनकी टीम ने व्यवस्थाएं संभालीं। पुरुषोत्तम मास में सेवा का विशेष महत्व माना गया है। लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि सार्वजनिक स्थानों पर अभी भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। क्या प्रशासन अपनी जिम्मेदारी समझ रहा है या फिर सामाजिक संस्थाओं को ही हमेशा आगे आकर सेवा का बीड़ा उठाना होगा? यह प्रश्न हमेशा बना रहेगा।

भक्ति और सेवा का मेल

त्रिविध पुरुषोत्तम सेवा का आयोजन केवल रामधाम गौशाला तक सीमित नहीं रहा। अमिता लढ़ा, अनिता माहेश्वरी और चंदा आगाल जैसी सदस्यों का योगदान बताता है कि एक मजबूत टीम ही बदलाव ला सकती है। जब महिलाएं समाज निर्माण में आगे आती हैं, तो उसका असर दूरगामी होता है। वे न केवल अपने परिवारों को संस्कारित करती हैं, बल्कि समाज की जड़ों को भी सींचती हैं।

भक्ति के साथ सेवा का मेल ही धर्म को जीवंत रखता है। आज के युग में ऐसी महिलाओं का समूह जो अपने धन और समय को समाज के लिए समर्पित करता है, किसी प्रेरणा से कम नहीं है। त्रिविध पुरुषोत्तम सेवा का आयोजन भविष्य में अन्य कार्यक्रमों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा। समाज को ऐसे ही सक्रिय महिला मंडलों की जरूरत है जो अपनी मेहनत के जरिए सकारात्मक बदलाव ला सकें।

"पुरुषोत्तम मास में की गई सेवा कई गुना फलदायी होती है, और हम सभी ने तन-मन-धन से सहयोग कर इसे सफल बनाने का संकल्प लिया है।"

अंततः, राजनीति के शोर और सामाजिक अलगाव के बीच इस तरह के आयोजन आशा की किरण हैं। त्रिविध पुरुषोत्तम सेवा का आयोजन साबित करता है कि भीलवाड़ा का समाज सेवा के मामले में अपनी परंपराओं के साथ खड़ा है। हम आशा करते हैं कि यह सेवा भावना केवल अधिक मास तक सीमित न रहे। व्यवस्थाओं की कमी को कोसने से बेहतर है कि हम अपनी जिम्मेदारी निभाएं, जैसा कि इन महिलाओं ने करके दिखाया है।

Thanks to all the readers for their 3+ Years of dedication and trust
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief