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बाज़ार और निवेश

सोने की कीमतों में उछाल: सुरक्षित निवेश की ओर बढ़े निवेशकों के कदम

सोने की कीमतों में उछाल के बीच वैश्विक बाजार में हलचल। लेबनान संघर्ष विराम और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से निवेशकों का रुझान बढ़ा।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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सोने की कीमतों में उछाल का दौर एक बार फिर शुरू हो गया है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा जोखिम भरी संपत्तियों से हटकर सुरक्षित निवेश की ओर मुड़ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को सोने की हाजिर कीमतों में 0.8% की बढ़त दर्ज की गई, जिसके बाद यह 4,517.73 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई गिरावट और मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्षों के बीच बाजार की यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि सोना अब भी अनिश्चितता के दौर में सबसे भरोसेमंद साथी बना हुआ है।[1]

लेबनान में हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच घोषित आंशिक संघर्ष विराम ने वैश्विक बाजारों को कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ताओं को लेकर चल रही विरोधाभासी खबरें निवेशकों को संशय में डाल रही हैं। जहां एक ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वार्ताओं के तेजी से बढ़ने का दावा कर रहे हैं, वहीं ईरानी मीडिया ने अप्रत्यक्ष बातचीत को रोकने के संकेत दिए हैं। राजनीति के इस घालमेल में सोने की चमक बढ़ना स्वाभाविक है।

बाजार में बढ़ती चमक

सोने की कीमतों में उछाल के पीछे का मुख्य कारण अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई कमी है, जिससे गैर-उपज वाली धातुओं को रखने की अवसर लागत कम हो गई है। गोल्डसिल्वर सेंट्रल के प्रबंध निदेशक ब्रायन लान ने रॉयटर्स से कहा कि संघर्ष विराम के बाद सोने की कीमतों में यह तेजी निवेश धारणाओं में आए बदलाव का संकेत है। जब दुनिया बारूद की ढेरी पर खड़ी हो, तो निवेशक कूटनीति के दांव-पेच से ज्यादा धातु के वास्तविक मूल्य पर भरोसा करना पसंद करते हैं।

"ऐसा लगता है कि इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष विराम की खबर के कारण सोने की कीमतों में थोड़ी बढ़त देखी जा रही है, जिसे कम ट्रेजरी यील्ड का भी समर्थन मिल रहा है।" - ब्रायन लान, प्रबंध निदेशक, गोल्डसिल्वर सेंट्रल।

निवेशकों की अब नजरें अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट और फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं के बयानों पर टिकी हैं। क्या मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच फेडरल रिजर्व अपनी मौद्रिक नीति में कोई बड़ा बदलाव करेगा? यह सवाल आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करेगा, लेकिन फिलहाल सोना अपनी मजबूती बरकरार रखे हुए है।

अगली बड़ी चुनौती

सोने की कीमतों में उछाल के साथ ही अब बाजार के विशेषज्ञ इसे एक बड़े मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर बढ़ते देख रहे हैं। ग्लोबल मैक्रो एट टेस्टिलाइव के प्रमुख इल्या स्पिवक के अनुसार, सोने के लिए 4,900 डॉलर का स्तर तोड़ना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन यदि यह 5,000 डॉलर के अंक को मजबूती से हासिल करता है, तो यह लंबी अवधि की गतिशीलता के साथ जुड़ जाएगा। क्या सोना वाकई इस स्तर को पार करने की शक्ति रखता है, या यह केवल एक अस्थायी उछाल है?

"ऊपरी स्तर पर, यहां टूटने वाली मुख्य बाधा लगभग 4,900 डॉलर है। यदि सोना 5,000 डॉलर के निशान पर मजबूती से अपनी जगह बनाता है, तो हमें पता चल जाएगा कि सोना फिर से अपनी दीर्घकालिक गतिशीलता के साथ जुड़ गया है।" - इल्या स्पिवक, हेड ऑफ ग्लोबल मैक्रो, टेस्टिलाइव।

रॉयटर्स के अनुसार, सोने के साथ ही चांदी, प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी तेजी देखी गई है, जो यह दर्शाता है कि यह उछाल केवल सोने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी धातु बाजार में एक सकारात्मक लहर है। सोने की कीमतों में उछाल का यह सफर वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और कूटनीतिक नाकामियों के बीच निवेशकों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अशांत समय में धातु ही एकमात्र सहारा है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। लेखक, प्रकाशक एवं संपादक स्पष्ट करते हैं कि शेयर बाजार, मुद्रा मूल्य और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम जोखिम के अधीन हैं। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी केवल विश्लेषण के उद्देश्य से है; कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले बाजार के विशेषज्ञों और अपने वित्तीय सलाहकारों से परामर्श अवश्य लें।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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