WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
प्रादेशिक

आईडीएफसी और एयू बैंक सरकारी फंड घोटाला, सीबीआई की बड़ी कार्रवाई

आईडीएफसी और एयू बैंक सरकारी फंड घोटाला: सीबीआई ने हरियाणा और चंडीगढ़ के कई ठिकानों पर तलाशी ली। सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत का खुलासा।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

Rex TV India - Reader dedication banner

चंडीगढ़, हरियाणा। एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, जांच एजेंसी सीबीआई ने आईडीएफसी और एयू बैंक सरकारी फंड घोटाला से जुड़े वित्तीय लेनदेन की गहन जांच शुरू की है। यह मामला हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ के दो प्रमुख विभागों के बीच हुए कथित वित्तीय अनियमिताओं से जुड़ा है। सीबीआई ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों, नोएडा स्थित विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों के ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया है।[1]

जांच में सामने आया है कि आईडीएफसी और एयू बैंक सरकारी फंड घोटाला एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा था, जिसमें सरकारी फंड के खातों का संचालन अत्यंत संदिग्ध तरीके से किया गया। सीबीआई का मानना है कि सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों ने आपस में मिलीभगत करके सरकारी राशि को पहले अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किया और फिर उसे व्यक्तिगत लाभ के लिए अन्यत्र डायवर्ट कर दिया। यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों को दरकिनार करते हुए अंजाम दी गई थी।

आठ विभागों पर प्रभाव

सीबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कथित वित्तीय घोटाले से हरियाणा सरकार के आठ महत्वपूर्ण विभागों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के दो प्रमुख विभागों को सीधा नुकसान पहुंचा है। इन प्रभावित संस्थानों में चंडीगढ़ म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी यानी क्रेस्ट चंडीगढ़ प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन विभागों के बजट और फंड के साथ जिस प्रकार का खिलवाड़ हुआ है, वह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि आईडीएफसी और एयू बैंक सरकारी फंड घोटाला के दायरे में आए इन विभागों के माध्यम से करोड़ों रुपयों की हेरफेर हुई है। मामले की तह तक जाने के लिए सीबीआई अब उन सभी लेनदेन की जांच कर रही है जो पिछले कुछ महीनों के दौरान इन बैंक खातों से किए गए थे। सरकारी खजाने का दुरुपयोग करने वाली इस पूरी चेन की पहचान करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से समीक्षा की जा रही है।

दस्तावेज और सबूत

तलाशी अभियान के दौरान सीबीआई के हाथ बड़ी सफलता लगी है। एजेंसी ने अनेक ऐसे आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए हैं जो इस घोटाले की पुष्टि करते हैं। जांच में ऐसे पुख्ता सबूत भी मिले हैं कि नोएडा स्थित विपम कंसल्टेंसी को इस घोटाले की राशि प्राप्त हुई थी। इसके बाद, उक्त धन को कंपनी के निदेशक के व्यक्तिगत खातों में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि इसका उपयोग निजी लाभ के लिए किया गया था।

सीबीआई के प्रवक्ता के अनुसार, आईडीएफसी और एयू बैंक सरकारी फंड घोटाला की जांच का दायरा अब और अधिक विस्तृत हो गया है। पकड़े गए डिजिटल उपकरणों और बैंक रिकॉर्ड्स से यह जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन से अन्य लोग या कंपनियां शामिल हैं। एजेंसी के अधिकारी लगातार साक्ष्यों का मिलान कर रहे हैं ताकि दोषियों के खिलाफ मजबूत मामला तैयार किया जा सके और सरकारी राशि की रिकवरी सुनिश्चित हो सके।

प्रथम चरण की चार्जशीट

सीबीआई इस मामले में पहले ही पंचाकुला स्थित सीबीआई अदालत में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इस प्रारंभिक चार्जशीट में हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी एचपीजीसीएल और हरियाणा स्कूल एजुकेशन प्रोजेक्ट परिषद के अधिकारियों की कथित भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया गया है। सरकारी धन के दुरुपयोग के इस मामले में इन अधिकारियों की संलिप्तता ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है और जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

जांच एजेंसी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जैसे-जैसे आईडीएफसी और एयू बैंक सरकारी फंड घोटाला की जांच की परतें खुलेंगी, इस मामले में और भी नई चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं। भविष्य में और भी कई वरिष्ठ अधिकारियों और बैंक कर्मियों के नाम इस सूची में जुड़ सकते हैं। सीबीआई की यह सख्ती यह संदेश देती है कि सरकारी धन की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। सरकारी जांच और वित्तीय घोटाले से संबंधित यह रिपोर्ट उपलब्ध आंकड़ों और सीबीआई की प्रारंभिक जांच पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

Rex TV Editorial Notice Details
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
Source Source