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बाज़ार और निवेश

डॉलर की मजबूती: भारतीय रुपये पर बढ़ता दबाव

अमेरिकी जॉब रिपोर्ट के बाद डॉलर की मजबूती दो महीने के उच्च स्तर पर। भारतीय रुपये पर भी इसका असर दिख रहा है, इस रिपोर्ट में जानें पूरी जानकारी।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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सिंगापुर। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत श्रम आंकड़ों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की तस्वीर बदल दी है। डॉलर की मजबूती अपने दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई है, जिससे निवेशकों का रुझान फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की ओर बढ़ गया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने गैर-कृषि पेरोल में 172,000 नौकरियों की वृद्धि दर्ज की गई, जो बाजार के अनुमानों से काफी अधिक है। इस उछाल ने वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर को एक नई ताकत प्रदान की है।[1]

डॉलर की मजबूती के कारण प्रमुख मुद्राओं में गिरावट देखी जा रही है। यूरो गिरकर 1.1507 डॉलर के दो महीने के निचले स्तर पर आ गया है, जबकि स्टर्लिंग भी 1.33165 डॉलर के तीन-सप्ताह के निचले स्तर पर संघर्ष कर रहा है। ऑस्ट्रेलियन और न्यूजीलैंड डॉलर में भी दो महीने की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका का श्रम बाजार ऊर्जा संकट के बावजूद अपनी मजबूती बनाए हुए है, जो फेडरल रिजर्व के लिए नीतिगत सख्ती का रास्ता खोल रहा है।

फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति

फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों को लेकर बाजार की उम्मीदें तेजी से बदल रही हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कैपिटल इकोनॉमिक्स के मुख्य बाजार अर्थशास्त्री जोनास गोलटरमैन का कहना है कि श्रम बाजार में सुधार और ऊर्जा संकट के कारण फेड द्वारा इस साल के अंत तक दरों में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है। अब उम्मीद की जा रही है कि फेडरल रिजर्व मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए इस साल दो बार 25-आधार अंकों की वृद्धि कर सकता है।

बाजार की धारणा में आए इस बदलाव का अंदाजा सीएमई फेडवॉच टूल से लगाया जा सकता है। एक सप्ताह पहले दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना 45 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 70 प्रतिशत से अधिक हो गई है। ईरान युद्ध से जुड़े वैश्विक ऊर्जा संकट ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को और गहरा कर दिया है। निवेशकों की नजरें अब फेड के अगले कदम पर टिकी हैं, जो डॉलर की मजबूती को और अधिक गति दे सकता है और वैश्विक तरलता को प्रभावित करेगा।

येन पर बढ़ता हुआ दबाव

जापानी येन डॉलर के मुकाबले 160.33 के स्तर पर पहुंच गया है, जो येन की कमजोरी को दर्शाता है। जापान ने पिछले महीने 11.7 ट्रिलियन येन का हस्तक्षेप किया था, लेकिन डॉलर की मजबूती ने उन तमाम लाभों को मिटा दिया है। बाजार विशेषज्ञ मान रहे हैं कि बैंक ऑफ जापान इस महीने ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है। हालांकि, मध्य पूर्व में ईरान-इजराइल के बीच तनाव की स्थिति यदि बिगड़ती है, तो येन की चाल पूरी तरह से अनिश्चितता के घेरे में आ जाएगी।

ओसीबीके के रणनीतिकार सिम मोह सियोंग का कहना है कि येन को लेकर बाजार असमंजस की स्थिति में है। येन को लाभ तभी मिल सकता है जब बैंक ऑफ जापान ब्याज दरों में वृद्धि की गति को तेज करने का संकेत दे। डॉलर की मजबूती के साथ ही येन का गिरना वैश्विक बाजारों के लिए एक चिंता का विषय है। तकनीकी शेयरों में भारी बिकवाली और डॉलर का दबदबा एशियाई बाजारों को भी प्रभावित कर रहा है, जिससे निवेशकों का आत्मविश्वास डगमगा गया है।

भारतीय रुपये पर पड़ने वाला प्रभाव

डॉलर की मजबूती का भारतीय रुपये पर भी सीधा और प्रतिकूल असर पड़ रहा है। जब डॉलर विश्व स्तर पर मजबूत होता है, तो उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं में गिरावट आना स्वाभाविक है। भारतीय रुपया भी इस समय डॉलर की मजबूती के दबाव में है, जिससे आयात महंगा हो रहा है। विशेष रूप से कच्चा तेल, जिसका भारत आयात करता है, उसकी लागत डॉलर के बढ़ने से और अधिक बढ़ जाती है। इससे देश में मुद्रास्फीति का दबाव और बढ़ने की पूरी संभावना बनी हुई है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती है। रुपया को स्थिर रखने के लिए रिजर्व बैंक को अपने विदेशी मुद्रा भंडार से हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। डॉलर की मजबूती के कारण विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बाजारों से कम हो सकता है, जिससे पूंजी का बहिर्वाह बढ़ सकता है। हालांकि, भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति अब भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती के कारण आने वाले समय में रुपये की चाल काफी उतार-चढ़ाव भरी रह सकती है।

क्रिप्टोकरेंसी और बाजार का भविष्य

डॉलर की मजबूती के दौर में क्रिप्टोकरेंसी बाजारों में भी उतार-चढ़ाव जारी है। बिटकॉइन पिछले सप्ताह के निचले स्तरों से उबरते हुए 1 फीसदी की तेजी के साथ 62,615 डॉलर के पार पहुंच गया है। ईथर में भी मामूली सुधार देखा गया है। हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में निवेश का रुझान बढ़ रहा है, जिससे निवेशकों की पूंजी क्रिप्टोकरेंसी से दूर हो रही है। डॉलर की मजबूती और एआई शेयरों का आकर्षण बिटकॉइन जैसे डिजिटल एसेट्स के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

निष्कर्ष यह है कि डॉलर की मजबूती ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की प्राथमिकताओं को बदल दिया है। निवेशक अब सुरक्षित संपत्तियों की ओर भाग रहे हैं और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। आने वाले हफ्तों में मध्य पूर्व का घटनाक्रम और अमेरिकी श्रम बाजार का प्रदर्शन यह तय करेगा कि डॉलर की यह मजबूती कब तक बरकरार रहेगी। निवेशकों को मौजूदा बाजार जोखिमों को देखते हुए अपनी रणनीतियों में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। डॉलर की मजबूती, वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव और मुद्रास्फीति की दरें अत्यधिक संवेदनशील विषय हैं। निवेश से संबंधित कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें, क्योंकि बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है और पिछले प्रदर्शन भविष्य के परिणामों का आश्वासन नहीं देते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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