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अंतरराष्ट्रीय

होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन: ईरान और ओमान की नई शर्तें

होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन अब ईरान और ओमान द्वारा तय की गई नई शर्तों के अधीन होगा। वैश्विक तेल आपूर्ति पर इसके गंभीर प्रभाव की संभावना बनी हुई है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन अब नई व्यवस्था के तहत होगा। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के मास्को स्थित राजदूत काज़ेम जलाली ने स्पष्ट किया है कि यह जलमार्ग खुला तो रहेगा, लेकिन अब ईरान और ओमान द्वारा निर्धारित नई शर्तों का पालन करना होगा, जिसमें एक पारगमन शुल्क (Transit Fee) भी शामिल हो सकता है। यह घोषणा उस समय आई है जब मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति पहले से ही काफी बाधित है।[1]

होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन दुनिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि संघर्ष से पूर्व यहाँ से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल गुजरता था। हालांकि, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने इन प्रवाहों को काफी हद तक रोक दिया है। हालांकि हाल के दिनों में कुछ टैंकरों ने खाड़ी से बाहर निकलने में कामयाबी हासिल की है, लेकिन तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का प्रवाह अभी भी गंभीर रूप से सीमित बना हुआ है, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है।

ईरान और ओमान की नई व्यवस्था

ईरान का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन एक स्थायी शांति समझौते के ढांचे के भीतर होना चाहिए, जिससे उसे जहाजों से शुल्क लेने का अधिकार मिले। राजदूत जलाली ने रूसी समाचार पत्र 'इजवेस्तिया' को दिए साक्षात्कार में कहा कि ईरान और ओमान इस जलडमरूमध्य से संबंधित कुछ सेवाएं प्रदान करते हैं, जिसके लिए अब शुल्क लिया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि यह शुल्क जहाज के प्रकार, उसके माल और प्रचलित परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

ईरान की इस प्रस्तावित नीति का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मई के अंत में अमेरिका ने ओमान को चेतावनी दी थी कि वह ईरान के साथ किसी भी टोल या शुल्क को लागू करने के प्रयास में शामिल न हो। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने दावा किया था कि ओमान के राजदूत ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इस तरह का कोई भी टोल लगाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है, जो क्षेत्र में बढ़ते कूटनीतिक तनाव को दर्शाता है।

सैन्य तनाव और कूटनीतिक दबाव

होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक गहरा सैन्य मुद्दा भी बन गया है। इजराइल ने सोमवार को ईरान के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। यह कार्रवाई तब हुई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से आगे हमले न करने का आग्रह किया था। इस सैन्य संघर्ष के बीच जलमार्ग पर नियंत्रण की लड़ाई और भी तेज हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जापान, जो युद्ध से पहले अपनी तेल जरूरतों का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता था, इस स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है। मई में जब जापान से संबंधित एक कच्चे तेल का टैंकर इस जलमार्ग से गुजरा था, तो जापान ने स्पष्ट किया था कि उसने किसी भी तरह का शुल्क नहीं दिया है। यह दिखाता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन करने वाली नई शक्तियों और वैश्विक उपभोक्ताओं के बीच एक बड़ा कूटनीतिक संघर्ष शुरू होने की प्रबल संभावना है।

आर्थिक प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण

होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन अगर शुल्क आधारित होता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक मुद्रास्फीति पर पड़ेगा। तेल की कीमतों में पहले से ही अस्थिरता है, और पारगमन शुल्क जुड़ने से परिवहन लागत में और अधिक वृद्धि होगी। तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ होगा, जो पहले से ही ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक बाधित कर सकती है और भविष्य में नए व्यापार मार्ग खोजने की मजबूरी पैदा कर सकती है।

इसके अलावा, ओमान की भूमिका इस मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि ओमान, जो ऐतिहासिक रूप से तटस्थ रहा है, ईरान के साथ मिलकर शुल्क नीति को अपनाता है, तो खाड़ी देशों के साथ उसके संबंधों में बदलाव आ सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगियों का कड़ा रुख यह स्पष्ट करता है कि वे इस रणनीतिक जलमार्ग पर ईरान के एकतरफा अधिकार को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। यह तनाव न केवल तेल की कीमतों को बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्र में सैन्य तैनाती भी बढ़ा सकता है।

निष्कर्ष और भविष्य की संभावनाएं

होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन आने वाले हफ्तों में वैश्विक राजनीति का केंद्र बिंदु रहने वाला है। ईरान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मुक्त नौवहन के अधिकारों के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि शुल्क लगाने का फैसला लागू होता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक नई जंग को जन्म दे सकता है। फिलहाल, दुनिया के प्रमुख उपभोक्ता देश कूटनीतिक तरीकों से इस स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सैन्य तनाव और ईरान की जिद ने समाधान को बहुत दूर धकेल दिया है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन और उससे संबंधित शुल्क नीतियां एक अत्यंत जटिल और परिवर्तनशील भू-राजनीतिक मुद्दा हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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