नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान: तस्करों की चार करोड़ की संपत्ति जब्त
नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत श्रीनगर पुलिस ने दो ड्रग तस्करों की चार करोड़ रुपये की अचल संपत्ति जब्त की है। एनडीपीएस एक्ट के तहत हुई यह बड़ी कार्रवाई।
चार करोड़ रुपये की अचल संपत्ति जब्त
(श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर)। नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के अंतर्गत श्रीनगर पुलिस ने ड्रग तस्करी के खिलाफ अपना शिकंजा और अधिक मजबूत कर लिया है। हालिया कार्रवाई में पुलिस ने दो प्रमुख ड्रग तस्करों की लगभग चार करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को कुर्क करने का साहसिक कदम उठाया है। यह कार्रवाई स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम यानी एनडीपीएस एक्ट 1985 के कठोर प्रावधानों के तहत अमल में लाई गई है। श्रीनगर पुलिस का यह कदम ड्रग माफियाओं के आर्थिक आधार को तोड़ने की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।[1]
ड्रग तस्करी से अर्जित की गई इस अचल संपत्ति को अटैच करने का निर्णय कानून की सख्त अनुपालना को दर्शाता है। पुलिस के अनुसार, इन तस्करों ने नशीले पदार्थों के काले कारोबार से अवैध धन अर्जित कर ये संपत्तियां बनाई थीं। श्रीनगर पुलिस का मानना है कि केवल गिरफ्तारियां काफी नहीं हैं, बल्कि तस्करी से बनाए गए साम्राज्य को ध्वस्त करना ही इस नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान का मुख्य उद्देश्य है। इससे समाज में एक कड़ा संदेश भी गया है कि अपराध के जरिए कमाई गई संपत्ति सुरक्षित नहीं है।
कार्रवाई की विस्तृत पृष्ठभूमि
नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत यह कोई पहली बार नहीं है जब पुलिस ने ड्रग तस्करों की संपत्ति पर प्रहार किया हो। श्रीनगर पुलिस के उच्च अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई एनडीपीएस एक्ट की धारा 68-एफ के तहत की गई है, जो जांच एजेंसियों को अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को फ्रीज या अटैच करने का अधिकार देती है। पुलिस की विशेष टीमों ने लंबे समय तक इन तस्करों की गतिविधियों की निगरानी की थी और उसके बाद ही उनकी संपत्तियों का ब्योरा एकत्र किया था।
श्रीनगर पुलिस की इस कार्यप्रणाली से यह स्पष्ट है कि प्रशासन आने वाले समय में भी ड्रग तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। जिन दो तस्करों की संपत्ति को अटैच किया गया है, वे काफी समय से पुलिस की रडार पर थे। कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन हो ताकि भविष्य में यह संपत्ति पूरी तरह से राज्य सरकार के अधिकार में आ सके।
आधिकारिक दृष्टिकोण और रणनीति
इस संदर्भ में एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ड्रग्स की चेन को तोड़ने के लिए लगातार सक्रिय है।
"ड्रग्स के इस नेटवर्क से जुड़े हर एक व्यक्ति की पहचान की जा रही है और उनकी अवैध कमाई की जांच की जा रही है ताकि नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान को सफल बनाया जा सके।"
प्रशासन के इस रुख से ड्रग माफियाओं में हड़कंप मच गया है। श्रीनगर पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि यदि कोई भी व्यक्ति मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त पाया जाता है, तो न केवल उसे जेल की हवा खानी होगी बल्कि उसकी मेहनत से कमाई गई या तस्करी से अर्जित संपत्ति भी कानून के शिकंजे में होगी। अधिकारियों का कहना है कि वे इस अभियान के माध्यम से युवाओं को एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य प्रदान करने के लिए पूरी तरह से संकल्पित हैं।
भविष्य की दिशा और जनसहयोग
नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के सफल कार्यान्वयन के लिए श्रीनगर पुलिस अब स्थानीय निवासियों से भी निरंतर सहयोग की अपेक्षा कर रही है। पुलिस का कहना है कि ड्रग्स की रोकथाम के लिए समाज की सहभागिता बेहद अनिवार्य है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुखबिर की पहचान को पूरी तरह से गुप्त रखा जाएगा ताकि नागरिक बिना किसी डर के अपनी बात कह सकें।
आगामी महीनों में श्रीनगर पुलिस इसी तरह की और भी कई कार्यवाहियां करने की योजना बना रही है। ड्रग तस्करी के खिलाफ चल रहे इस अभियान में अब तक कई तस्करों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं और उन पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। श्रीनगर पुलिस के इन प्रयासों का उद्देश्य न केवल तस्करी को खत्म करना है बल्कि उन परिवारों को भी राहत पहुंचाना है जो नशाखोरी के कारण अपनी अगली पीढ़ी को खो रहे हैं।
अस्वीकरण:
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। आपराधिक मामलों में जांच प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है, जिसके परिणाम और तथ्य परिवर्तित हो सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।
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— Press Trust of India (@PTI_News) June 8, 2026