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अंतरराष्ट्रीय

मध्य पूर्व तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमले

मध्य पूर्व में फिर से सैन्य तनाव चरम पर है। ईरान और अमेरिका के बीच हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति बिगड़ गई है, जिससे वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ गई ह

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका। मध्य पूर्व में संघर्ष एक बार फिर से एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बुधवार को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी जवाबी हमलों के जवाब में जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी बेस और खाड़ी देशों में स्थित 21 अन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। यह अप्रैल में हुए संघर्ष विराम के बाद से दोनों देशों के बीच हुई अब तक की सबसे बड़ी सैन्य झड़पों में से एक है। इस नई सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र की स्थिरता को गंभीर खतरे में डाल दिया है।[1]

यह तनाव तब और गहरा गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराए जाने की पुष्टि की। इसके जवाब में अमेरिका ने होर्मुज के पास ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों और निगरानी रडार साइटों को लक्षित किया। ट्रंप ने इसे एक बहुत ही शक्तिशाली और मजबूत प्रतिक्रिया बताया है। इस ताजा घटनाक्रम ने उस शांति वार्ता की संभावनाओं को और कमजोर कर दिया है, जो इस व्यापक युद्ध को समाप्त करने के लिए काफी समय से लंबित थी।

सैन्य संघर्ष और जवाबी हमले

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने जॉर्डन के अल-अजराक बेस पर लंबी दूरी की मिसाइलों से चार अलग-अलग ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में एफ-35 फाइटर जेट हैंगर और एक कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर को मुख्य लक्ष्य बनाया गया था। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि आगे भी अमेरिका द्वारा कोई हमला किया जाता है, तो वे और भी अधिक निर्णायक और करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वहीं, जॉर्डन के सशस्त्र बलों ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान द्वारा दागी गई पांच मिसाइलों को मार गिराया है।

ईरान ने केवल जॉर्डन ही नहीं, बल्कि कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी ठिकानों को भी अपने ड्रोन हमलों का निशाना बनाया। कुवैती सेना ने पुष्टि की कि उनके वायु रक्षा तंत्र ने शत्रुतापूर्ण हवाई लक्ष्यों को मार गिराया है। इसी तरह, बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने भी बताया कि उन्होंने ईरानी हमलों को विफल कर दिया है। मध्य पूर्व तनाव की स्थिति को देखते हुए, क्षेत्र में मौजूद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बलों को सतर्क रहने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

वैश्विक प्रभाव और आर्थिक चिंताएं

इस तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ा है। संघर्ष की खबरें आते ही बुधवार की सुबह एशियाई बाजारों में तेल की कीमतों में लगभग एक प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का एक प्रमुख मार्ग रहा है, युद्ध शुरू होने के बाद से ही प्रतिबंधों की चपेट में है। इस मध्य पूर्व तनाव के कारण विश्वभर की आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो रही है, जिससे भविष्य में ऊर्जा संकट का डर बढ़ गया है।

अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने स्वीकार किया है कि होर्मुज के माध्यम से जहाज यातायात धीरे-धीरे बढ़ रहा है, लेकिन युद्ध की समाप्ति के बाद ऊर्जा प्रवाह को सामान्य स्थिति में आने में कई महीनों का समय लग सकता है। दूसरी ओर, ईरान ने अपनी मांगों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने, अपनी जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण की मान्यता को शामिल किया है। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी शांति समझौते के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करे।

आगे की राह और कूटनीतिक चुनौतियां

दोनों देशों के बीच बढ़ती यह दुश्मनी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बड़ी चिंता का विषय है। डोनाल्ड ट्रंप ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के साथ एक बातचीत में हेलीकॉप्टर की घटना को बहुत बड़ा मुद्दा न मानने का संकेत दिया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सीधे तौर पर हेलीकॉप्टर की घटना का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि क्षेत्र में विदेशी बलों की उपस्थिति दुर्घटनाओं या गोलाबारी में फंसने के जोखिम को बढ़ाती है।

अंततः, जब तक दोनों पक्षों के बीच कोई ठोस और टिकाऊ समाधान नहीं निकल आता, तब तक इस संघर्ष का अंत होता नहीं दिख रहा है। ईरान अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करना चाहता है, जबकि अमेरिका क्षेत्र में अपने प्रभाव को बरकरार रखने पर जोर दे रहा है। मध्य पूर्व तनाव के इस माहौल में आम जनता और विश्व अर्थव्यवस्था दोनों ही सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। आने वाले कुछ सप्ताह कूटनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे, जहाँ यह देखना होगा कि क्या कोई नया समझौता इस विनाशकारी चक्र को रोक पाएगा या स्थिति और अधिक गंभीर हो जाएगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। मध्य पूर्व के सैन्य संघर्ष से संबंधित सभी जानकारी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों एवं आधिकारिक बयानों पर आधारित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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