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अंतरराष्ट्रीय

अमेरिका ईरान सैन्य टकराव के चलते मध्य पूर्व में तनाव चरम पर

अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर आत्मरक्षा में बड़े हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। जिससे अमेरिका ईरान सैन्य टकराव चरम पर पहुंच गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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वाशिंगटन, डीसी। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर मौजूद कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इस पूरी कार्रवाई को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया है। इस ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की स्थिति पैदा हो गई है जिसके कारण वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता जताई जाने लगी है। इस अमेरिका ईरान सैन्य टकराव के कारण खाड़ी देशों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।[1]

इस बड़े सैन्य हमले की पुष्टि खुद अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व और रक्षा विभाग के अधिकारियों ने की है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वाशिंगटन में प्रेस को संबोधित करते हुए साफ किया कि अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के भीतर बेहद महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई अमेरिकी ताकतों और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी थी। इस कार्रवाई के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक राजनीति में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है।

तनाव के बीच अमेरिकी हमले का मुख्य उद्देश्य

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक आधिकारिक बयान जारी कर इस पूरी सैन्य कार्रवाई की विस्तृत जानकारी साझा की है। सेना के अनुसार अमेरिकी बलों ने ईरान की सैन्य निगरानी क्षमताओं, संचार प्रणालियों और हवाई रक्षा प्रणालियों को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए अतिरिक्त हमले किए हैं। अमेरिकी सेना ने उन सभी ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया है जिनसे अमेरिकी सैनिकों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लगातार खतरा बना हुआ था। इस कार्रवाई के जरिए अमेरिका ने ईरान को एक कड़ा संदेश देने का प्रयास किया है।

सेंट्रल कमांड ने अपने आधिकारिक बयान में इन हमलों को पूरी तरह से आत्मरक्षा की श्रेणी में रखा है। अमेरिकी सेना ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह हमले ईरान द्वारा लगातार किए जा रहे अनुचित और आक्रामक व्यवहार का सीधा परिणाम हैं। अमेरिकी सेना खाड़ी क्षेत्र में पूरी तरह सतर्क, घातक और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार बैठी है। सैन्य कमांडरों का मानना है कि इन हमलों से ईरानी सेना की आक्रामक क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा है जिससे आने वाले समय में अमेरिकी ठिकानों पर मंडराने वाले खतरे काफी हद तक कम हो जाएंगे।

"ये हमले ईरान के अनुचित और निरंतर जारी आक्रामक व्यवहार के जवाब में किए गए हैं। अमेरिकी बल पूरी तरह से सतर्क, घातक और हर स्थिति के लिए तैयार हैं।" - अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM)

परमाणु समझौते को लेकर बढ़ा भारी दबाव

अमेरिका ईरान सैन्य टकराव के इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से एक बेहद कड़ा बयान जारी किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका काफी समय से ईरान के साथ एक शांतिपूर्ण समझौता करने की कोशिश कर रहा था लेकिन ईरान ने केवल औपचारिक नाटक किया और वास्तविक रूप से किसी भी समझौते के प्रति प्रतिबद्धता नहीं दिखाई। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने अब भी सही फैसला नहीं लिया तो अमेरिका उस पर बेहद कड़ा और बड़ा प्रहार जारी रखेगा। इस गंभीर स्थिति के बीच अमेरिका ईरान सैन्य टकराव का मुद्दा वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि एक गुप्त अमेरिकी सैन्य मिशन के कारण ही 10 करोड़ बैरल तेल ले जाने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित बाहर निकाला जा सका है। उन्होंने कहा कि वह पिछले कई महीनों से ईरान के साथ मिलकर काम कर रहे थे और ईरान को इस नए समझौते पर हस्ताक्षर कर देने चाहिए। यह एक बेहतरीन समझौता है जो ईरान को परमाणु हथियार बनाने के अधिकार से पूरी तरह वंचित करता है। इस प्रतिबंध के लागू होने के बाद ईरान कभी भी भविष्य में परमाणु शक्ति संपन्न देश नहीं बन पाएगा।

"सेंट्रल कमांड आज रात काफी व्यस्त रहने वाली है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि हम ईरान पर बहुत कड़ा प्रहार करेंगे और हम वही कर रहे हैं। ईरान के पास एक अच्छा और शानदार समझौता करने का मौका है जिसके लिए वे पहले अपनी इच्छा जता रहे थे लेकिन असल में वे इसके प्रति कभी गंभीर नहीं दिखे।" - पीट हेगसेथ (अमेरिकी रक्षा मंत्री)

वैश्विक सुरक्षा और शांति व्यवस्था पर असर

अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ताजा हमला बीते अप्रैल महीने में हुए युद्धविराम के बाद से यह अमेरिका ईरान सैन्य टकराव सबसे बड़ा सैन्य टकराव है। इस हमले के बाद मध्य पूर्व के देशों में भी अलर्ट घोषित कर दिया गया है क्योंकि तेल आपूर्ति का मुख्य मार्ग होने के कारण इस क्षेत्र में अशांति पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। वैश्विक नेताओं ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है ताकि इस संकट को और बढ़ने से रोका जा सके।

वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते इस तनाव ने संयुक्त राष्ट्र की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में यदि यह टकराव शांत नहीं हुआ तो खाड़ी क्षेत्र में एक बड़ा मानवीय और आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल अमेरिकी सेना ने ईरान के आसपास के समुद्री रास्तों पर अपनी गश्त बढ़ा दी है और हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार इस हमले का असर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है। इस अमेरिका ईरान सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सामने एक नई और बेहद कठिन चुनौती खड़ी कर दी है।

अस्वीकरण

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। खाड़ी देशों और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों की सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक बयानों को ही अंतिम माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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