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बाज़ार और निवेश

बाजार में हलचल से सोने और चांदी के दाम में भारी गिरावट देखने को मिली

ग्लोबल मार्केट में मची हलचल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण सोने और चांदी के दाम में भारी गिरावट आने से निवेशकों में भारी अनिश्चितता देखी जा रही है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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ग्लोबल मार्केट में मची हलचल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने के डर से आज सर्राफा बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे कड़े कूटनीतिक तनाव के कारण दुनिया भर के बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इसका सीधा असर सर्राफा बाजार पर पड़ा है और सोने और चांदी के दाम में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोने के फ्यूचर रेट में आज बड़ी गिरावट देखी गई है। अगस्त डिलीवरी वाला सोना एक दशमलव पांच एक प्रतिशत गिरकर एक लाख पचास हजार एक सौ चालीस रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गया है। वहीं दूसरी ओर जुलाई डिलीवरी वाली चांदी की कीमत भी लगभग एक प्रतिशत टूटकर दो लाख छत्तीस हजार दो सौ उनतालीस रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई है।[1]

घरेलू बाजार में धातुओं के भाव औंधे मुंह गिरे

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी आईबीजेए के मुताबिक बुधवार को चौबीस कैरेट सोने की कीमत एक लाख अड़तालीस हजार चार सौ उनतीस रुपये प्रति दस ग्राम दर्ज की गई है। इससे पिछले दिन बाजार खुलने पर यही सोना एक लाख बावन हजार पांच सौ उन्नीस रुपये पर ट्रेंड कर रहा था। इस तरह देखा जाए तो महज एक ही दिन के भीतर सोने के भाव में बहुत बड़ी गिरावट आई है।

भारत में सोने के दाम तय होने में अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ-साथ डॉलर की मजबूती की बड़ी भूमिका होती है। इसके अलावा त्योहारों के सीजन में होने वाली घरेलू गहनों की मांग भी स्थानीय कीमतों को प्रभावित करती है। बाजार के जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियों के कारण कीमती धातुओं पर लगातार दबाव बना हुआ है।

"अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण सोने पर दबाव बना हुआ है।" - इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA)

ग्लोबल मार्केट में रिकॉर्ड ग्यारह हफ्ते का निचला स्तर

ग्लोबल मार्केट की बात करें तो वहां भी सोने की कीमतों में तगड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट गोल्ड का भाव एक दशमलव आठ प्रतिशत गिरकर चार हजार एक सौ सत्तासी दशमलव पांच नौ डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। सोने और चांदी के दाम में भारी गिरावट के कारण यह सोने का पिछले ग्यारह हफ्तों का सबसे निचला स्तर है जिसके कारण बड़े निवेशक बाजार से दूरी बनाने लगे हैं।

इसी तरह अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर भी अंतरराष्ट्रीय दबाव को झेल नहीं पाया और गिरकर चार हजार दो सौ तेरह दशमलव चार शून्य डॉलर पर आ गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में सोने पर इम्पोर्ट टैरिफ बढ़ने की वजह से देश में सोने की अवैध तस्करी बहुत तेजी से बढ़ रही है। यह अवैध व्यापार मौजूदा समय में सरकार और जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

उच्च इम्पोर्ट ड्यूटी के कारण बढ़ी सोने की तस्करी

सोने की कीमतों में इस बड़े बदलाव के बीच इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और सर्राफा व्यापारियों ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि भारत सरकार द्वारा सोने के इम्पोर्ट पर टैक्स यानी टैरिफ बढ़ाए जाने के कारण देश में सोने की स्मगलिंग बहुत तेजी से बढ़ रही है। अनुमान लगाया गया है कि इस साल देश में अवैध तरीके से आने वाले सोने की मात्रा सौ मीट्रिक टन से भी ज्यादा हो सकती है।

ग्रे मार्केट में मिलने वाले मोटे मुनाफे के कारण तस्कर आधिकारिक बैंकों और रिफाइनर्स के मुकाबले काफी कम दामों पर सोना बेच रहे हैं। आधिकारिक और अनौपचारिक बाजारों के बीच कीमतों का यह बड़ा अंतर सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बन गया है। सोने और चांदी के दाम में भारी गिरावट की इस स्थिति के चलते सोने और चांदी के दाम में भारी गिरावट होने के बावजूद कानूनी तौर पर व्यापार करने वाले कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

"भारत सरकार द्वारा सोने के इम्पोर्ट पर टैक्स यानी टैरिफ बढ़ाए जाने के कारण देश में सोने की स्मगलिंग बहुत तेजी से बढ़ रही है।" - सर्राफा बाजार विशेषज्ञ

अस्वीकरण

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। सर्राफा बाजार के दैनिक रेट और कर प्रणालियों की सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक सरकारी आंकड़ों को ही अंतिम माना जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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