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राजस्थान

संरक्षित राष्ट्रीय संपदा बचाने गरजा बुलडोजर, दो मंजिला इमारत जमींदोज

संरक्षित राष्ट्रीय संपदा को सुरक्षित रखने के लिए चित्तौड़गढ़ में अवैध दो मंजिला होटल को सुरक्षा बलों की मौजूदगी में पूरी तरह जमींदोज किया गया।

By अजय त्यागी
1 min read
गरजा बुलडोजर

गरजा बुलडोजर

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चित्तौड़गढ़, राजस्थान। ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण विश्व विरासत सूची में शामिल दुर्ग के भीतर रविवार की अलसुबह प्रशासनिक अमले ने एक बेहद बड़ा कदम उठाया है। कानून के मुताबिक संरक्षित राष्ट्रीय संपदा के संरक्षण हेतु यह कार्रवाई पुरातत्व विभाग की आरक्षित भूमि पर किए गए अवैध निर्माण को हटाने के लिए की गई है।[विडियो]

सुबह ठीक चार बजे जब पूरा शहर गहरी नींद में सोया हुआ था तब भारी पुलिस जाब्ते के साथ प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंच गई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए दुर्ग की तरफ आने और जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया था।

प्रशासनिक महाअभियान

अवैध रूप से निर्मित हो रही दो मंजिला होटल की इमारत को पूरी तरह जमींदोज करने के लिए प्रशासन को बड़े स्तर पर संसाधनों का उपयोग करना पड़ा। इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए मौके पर दस जेसीबी मशीनें, आठ ट्रैक्टर और तीन ब्रेकर मशीनें तैनात की गई थीं।

सुरक्षा के लिहाज से चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी भी प्रकार की कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। इस प्रकार संरक्षित राष्ट्रीय संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ की गई इस त्वरित कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

उच्च स्तरीय बैठक

इस पूरे एक्शन की रूपरेखा पिछले दिनों कलेक्ट्रेट में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान बेहद गोपनीय तरीके से तैयार की गई थी। जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों पर मुकदमा दर्ज हो।

कलक्टर के कड़े आदेश के बाद पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चित्तौड़गढ़ शहर कोतवाली में संबंधित आरोपी के खिलाफ नामजद मामला भी दर्ज करवा दिया था। इसके बाद ही रविवार को सुबह-सुबह इस जमींदोज करने की बड़ी योजना को धरातल पर उतारा गया।

ऐतिहासिक सख्त कार्रवाई

पुरातत्व विभाग के नोडल अधिकारी ने बताया कि यह अवैध निर्माण पूरी तरह से हमारे संरक्षित क्षेत्र के भीतर किया जा रहा था। इस निर्माण को हटाने के लिए विभाग की तरफ से पूर्व में बकायदा कानूनी नोटिस भी जारी किया जा चुका था।

"भारत सरकार ने हमें कानून व्यवस्था बनाए रखने का पूरा अधिकार दिया है।" - मनोज द्विवेदी, नोडल अधिकारी, पुरातत्व विभाग

उन्होंने आगे बताया कि जिला प्रशासन के पूर्ण सहयोग से इस अवैध होटल को पूरी तरह हटा दिया गया है। राजस्थान के इतिहास में यह अपने आप में पहली ऐसी बड़ी कार्रवाई है जहां पुरातत्व विभाग की जमीन से सीधे तौर पर अतिक्रमण हटाया गया है।

आगामी बड़ी कार्रवाई

इस बड़ी बुलडोजर कार्रवाई के बाद दुर्ग क्षेत्र और उसके आसपास के कमर्शियल इलाकों में प्रशासनिक हलचल बेहद तेज हो गई है। आंकड़ों के अनुसार साल 2020 के बाद से चित्तौड़गढ़ दुर्ग के प्रतिबंधित क्षेत्र पर करीब आठ से दस अवैध रेस्टोरेंट और होटलों का निर्माण हुआ है।

संरक्षित राष्ट्रीय संपदा में बनें इन सभी संदिग्ध और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने के लिए दिल्ली स्थित केंद्रीय आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट को विस्तृत पत्र लिखा जा चुका है। वहां से उच्च स्तरीय स्वीकृति मिलते ही दुर्ग पर बने अन्य अवैध होटलों और रेस्टोरेंट्स पर भी प्रशासन का बुलडोजर चलना तय माना जा रहा है।

मुस्तैद सुरक्षा बल

सुरक्षा व्यवस्था को संभालने और किसी भी विरोध प्रदर्शन से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी भी खुद मौके पर लगातार डटे रहे। सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के कारण बिना किसी बड़े विरोध के इस जटिल कार्रवाई को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कर लिया गया।

"यदि प्रशासन हमें निर्देश देता है, तो हम कार्रवाई करेंगे और तोड़फोड़ अभियान चलाएंगे। हम इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।" - बृजेश सिंह, डीएसपी

इस प्रकार कानून के सख्त प्रवर्तन से देश की अनमोल संरक्षित राष्ट्रीय संपदा को सुरक्षित रखने का एक बड़ा संदेश दिया गया है। आने वाले दिनों में चिन्हित किए गए अन्य अवैध निर्माणों के खिलाफ भी ऐसी ही सख्त कानूनी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। चित्तौड़गढ़ दुर्ग परिसर में प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की प्रामाणिक जानकारी लोकहित में प्रस्तुत की गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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