बचपन की प्रेरणा से शुरू हुआ बच्चों के स्वास्थ्य को सुधारने का सफर
बच्चों के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए योग शिक्षिका पोपी पाल ने शुरू की अनूठी पहल, भक्ति योग केंद्र में मिल रहा चालीस बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण।
योग प्रशिक्षण
त्रिपुरा। आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ और मानसिक तनाव के बीच आज की नई पीढ़ी को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य को सुधारने की यह एक बहुत बड़ी और सकारात्मक पहल साबित हो रही है। इसी उद्देश्य को स्वीकार करते हुए राज्य के एक सुदूर इलाके में बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए एक नई और सकारात्मक क्रांति की शुरुआत हुई है। यहाँ के स्थानीय समाज को जागरूक करने और विशेषकर कम उम्र के छात्र-छात्राओं को भारतीय संस्कृति की प्राचीन विधा से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं।[विडियो]
इस अनूठे अभियान के तहत सब्रूम स्थित प्रसिद्ध श्री श्री रामचंद्र देव आश्रम में इन दिनों बच्चों के भीतर सेहत के प्रति एक नई अलख जगाई जा रही है। यहाँ विशेष तौर पर संचालित की जा रही कक्षाओं में क्षेत्र के लगभग चालीस से अधिक छोटे बच्चे नियमित रूप से हिस्सा ले रहे हैं। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ उनके समग्र शारीरिक विकास और एकाग्रता को बढ़ाने के लिए एक बेहद सकारात्मक माहौल प्रदान करना है।
स्वस्थ बचपन की नींव
इस पूरे सकारात्मक प्रयास को धरातल पर उतारने का श्रेय स्थानीय महिला योग शिक्षिका पोपी पाल को जाता है, जो बच्चों के सुनहरे भविष्य को तराशने में जुटी हैं। उनके द्वारा स्थापित भक्ति योग केंद्र के माध्यम से वर्तमान समय में बच्चों के स्वास्थ्य को सुधारने का यह कार्य बखूबी किया जा रहा है जहाँ कुल चालीस बच्चों को सप्ताह में दो बार बेहद खास और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस विशेष कक्षा का मुख्य फोकस बच्चों की शारीरिक शक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ उनके मानसिक संतुलन को हर परिस्थिति में पूरी तरह से मजबूत और स्थिर बनाए रखना है।
South Tripura, Tripura: At Sri Sri Ramchandra Dev Ashram in Sabroom, yoga instructor Poppy Pal’s “Bhakti Yoga Kendra” is training 40 children twice a week. The program focuses on physical and mental fitness through yoga pic.twitter.com/7GR5y0BJxx
— IANS (@ians_india) June 14, 2026
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो योग का अभ्यास बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। नियमित रूप से विभिन्न आसनों और प्राणायाम का अभ्यास करने से न सिर्फ बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में अभूतपूर्व विकास होता है, बल्कि उनकी रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियां भी मजबूत बनती हैं। डिजिटल युग में स्क्रीन के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बच्चों में पैदा हो रहे मानसिक तनाव और चिड़चिड़ेपन को दूर करने में भी यह पद्धति बेहद कारगर साबित हो रही है।
प्रेरणा का अनूठा सफर
इस केंद्र का संचालन कर रहीं शिक्षिका के जीवन का सफरनामा भी बेहद प्रेरणादायक है, जो आज की युवा पीढ़ी को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। बचपन में अपने स्कूल के दिनों के दौरान एक शिक्षक के माध्यम से इस विधा से रूबरू होने के बाद उनके मन में इसके प्रति गहरा लगाव पैदा हो गया था। उस समय मिले उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की वजह से ही उन्होंने ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।
वही पुरानी सीख और अनुभव आज इस सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के स्वास्थ्य को सुधारने और उनके जीवन को एक नई दिशा देने के काम आ रहे हैं। इस केंद्र में आने वाले बच्चों को न केवल शारीरिक कसरत कराई जाती है, बल्कि उनके भीतर नैतिक मूल्यों और आत्म-अनुशासन की भावना को भी बहुत गहराई से रोपित किया जा रहा है। यही वजह है कि स्थानीय अभिभावक भी इस प्रयास की जमकर सराहना कर रहे हैं और इसे अपने बच्चों के सर्वांगीण विकास का मुख्य आधार मान रहे हैं।
"मैं राम ठाकुर आश्रम में योग सिखाती हूँ। हमारा योग केंद्र सब्रूम में राम ठाकुर आश्रम में स्थित है, और हमारे केंद्र का नाम भक्ति योग केंद्र है। जब मैं छोटी थी तब मुझे प्रेरणा मिली थी। हमारे स्कूल में एक शिक्षक आए थे, और तभी हमने योग सीखा। शिक्षक ने हमें बहुत प्रेरित किया और हमें ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। -पोपी पाल, योग शिक्षिका"
भविष्य की मजबूत तैयारी
नियमित अभ्यास के माध्यम से बच्चों के मानसिक फोकस और याददाश्त में भी काफी सुधार देखने को मिल रहा है, जो उनकी स्कूली शिक्षा और परीक्षा के प्रदर्शन में भी मददगार साबित होगा। योग के विभिन्न आसन जैसे ताड़ासन, वृक्षासन और ध्यान की क्रियाएं बच्चों की निर्णय लेने की क्षमता और एकाग्रता को कई गुना बढ़ा देती हैं। प्रशासन और समाज के प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि ऐसे स्थानीय स्तर के प्रयासों को और अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
South Tripura, Tripura: Yoga instructor Poppy Pal says, "I teach yoga at Ram Thakur Ashram. Our yoga centre is located in Sabroom at Ram Thakur Ashram, and the name of our centre is Bhakti Yoga Centre. I was inspired when I was young. A teacher came to our school, and that is… pic.twitter.com/9mJ3ROvhxF
— IANS (@ians_india) June 14, 2026
इस छोटे से केंद्र से शुरू हुआ यह सफर आने वाले समय में एक बड़े सामाजिक बदलाव का गवाह बनने की पूरी क्षमता रखता है। इस तरह के प्रयासों से न केवल एक स्वस्थ समाज का निर्माण होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ी भी अपनी प्राचीन धरोहरों के प्रति अधिक जागरूक और गौरवान्वित महसूस करेगी। ग्रामीण अंचल में बच्चों के स्वास्थ्य को सुधारने की यह पूरी मुहिम आज के समय में हर उस व्यक्ति के लिए एक बड़ी मिसाल है जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। दक्षिण त्रिपुरा के सब्रूम में संचालित भक्ति योग केंद्र में बच्चों के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए दिए जा रहे प्रशिक्षण और योग शिक्षिका पोपी पाल के अनुभवों की प्रामाणिक जानकारी लोकहित में प्रस्तुत की गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।
South Tripura, Tripura: Yoga instructor Poppy Pal says, "I teach yoga at Ram Thakur Ashram. Our yoga centre is located in Sabroom at Ram Thakur Ashram, and the name of our centre is Bhakti Yoga Centre. I was inspired when I was young. A teacher came to our school, and that is… pic.twitter.com/9mJ3ROvhxF
— IANS (@ians_india) June 14, 2026