नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ रहा है सिंधी बाल संस्कार शिविर
सिंधी बाल संस्कार शिविर के जरिए बच्चों ने सीखी मातृभाषा और कलाएं। समापन पर नन्हे बच्चों की रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सबका मन मोह लिया।
सिंधी बाल संस्कार शिविर
बीकानेर, राजस्थान। आधुनिकता की अंधी दौड़ में जहाँ नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से लगातार दूर होती जा रही है, वहीं पारंपरिक धरोहर को संजोने के लिए कुछ विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसी पावन उद्देश्य के साथ समाज के बच्चों को अपनी मातृभाषा, संस्कारों और कलात्मक विधाओं से जोड़ने के लिए यह सिंधी बाल संस्कार शिविर एक बड़ा माध्यम बना है। स्थानीय स्तर पर किए गए इस अनूठे प्रयास के जरिए बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनके भीतर छुपी प्रतिभा को निखारने का कार्य बखूबी किया गया है।
इस महत्वपूर्ण अभियान के तहत भारतीय सिन्धु सभा महानगर एवं सहयोगी संस्था अमरलाल मंदिर ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया निःशुल्क सिंधी बाल संस्कार शिविर 2026 का रविवार को रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ भव्य समापन हुआ। रथखाना क्षेत्र स्थित संत अमर लाल मंदिर परिसर में आयोजित इस विशेष समापन समारोह के दौरान समाज के तमाम प्रबुद्ध और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिन्होंने बच्चों के इस हुनर की जमकर सराहना की।
संस्कार और अनुशासन
इस विशेष समापन समारोह के दौरान बच्चों ने शिविर में सीखी गई कलाओं का बेहद शानदार प्रदर्शन किया, जिसे देखकर उपस्थित अतिथि भावविभोर हो गए। इस दौरान कशिश, माही और टिशा जैसी नन्ही बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत किए गए पारंपरिक सिंधी नृत्य ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस रंगारंग कार्यक्रम की अध्यक्षता साधु वासवानी ट्रस्ट के राजकुमार मूलचंदानी द्वारा की गई, जबकि विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर विराजमान रहे।
इस आयोजन की महत्ता को रेखांकित करते हुए वक्ताओं ने बताया कि इस सिंधी बाल संस्कार शिविर के माध्यम से बच्चों को अपनी अनूठी संस्कृति और सभ्यता को बहुत करीब से जानने का अवसर मिला है। इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में बच्चों को न केवल सिंधी भाषा व बोली को शुद्ध रूप से लिखना, पढ़ना और बोलना सिखाया गया, बल्कि दैनिक जीवन में अनुशासन, समयबद्धता, सच्चाई, नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा जैसी अच्छी आदतों के विकास पर भी विशेष बल दिया गया।

विविध कलाओं का संगम
समारोह की शुरुआत ईष्ट देव भगवान झूलेलाल के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसमें दीपक आहुजा, गणेश सदारंगानी, दिलीप मनसुखानी, दौलत प्रेमजानी, मोहन थानवी, मनोज कारिया, किशोर मोटियानी, धमेंन्द्र बालानी, सुगनचंद और के कुमार आहुजा ने सहभागिता की। इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बच्चों को विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया गया। शिविर में शिक्षिका नीता सामनानी द्वारा सिंधी बोली व भाषा का ज्ञान दिया गया।
इसके साथ ही प्रशिक्षक वर्षा रामनानी द्वारा मेंहदी, गीतिका चंदानी द्वारा चित्रकला, वंशिका रिझवानी द्वारा नृत्य और कुशल व दिव्यांश विधानी द्वारा शतरंज खेलना सिखाया गया। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में संपूर्ण कार्यक्रम के प्रभारी राजेश केशवानी के साथ-साथ सुरेश केशवानी, मनोज विधानी, अशोक खत्री और कान्ता वाधवानी जैसे कर्मठ सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा, जिन्होंने व्यवस्थाओं को संभाला।
"शिविर में बच्चों ने सिंधी भाषा व बोली को लिखना, पढना, बोलने के साथ जीवन में अच्छी आदतो का विकास दैनिक जीवन में अनुशासन, समयबद्धता, सच्चाई, नैतिकता व कर्तव्यनिष्ठा के बारे में बताया गया व सिखाया गया। संस्था का मुख्य उद्देश्य अपनी आने वाली पीढ़ी को अपनी मूल संस्कृति और भाषा से जोड़कर रखना है ताकि हमारी अनूठी धरोहर हमेशा जीवंत बनी रहे। -किशन सदारंगानी, पदाधिकारी"
उत्साहवर्धन और आभार
समारोह के अंतिम चरण में शिविर के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले और अनुशासित रहने वाले सभी बच्चों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस दौरान बच्चों के उत्साह को दोगुना करने के लिए सागर गारमेंट्स एवं अमर लाल मंदिर द्वारा आकर्षक उपहार भेंट किए गए। इसके साथ ही भारतीय सिंधु सभा के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा सभी प्रतिभागियों को आधिकारिक प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए, ताकि भविष्य में वे इन विधाओं में आगे बढ़ सकें।
कार्यक्रम के अंत में धोबी तलाई के इकाई अध्यक्ष तेजप्रकाश वलीरमाणी द्वारा समारोह में पधारे सभी अतिथियों, समर्पित शिक्षकों, सहयोगी सदस्यों और अभिभावकों का तहे दिल से धन्यवाद और आभार व्यक्त किया गया। आज के इस सफल आयोजन और सिंधी बाल संस्कार शिविर की गूंज के बाद समाज के लोगों ने संकल्प लिया है कि आने वाले समय में भी बच्चों के नैतिक और मानसिक उत्थान के लिए ऐसे रचनात्मक और संस्कारयुक्त प्रयास निरंतर जारी रखे जाएंगे।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अमरलाल मंदिर ट्रस्ट और भारतीय सिन्धु सभा महानगर द्वारा आयोजित सिंधी बाल संस्कार शिविर, सांस्कृतिक गतिविधियों और पदाधिकारियों के बयानों की प्रामाणिक जानकारी लोकहित में प्रस्तुत की गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।