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क्राइम

पेपर लीक का फर्जी दावा कर ठगने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

सोशल मीडिया पर पेपर लीक का फर्जी दावा कर देश भर के छात्रों और अभिभावकों से करोड़ों रुपये ऐंठने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार।

By अजय त्यागी
1 min read
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

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अहमदाबाद, गुजरात। अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए री-नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झूठा झांसा देकर छात्रों और अभिभावकों को ठगने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए राजस्थान के दो युवकों को गिरफ्तार किया है। जांचकर्ताओं को पता चला था कि अज्ञात लोग टेलीग्राम पर री-नीट परीक्षा के पेपर लीक का फर्जी दावा कर रहे हैं।[1]

इस संबंध में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2) और 54 सहित सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। पकड़े गए आरोपी टेलीग्राम और सोशल मीडिया विज्ञापनों के माध्यम से यह झूठा प्रचार कर रहे थे कि उनके पास 21 जून को होने वाली री-नीट परीक्षा का मूल प्रश्नपत्र और अन्य गोपनीय सामग्रियां मौजूद हैं।

टेलीग्राम पर फैलाया जाल

पुलिस के अनुसार इन चतुर ठगों ने कई फर्जी टेलीग्राम चैनल, टेलीग्राम आईडी और ऑनलाइन ग्रुप बना रखे थे, जिन पर वे लगातार भ्रामक संदेश पोस्ट करते रहते थे। परीक्षाओं की तैयारी कर रहे मासूम छात्रों और उनके परेशान अभिभावकों को निशाना बनाने के लिए इस गिरोह द्वारा विभिन्न प्रकार के आकर्षक विज्ञापनों, सोशल मीडिया पोस्टों और誘惑ों का सहारा लिया जाता था, जिससे लोग आसानी से झांसे में आ जाते थे।

जांचकर्ताओं ने बताया कि प्रश्नपत्र और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी देने के नाम पर ये लोग एडवांस पेमेंट के रूप में मोटी रकम वसूलते थे और पैसा मिलते ही गायब हो जाते थे। साइबर क्राइम ब्रांच का आरोप है कि इन चैनलों का इस्तेमाल केवल गलत सूचनाएं फैलाने और बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी करने के लिए किया जा रहा था ताकि पेपर लीक का फर्जी दावा करके अवैध कमाई की जा सके।

पुलिस अधिकारियों का बयान

इस पूरे मामले को लेकर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम) शरद सिंघल ने स्पष्ट रूप से बताया कि इस पूरे प्रकरण में वास्तव में री-नीट परीक्षा का कोई भी प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है। आरोपियों ने केवल लोगों को ठगने के लिए पेपर लीक का फर्जी दावा किया था। तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल नंबरों, आईपी एड्रेस और डिजिटल सबूतों के आधार पर सुमेर सिंह मीणा और आकाश मीणा को गिरफ्तार किया गया है।

"सबसे पहले मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि री-नीट परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ था। जब आरोपी देखते थे कि उनके ग्रुप में 300 से 400 प्रीमियम सदस्य जुड़ गए हैं, तो गिरोह के सदस्य खुद ही फर्जी मैसेज पोस्ट करने लगते थे कि पिछले साल के पेपर में अस्सी प्रतिशत प्रश्न फंसे थे।" - शरद सिंघल, संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम)

डिजिटल साक्ष्यों की बरामदगी

पकड़े गए आरोपियों में से सुमेर सिंह इलेक्ट्रॉनिक्स में आईटीआई स्नातक है और वह जयपुर, राजस्थान का रहने वाला है। दूसरा आरोपी आकाश मीणा कोटा से गिरफ्तार हुआ है और वह हिंदी-अंग्रेजी में बीए स्नातक है। पुलिस ने इनके पास से कई फर्जी टेलीग्राम चैनल जैसे राघव सिंह नीट, दीपक वाधवा और जीत शाह क्रिप्टो बरामद किए हैं। हालांकि, इनके पास से कोई भी नीट या परीक्षा से संबंधित अध्ययन सामग्री नहीं मिली है।

जांच में सामने आया है कि पेपर लीक का फर्जी दावा करने वाले आरोपी थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन का उपयोग करके अपने टेलीग्राम चैनलों पर फर्जी सदस्यों की संख्या बढ़ाते थे और फिर उन चैनलों को ऊंचे दामों पर बेच देते थे। इसके अलावा ये लोग 'ट्रेड विद करोल' और 'पंकज भारद्वाज' नाम से ग्रुप चलाकर निवेश के नाम पर भी साइबर ठगी कर रहे थे। इनके बैंक खातों में पिछले एक साल में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन मिला है।

ठगी की रकम का रूट

साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार आरोपियों के छह बैंक खाते देश के विभिन्न राज्यों की 12 शिकायतों से जुड़े पाए गए हैं। आरोपी धोखाधड़ी से कमाए गए पैसों को गेमिंग वेबसाइटों पर इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों में जमा करते थे। इसके बाद पैसों को गेमिंग वेबसाइट्स के माध्यम से रूट करके अलग-अलग सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था, जहाँ से वे निजी लाभ के लिए नकद निकासी करते थे।

आरोपी आकाश मीणा के पास से करीब 44 ऐसी वेबसाइट्स मिली हैं जो साइबर अपराध गतिविधियों से सीधे तौर पर जुड़ी हुई थीं। जांच के दौरान पिछले एक महीने में एक हजार से अधिक मोबाइल नंबरों और टेलीग्राम चैनलों की गहन पड़ताल की गई है। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों, विज्ञापन कर्ताओं और तकनीकी सहायता देने वाले लोगों की तलाश में पुलिस टीमें राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल में छापेमारी कर रही हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। नीट परीक्षा या किसी अन्य प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्रों के संबंध में केवल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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