बिना पर्ची सिरप बिक्री पर रोक: स्वास्थ्य मंत्रालय का बड़ा फैसला
अब खांसी सहित सभी सिरप दवाएं बिना डॉक्टर की वैध पर्ची के नहीं खरीदी जा सकेंगी केंद्र सरकार ने खुले बाजार में सिरप बिक्री पर रोक लगा दी है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
नई दिल्ली, दिल्ली। देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और युगांतकारी बदलाव लागू हो गया है जिसके बाद अब आम उपभोक्ताओं को किसी भी मेडिकल स्टोर से सिरप खरीदना आसान नहीं होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए खुले बाजार में बिना पर्ची के खांसी के सिरप सहित सभी तरह के सिरप बिक्री पर रोक लगा दी है।[1]
सरकार का यह कदम देश के भीतर दवाओं के अनियंत्रित उपयोग को रोकने और नागरिकों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की दिशा में उठाया गया एक बेहद बड़ा और कड़ा कदम माना जा रहा है। अब मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए किसी भी उपभोक्ता को कोई भी सिरप देने से पहले डॉक्टर द्वारा लिखी गई वैध पर्ची को देखना और उसका रिकॉर्ड रखना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।
सरकार के सख्त निर्देश
सरकार के इस नए और सख्त फैसले के बाद अब कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से मेडिकल स्टोर पर जाकर कफ सिरप या अन्य कोई सिरप दवाएं ओवर द काउंटर यानी सीधे काउंटर से नहीं खरीद पाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है जिसने तत्काल प्रभाव से पूरे देश के भीतर इस व्यवस्था को कानूनी रूप से लागू कर दिया है।
जानकारों की मानें तो बाजार में मिलने वाली विभिन्न प्रकार की सिरप दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग और उनके कारण स्वास्थ्य पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों को देखते हुए सरकार लंबे समय से इस तरह के कड़े कानून की तैयारी कर रही थी। इस बड़े फैसले के बाद अब सरकार द्वारा लगाई गई इस सिरप बिक्री पर रोक के नियमों का उल्लंघन करने वाले दवा विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
नियमों में बड़े बदलाव
केंद्र सरकार ने इस व्यवस्था को कानूनी रूप देने के लिए ड्रग्स रूल्स 1945 के पुराने नियमों में एक बहुत बड़ा संशोधन किया है जिसे अब ड्रग्स पांचवां संशोधन नियम 2026 के नाम से जाना जाएगा। सरकार द्वारा इस ऐतिहासिक संशोधन को 9 जून को आधिकारिक राजपत्र यानी ऑफिशियल गजट में पूरी तरह से अधिसूचित भी किया चुका है जिसके बाद यह नया नियम पूरे देश में प्रभावी हो गया है।
इस नए आगामी कानूनी संशोधन के अंतर्गत सरकार ने ड्रग्स रूल्स 1945 की महत्वपूर्ण अनुसूची के तहत मिलने वाली कुछ विशेष छूटों के दायरे को पूरी तरह से बदलते हुए सिरप को सामान्य दवाओं की श्रेणी से अलग कर दिया है। अब इस श्रेणी की सभी दवाएं पूरी तरह से लागू विनियामक आवश्यकताओं और कड़े सरकारी नियंत्रण के अधीन आ गई हैं, जिससे इस सिरप बिक्री पर रोक का पालन करना अनिवार्य हो गया है।
लंबी विचार प्रक्रिया
सरकार द्वारा अचानक लिया गया यह कोई जल्दबाजी का फैसला नहीं है बल्कि इसके पीछे एक बहुत ही लंबी और पूरी तरह से पारदर्शी विनियामक प्रक्रिया शामिल रही है। केंद्र सरकार ने इस अंतिम अधिसूचना को जारी करने से पहले 29 दिसंबर 2025 को एक विस्तृत ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया था जिसके माध्यम से देश के सभी संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं।
सरकार ने इस मसौदे के जरिए आम जनता, दवा निर्माताओं, डॉक्टरों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों को अपनी बात रखने के लिए एक लंबा और पर्याप्त समय दिया था। अंतिम कानून को रूप देने से पहले सरकार की उच्च स्तरीय समिति द्वारा इन सभी प्राप्त टिप्पणियों और जनता के विचारों पर बहुत ही बारीकी से विचार-विमर्श किया गया और उसके बाद ही इस अधिसूचना को मंजूरी दी गई।
तकनीकी बोर्ड की सलाह
इस पूरे कानून को तैयार करने और इसे देश में लागू करने से पहले सरकार ने देश की सबसे बड़ी तकनीकी संस्था ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड से भी व्यापक परामर्श किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार केंद्र सरकार ने इस बोर्ड के साथ गहन विचार-विमर्श करने के बाद ही अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए ड्रग्स रूल्स 1945 में यह ऐतिहासिक और दूरगामी संशोधन करने का निर्णय लिया है।
बोर्ड की सलाह के बाद ही ड्रग्स रूल्स 1945 की अनुसूची के तहत आने वाले ड्रग्स वर्ग नामक शीर्षक के कॉलम में क्रम संख्या 13 के सामने दर्ज मद संख्या 7 से 'सिरप' शब्द को हटाने की अंतिम संस्तुति की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैज्ञानिक और तकनीकी सलाह पर आधारित फैसले से देश में दवाओं के गलत इस्तेमाल और नशे की प्रवृत्ति पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाई जा सकेगी।
"केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के तहत ड्रग्स रूल्स 1945 में किए गए इस नए संशोधन के बाद अब खांसी और अन्य सिरप दवाओं को बिना किसी वैध चिकित्सकीय पर्ची के बेचना पूरी तरह से गैरकानूनी माना जाएगा।"
निष्कर्ष के तौर पर देखा जाए तो सिरप बिक्री पर रोक लगाने का सरकार का यह कदम देश के नागरिकों को अनियंत्रित और अत्यधिक दवा सेवन के खतरों से बचाने के लिए एक बेहद जरूरी और स्वागत योग्य प्रयास है। हालांकि इस नए नियम के लागू होने के बाद शुरुआती दिनों में आम उपभोक्ताओं और छोटे दवा विक्रेताओं को कुछ व्यावहारिक दिक्कतों का सामना जरूर करना पड़ सकता है लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह देश के स्वास्थ्य ढांचे को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाएगा। मेडिकल स्टोर संचालकों को भी अब अपनी जिम्मेदारी समझते हुए बिना पर्ची के इन दवाओं की बिक्री को पूरी तरह बंद करना होगा क्योंकि सरकार द्वारा लागू सिरप बिक्री पर रोक का कड़ाई से पालन करना ही देश को एक स्वस्थ भविष्य की ओर ले जाएगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। यह देश में सिरप दवाओं की बिक्री से संबंधित सरकारी नियमों और स्वास्थ्य मंत्रालय की अधिसूचना की समीक्षा से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।