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स्वास्थ्य

फेफड़े में फंसी सुपारी और आफत में जान: पीबीएम अस्पताल ने दिखाया कमाल

सात साल की गंभीर तकलीफ और जगह-जगह ईलाज के लिए भटकने के बाद पीबीएम अस्पताल ने दिखाया कमाल और बिना चीरफाड़ के महिला को किया पूरी तरह स्वस्थ।

By अजय त्यागी
1 min read
ईलाज करने वाली टीम और निकाली गई सुपारी

ईलाज करने वाली टीम और निकाली गई सुपारी

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बीकानेर, राजस्थान। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के श्वसन रोग विभाग ने एक बेहद जटिल और दुर्लभ मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। इस पूरे रेयर केस में डॉक्टरों की सूझबूझ और सटीक इलाज के बाद हर तरफ यही चर्चा है कि पीबीएम अस्पताल ने दिखाया कमाल और सात वर्षों से गंभीर रूप से पीड़ित एक अट्ठावन वर्षीय महिला को नया जीवन दिया। रामदेवरा निवासी यह महिला लंबे समय से श्वास संबंधी बेहद दर्दनाक तकलीफ से जूझ रही थी। उसे लगातार खांसी, निमोनिया, सीने में तेज दर्द और सांस लेने में भारी परेशानी की शिकायत रहती थी।

इस गंभीर स्थिति के कारण महिला ने कई सालों तक जोधपुर और फलोदी सहित विभिन्न स्थानों पर नामचीन चिकित्सकों से परामर्श लिया था। स्थिति इतनी पेचीदा थी कि उसकी सीटी स्कैन की रिपोर्ट को जांच के लिए मुंबई भी भेजा गया था, जहाँ के चिकित्सकों ने महिला को टीबी होने की प्रबल संभावना जताई थी। कई बार महंगे उपचार के बावजूद उसकी शारीरिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और वह लगातार कमजोर होती चली गई जिससे उसका पूरा परिवार हताश था।[1]

सटीक जांच और खुलासा

जब रिश्तेदारों से जानकारी मिली तो निराश हो चुका परिवार महिला को लेकर पीबीएम अस्पताल के श्वसन रोग विभाग में पहुंचा। यहाँ श्वसन रोग विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. गुंजन सोनी ने मरीज की पुरानी केस हिस्ट्री देखी और उसकी बेहद विस्तृत जांच की। जांच के दौरान डॉक्टरों के सामने एक चौंकाने वाला सच आया कि महिला के फेफड़े में करीब एक इंच लंबी सुपारी फंसी हुई है।

यही एक इंच लंबी सुपारी पिछले सात वर्षों से महिला के शरीर में छिपी हुई थी और उसकी तमाम जानलेवा शारीरिक परेशानियों का मुख्य कारण बनी हुई थी। इस सटीक डायग्नोसिस के बाद ही पीबीएम अस्पताल ने दिखाया कमाल और बीमारी की असली वजह को पकड़ा जा सका। डॉ. गुंजन सोनी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिना कोई समय गंवाए मरीज को तुरंत भर्ती करने और आपातकालीन प्रोसीजर शुरू करने के निर्देश दिए।

जटिल दूरबीन प्रोसीजर

मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. गुंजन सोनी ने अपनी विशेष विशेषज्ञ टीम के साथ ब्रोंकोस्कोपी यानी दूरबीन तकनीक के माध्यम से एक बेहद जटिल प्रोसीजर को अंजाम दिया। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस बेहद कठिन और संवेदनशील ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने सूझबूझ दिखाई। डॉक्टरों की टीम ने फेफड़े की नाजुक परतों को नुकसान पहुंचाए बिना वहां फंसी हुई सुपारी को बहुत ही सावधानीपूर्वक क्रश किया और टुकड़ों में करके बाहर निकाला।

इस सफल प्रक्रिया के तुरंत बाद महिला को सांस की तकलीफ से बड़ी राहत मिली और उसकी स्थिति में तेजी से सुधार होने लगा। इस सफल ऑपरेशन के बाद एक बार फिर चिकित्सा जगत में पीबीएम अस्पताल ने दिखाया कमाल क्योंकि डॉक्टरों की इस विशेष सूझबूझ के कारण महिला की सात साल पुरानी बीमारी चंद घंटों में गायब हो गई। ऑपरेशन के बाद मरीज की सेहत अब पूरी तरह सामान्य है और वह तेजी से रिकवर हो रही है।

"कई बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाने और अनेक चिकित्सकों से महंगा उपचार लेने के बाद भी जब हमें कोई समाधान नहीं मिला, तब पीबीएम के डॉ. गुंजन सोनी हमारे लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आए। उन्होंने और उनकी पूरी चिकित्सा टीम ने जो मेहनत की है, उसी की बदौलत आज मेरी पत्नी को एक नया जीवन मिल सका है।" -पीड़ित महिला के पति

निशुल्क चिकित्सा लाभ

इस पूरी जटिल चिकित्सा प्रक्रिया की सबसे खास बात यह रही कि पीड़ित महिला का संपूर्ण उपचार सरकार की मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत पूरी तरह से निःशुल्क किया गया। इस अत्यंत सफल और सराहनीय उपचार को अंजाम देने वाली टीम में डॉ. गुंजन सोनी के साथ डॉ. अंकित, डॉ. वसुंधरा, डॉ. मनुदेव, डॉ. प्रवेश, डॉ. दिनेश, डॉ. विजय शामिल थे। इसके अलावा नर्सिंग स्टाफ मंजू तथा हेल्पर विनोद ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

चिकित्सकों की इस ऐतिहासिक सफलता ने साबित कर दिया है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक और डॉक्टरों का अनुभव किसी भी असाध्य बीमारी को ठीक कर सकता है। बीकानेर के इस सरकारी अस्पताल में जब सात साल पुराना दर्द दूर हुआ, तो हर किसी ने माना कि इस जटिल केस को सुलझाकर पीबीएम अस्पताल ने दिखाया कमाल और क्षेत्र के चिकित्सा जगत में इस अनोखे मामले की चर्चा फैल गई। अब महिला पूरी तरह स्वस्थ है और बिना किसी दर्द या तकलीफ के सामान्य रूप से सांस ले पा रही है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी/स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief