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प्रादेशिक

दिन भर काम और दो सौ रुपए दाम: बाल श्रम उन्मूलन पर बड़ी कार्रवाई

दिन भर काम और केवल दो सौ रुपए दाम के चक्र में फंसे मासूमों को बचाने के लिए गुजरात पुलिस ने विशेष ऑपरेशन चलाकर बाल श्रम उन्मूलन पर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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गांधीनगर, गुजरात। गुजरात पुलिस ने मासूमों के हक में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम नाम से एक बड़ा अभियान चलाया गया है। इस मुहिम के शुरुआती चौदह दिनों के भीतर ही पुलिस ने विभिन्न फैक्ट्रियों से बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराना शुरू कर दिया है और अब तक चौरासी बच्चों को आजाद कराया जा चुका है। बच्चों के शोषण के इस काले कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अब तक छब्बीस आरोपी ठेकेदारों के खिलाफ सोलह आपराधिक मामले दर्ज किए हैं, जो बाल श्रम उन्मूलन पर बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। इस अभियान का नेतृत्व उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी कर रहे हैं।[1]

औद्योगिक इलाकों में चल रहे इस दमन चक्र का सबसे खौफनाक चेहरा सूरत शहर में देखने को मिला। पुलिस ने एक सटीक सूचना के आधार पर जय अंबे टेक्सटाइल्स नाम की कपड़ा फैक्टरी पर अचानक छापा मारा। वहां से दो नाबालिग लड़कों को बेहद अमानवीय परिस्थितियों से छुड़ाया गया। प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि इन मासूम बच्चों से दिन भर काम और केवल दो सौ रुपए दाम पर मजदूरी कराई जा रही थी। यह मजदूरी कानूनी और नैतिक दोनों ही मानकों से बहुत कम है।

मासूमों पर दमन चक्र

जब भी ये बच्चे लगातार काम करने से मना करते, तो उन्हें डरा-धमका कर जबरन काम पर लगा दिया जाता था। इन मासूमों से सुबह आठ बजे से लेकर शाम सात बजे तक काम लिया जाता था। इस पूरे दिन में उन्हें सिर्फ एक घंटे का लंच ब्रेक मिलता था। पुलिस ने नियोक्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, बाल श्रम अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। ऐसे अमानवीय हालातों को खत्म करने के लिए पुलिस द्वारा बाल श्रम उन्मूलन पर बड़ी कार्रवाई की जा रही है ताकि दिन भर काम और केवल दो सौ रुपए दाम के शोषण को जड़ से खत्म किया जा सके।

पुलिस महानिदेशक जी एस मलिक ने कहा कि यह अभियान सिर्फ बच्चों को छुड़ाने तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस का पूरा ध्यान इन बच्चों के पुनर्वास और उनकी शिक्षा पर है। अब तक सरसठ बच्चों का पुनर्वास किया जा चुका है। इसके साथ ही जनता को जागरूक करने के लिए राज्य भर में एक सौ साठ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। पुलिस अब अपराधियों पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दे रही है ताकि बचपन को इस नरक से बचाया जा सके।

चार चरणों की रणनीति

सीआईडी क्राइम के अतिरिक्त महानिदेशक अजय चौधरी ने बताया कि छुड़ाए गए बच्चों में से ज्यादातर बिहार और राजस्थान के प्रवासी हैं। यह साफ तौर पर अंतरराज्यीय मानव तस्करी और लेबर नेटवर्क से जुड़ा मामला है। पुलिस अब सीधे ठेकेदारों और सप्लाई चेन को निशाना बना रही है। इसके लिए एक चार चरणों वाली विशेष रणनीति बनाई गई है जिसके तहत हॉटस्पॉट की मैपिंग, औचक निरीक्षण, बच्चों का स्कूलों में दाखिला और संगठित नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा शामिल है।

इस अभियान के तहत गुजरात पुलिस ने पचास हजार से अधिक स्थानों की जांच करने, दस हजार खुफिया इनपुट जुटाने और पांच हजार से ज्यादा बाल मजदूरों को छुड़ाने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए हर जिले में विशेष टीमों का गठन किया गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि दिन भर काम और केवल दो सौ रुपए दाम पर बच्चों का शोषण करने वाले माफियाओं को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और बाल श्रम उन्मूलन पर बड़ी कार्रवाई अनवरत जारी रहेगी।

इस प्रकार मुस्तैदी से काम शुरू होने के बाद अब पीड़ित बच्चों को इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिलने की उम्मीद बंधी है। आने वाले दिनों में जब जमीनी स्तर पर प्रशासनिक टीमें अपनी देखरेख में कार्य करेंगी, तो बाल श्रम के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकेगा। पूरे राज्य में फैले इस लेबर माफिया के जाल को तोड़ने के लिए पुलिस की यह रणनीति बेहद कारगर साबित हो रही है, जिससे इस अभियान के तहत बाल श्रम उन्मूलन पर बड़ी कार्रवाई को जमीनी स्तर पर पूर्ण रूप से लागू किया जा सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। यह गुजरात में पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम और बाल श्रम उन्मूलन अभियान से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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