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राष्ट्रीय

रक्षा असैन्य कर्मचारियों की ऐतिहासिक जीत! देश भर में खुशी की लहर

केंद्र सरकार ने आयुध कारखानों के बासठ हजार सिविलियन कर्मियों के लिए रिटायरमेंट तक डीम्ड डेपुटेशन को मंजूरी देकर रक्षा असैन्य कर्मचारियों की ऐतिहासिक जीत पर मुहर

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

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नई दिल्ली, भारत। रक्षा क्षेत्र में पूर्व के ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के तहत आने वाले आयुध कारखानों के बासठ हजार सिविलियन कर्मचारियों को बड़ी सफलता हासिल हुई है। भारत सरकार ने पूर्व के ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के उन कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट तक डीम्ड डेपुटेशन जारी रखने को मंजूरी दे दी है जो सात नई बनी डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स में शामिल होने का विकल्प नहीं चुनते हैं। इस बड़े फैसले को एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने गत सप्ताह अपनी हरी झंडी दे दी है, जिसके बाद रक्षा असैन्य कर्मचारियों की ऐतिहासिक जीत का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है।[1]

अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने बताया कि आयुध कारखानों के रक्षा असैन्य कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे थे। कर्मियों की मांग थी कि उन्हें नवगठित रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में जबरन शामिल न किया जाए। रक्षा मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन द्वारा पंद्रह जून को जारी एक ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए अब यह जानकारी सार्वजनिक की गई है। इस बड़े कदम से पुरानी ओएफबी के लगभग बासठ हजार कर्मचारियों को लंबे समय से प्रतीक्षित स्पष्टता और राहत मिल गई है।

सेवा शर्तों का संरक्षण

मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नए आदेश के अनुसार पुरानी ओएफबी के सभी योग्य कर्मचारियों को सात डीपीएसयू द्वारा तैयार किया गया एक कॉमन एब्ज़ॉर्प्शन पैकेज ऑफर किया जाएगा। हालांकि इसके बाद भी कर्मचारियों के पास यह तय करने का पूरा अधिकार सुरक्षित होगा कि वे नई कॉर्पोरेशन्स में स्थायी रूप से शामिल होना चाहते हैं या नहीं। जो कर्मचारी इस समावेशन का विकल्प नहीं चुनते हैं, वे अपने रिटायरमेंट तक डीपीएसयू में डीम्ड डेपुटेशन पर काम करते रहेंगे जिससे अनिवार्य समावेशन की संभावना खत्म हो गई है।

रक्षा मंत्रालय के ऑफिस मेमोरेंडम में यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया है कि डीम्ड डेप्युटेशन पर रहने वाले सभी कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर लागू होने वाले सभी मौजूदा नियमों, विनियमों और आदेशों के दायरे में बने रहेंगे। इसके अंतर्गत कर्मचारियों के वेतनमान, भत्ते, छुट्टियां, चिकित्सा सुविधाएं, करियर में तरक्की और सेवा की अन्य सभी शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी। इस फैसले को उन कर्मचारियों के लिए एक बड़ी सुरक्षा और कर्मचारियों की ऐतिहासिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है जो अपनी स्थिति को लेकर चिंतित थे।

अनिश्चितता का हुआ अंत

समावेशन के विकल्प की प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी तरीके से पूरा करने में आसानी के लिए सरकार ने मौजूदा डीम्ड डेप्युटेशन व्यवस्था को एक अक्टूबर दो हजार छब्बीस से बढ़ाकर इकतीस मार्च दो हजार सत्ताईस तक कर दिया है। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने सरकार के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है। उन्होंने इसे ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के कॉर्पोरेटाइजेशन को चुनौती देने वाली कानूनी कार्यवाही के दौरान सरकार द्वारा दिए गए पुराने आश्वासनों को पूरा करने वाला कदम बताया है।

कर्मचारी संघों, खासकर ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने लगातार यह मुद्दा उठाया था कि कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारी का दर्जा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। सरकार के इस नए आदेश से डिफेंस सिविलियन कर्मचारियों के बीच वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म होने और कर्मियों को स्थिरता मिलने की पूरी उम्मीद है। साथ ही इससे नई बनी सात डीपीएसयू का कामकाज भी आने वाले समय में सुचारू रूप से चल सकेगा।

"यह फैसला पहले की ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक जीत है। एआईडीईएफ ने शुरू से ही यह बात कही थी कि किसी भी कर्मचारी को केंद्र सरकार के कर्मचारी का दर्जा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। सरकार ने उन लोगों के लिए रिटायरमेंट तक डीम्ड डेप्युटेशन की इजाज़त दी है जो एब्जॉर्प्शन का विकल्प नहीं चुनते हैं। इस फैसले ने हमारे रुख को सही साबित किया है और हज़ारों डिफेंस सिविलियन कर्मचारियों और उनके परिवारों को राहत दी है।" - सी. श्रीकुमार, महासचिव, एआईडीईएफ

अदालती लड़ाई से राहत

कर्मचारियों की ऐतिहासिक जीत के इस महत्वपूर्ण फैसले के लिए एआईडीईएफ ने मद्रास हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी, जिसका फैसला अंततः कर्मियों के पक्ष में आया था। अब कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सरकार मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का आदेश भी जल्द से जल्द जारी करे। इसके साथ ही संघ ने स्पष्ट किया है कि कॉर्पोरेटाइजेशन को पूरी तरह वापस लेने की उनकी वैधानिक लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश भर के कारखानों में रक्षा असैन्य कर्मचारियों की ऐतिहासिक जीत की गूंज साफ सुनाई दे रही है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। यह रक्षा मंत्रालय द्वारा ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के सिविलियन कर्मचारियों के लिए डीम्ड डेपुटेशन की अवधि बढ़ाने और उनकी सेवा शर्तों को सुरक्षित रखने के निर्णय से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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