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राजस्थान

चिकित्सकों की मेहनत रंग लाई: सफल इलाज के बाद घर लौट रहीं प्रसूताएं

पीबीएम अस्पताल के ICU में भर्ती गंभीर प्रसूताओं के इलाज में चिकित्सकों की मेहनत रंग लाई है। जिससे सफल इलाज के बाद अब प्रसूताएं घर लौट रहीं हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रसूता राहिला

प्रसूता राहिला

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बीकानेर, राजस्थान। राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध पीबीएम अस्पताल से प्रसूति सेवाओं और गंभीर रूप से बीमार महिलाओं के उपचार के मामले में एक बेहद राहतभरी और सकारात्मक खबर सामने आई है। अस्पताल के क्रिटिकल केयर वार्ड में बेहद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण जीवन और मृत्यु से जूझ रही 6 प्रसूताओं में से 2 महिलाओं के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य में इस बेहतरीन सुधार के पीछे अस्पताल के चिकित्सकों की मेहनत साफ तौर पर दिखाई दे रही है जिसके फलस्वरूप सफल इलाज के बाद प्रसूताएं अब अपने घर लौट रहीं हैं।

इस सफल और सकारात्मक चिकित्सकीय परिणाम के बाद अस्पताल प्रबंधन और भर्ती मरीजों के चिंतित परिजनों ने बड़ी राहत की सांस ली है। डिस्चार्ज की गई इन महिलाओं में से एक प्रसूता राहिला को मंगलवार को सघन और सफल उपचार प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूर्ण स्वस्थ होने पर आधिकारिक तौर पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इससे पूर्व एक अन्य गंभीर प्रसूता को भी पूरी तरह से स्वस्थ और खतरे से बाहर होने के बाद चिकित्सकों द्वारा अस्पताल से सुरक्षित रूप से विदा किया जा चुका है।[विडियो]

गंभीर हालत से रिकवरी

चिकित्सकों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती किए जाने के समय प्रसूता राहिला की शारीरिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक और गंभीर बनी हुई थी। चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट के अनुसार भर्ती के वक्त उसका हीमोग्लोबिन घटकर मात्र 6 ग्राम प्रति डेसीलीटर तक पहुंच गया था और उसके शरीर का यूरिन आउटपुट भी लगभग शून्य के स्तर पर आ गया था। महिला की इस नाजुक हालत को देखते हुए उसे तत्काल आईसीयू वार्ड में स्थानांतरित किया गया और विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक विशेष टीम की निगरानी में उसका गहन उपचार शुरू किया गया।

विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा किए गए इस सघन और बेहतरीन उपचार और चिकित्सकों की मेहनत का बेहद सकारात्मक परिणाम देखने को मिला। इलाज के बाद मरीज राहिला का यूरिन आउटपुट बढ़कर लगभग 3500 मिलीलीटर प्रतिदिन के सामान्य स्तर तक पहुंच गया तथा उसका हीमोग्लोबिन भी बढ़कर 8.2 ग्राम प्रति डेसीलीटर दर्ज किया गया। अस्पताल में भर्ती होने के समय प्रसूता को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही थी और उसके फेफड़ों में पानी भरने की समस्या भी उत्पन्न हो गई थी जो अब पूरी तरह नियंत्रित हो चुकी है।

चिकित्सकों की सघन निगरानी

पीबीएम अस्पताल प्रशासन से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार आईसीयू वार्ड में उपचाराधीन अन्य 2 प्रसूताओं की स्वास्थ्य स्थिति में भी अब दिन-प्रतिदिन लगातार काफी अच्छा सुधार दर्ज किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि इन महिलाओं की शारीरिक प्रगति इसी सकारात्मक गति से आगे बनी रही तो आगामी 2 से 3 दिनों के भीतर इन्हें भी पूर्ण स्वस्थ होने पर अस्पताल से सुरक्षित रूप से डिस्चार्ज किया जा सकता है।

दूसरी तरफ इसी क्रिटिकल केयर यूनिट में वर्तमान समय में वेंटिलेटर सपोर्ट पर उपचाराधीन 2 अन्य अत्यधिक गंभीर मरीजों की विशेष देखभाल के लिए अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक बड़ी टीम चौबीसों घंटे तैनात है। यह मेडिकल टीम पल-पल मरीजों की बदलती स्थिति पर निरंतर निगरानी बनाए हुए है ताकि इन गंभीर मरीजों को भी सर्वोत्तम और अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्रिटिकल केयर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें और उन्हें जल्द से जल्द नया जीवन मिल सके।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की मेहनत

चिकित्सकों की मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं मुख्य नियंत्रक डॉ सुरेंद्र कुमार के नेतृत्व में गठित डॉक्टरों की यह विशेष संयुक्त टीम लगातार भर्ती मरीजों की क्लिनिकल मॉनिटरिंग कर रही है। इस उच्च स्तरीय टीम में अतिरिक्त प्राचार्य डॉ रेखा आचार्य एवं डॉ नीति शर्मा के साथ-साथ स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ संतोष खजोटिया और डॉ सुमन बुडानिया मुख्य रूप से शामिल हैं जो प्रसूताओं के स्वास्थ्य को स्थिर करने में जुटे हुए हैं।

इसके अलावा नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ जितेंद्र फलोदिया, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ खेताराम शर्मा, निश्चेतन विभाग से डॉ विशाल और श्वसन रोग विभाग के डॉ रवि चांडक के साथ मेडिसिन आईसीयू स्टाफ, पोस्ट कोविड आईसीयू स्टाफ, डायलिसिस यूनिट स्टाफ एवं क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की संयुक्त टीम लगातार अपनी सेवाएं दे रही है। इन सभी स्वास्थ्यकर्मियों के सामूहिक और अथक प्रयासों के चलते ही अब चिकित्सकों की मेहनत रंग लाती दिख रही है जिससे चिकित्सा जगत में इस बड़ी सफलता और डॉक्टरों की कार्यप्रणाली की जमकर सराहना हो रही है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अस्पताल प्रशासन की वर्तमान चिकित्सा रिपोर्ट, मरीजों के व्यक्तिगत स्वास्थ्य डेटा और चिकित्सालय की आगामी विधिक प्रक्रियाओं के तथ्य चिकित्सकीय मापदंडों के अधीन पूरी तरह परिवर्तनशील हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

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