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अंतरराष्ट्रीय

शांति की ओर बढ़े कदम: अमेरिका ईरान का अंतरिम समझौता हुआ घोषित

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संकट के बीच अमेरिका ईरान का अंतरिम समझौता दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा हस्ताक्षरित कर सार्वजनिक कर दिया गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
अमेरिका ईरान का अंतरिम समझौता

अमेरिका ईरान का अंतरिम समझौता

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रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ईरान का अंतरिम समझौता, जिस पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने हस्ताक्षर किए हैं, उसे सार्वजनिक कर दिया गया है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य पिछले कुछ समय से जारी विनाशकारी युद्ध को समाप्त करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस दौरान जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के साथ-साथ ईरान को चेतावनी भी दी है कि यदि वे अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रहते हैं, तो उन पर दोबारा हमले शुरू कर दिए जाएंगे। [विडियो]

इस बड़े वैश्विक घटनाक्रम के बीच अमेरिका ईरान का अंतरिम समझौता दोनों देशों के बीच जारी कड़वाहट को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार अगले 60 दिनों के भीतर एक स्थायी युद्धविराम स्थापित करने पर काम कर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने उम्मीद जताई है कि यह समझौता अंततः मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करने और वैश्विक स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने में मददगार साबित होगा।

युद्धविराम और आर्थिक राहत

इस 14 सूत्रीय अंतरिम समझौते के तहत अप्रैल में घोषित युद्धविराम को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है, जिसमें लेबनान का क्षेत्र भी पूरी तरह शामिल है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने इस समझौता ज्ञापन पर अंग्रेजी और फारसी दोनों भाषाओं में डिजिटल रूप से अपने हस्ताक्षर किए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो चुकी है, जिसके तहत ईरान की फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्ति को भी अब मुक्त कर दिया जाएगा। वैश्विक कूटनीति के जानकार मानते हैं कि अमेरिका ईरान का अंतरिम समझौता पश्चिम एशिया की भू-राजनीति को पूरी तरह बदल कर रख देगा।

इस समझौते के बावजूद ईरान की धार्मिक सरकार अपने स्थान पर बनी हुई है और उसका संवर्धित यूरेनियम का भंडार भी सुरक्षित है। इसके साथ ही ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट नहीं किया गया है और उसने लेबनान में हिजबुल्लाह जैसे समूहों को अपना समर्थन देना बंद नहीं किया है। डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले मिसाइल उद्योग को पूरी तरह तबाह करने का संकल्प लिया था, लेकिन अब उन्होंने अपना रुख बदलते हुए कहा कि अन्य देशों के पास मिसाइलें होने के कारण ईरान के पास ऐसा न होना अनुचित होगा। इस प्रकार सामरिक संतुलन बनाए रखने में अमेरिका ईरान का अंतरिम समझौता एक नई मिसाल पेश कर रहा है।

जांच और आधिकारिक बयान

यूरोपीय नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के बिना युद्ध शुरू करने के अमेरिकी फैसले का कभी समर्थन नहीं किया था, लेकिन वे भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित हैं। इस वैश्विक शांति पहल के बीच फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और अमेरिका के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर लेबनान में तत्काल युद्धविराम की मांग की है। हालांकि इजरायल इस कूटनीतिक बातचीत का हिस्सा नहीं था और उसकी सेना अभी भी दक्षिणी लेबनान में मौजूद है, जिसके कारण वहां हवाई हमले और ड्रोन हमले जारी हैं।

"हम उन पर बहुत बुरी तरह से बमबारी करेंगे यदि उन्होंने इस समझौते का उल्लंघन किया। मैं ऐसा नहीं चाहता, मैं चाहता हूँ कि वे इस समझौते का सम्मान करें। यदि मुझे यह पसंद नहीं आया या उन्होंने सही व्यवहार नहीं किया, तो हम सीधे उनके सिर के बीच में बम गिराना शुरू कर देंगे।" - डोनाल्ड ट्रम्प, राष्ट्रपति, अमेरिका

भविष्य की सुरक्षा चुनौतियां

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अपनाए गए कड़े रवैये की हल्की आलोचना भी की है। ट्रम्प ने कहा कि नेतन्याहू कभी-कभी थोड़े उत्साहित हो जाते हैं, लेकिन उन्हें हर बार हिजबुल्लाह के किसी व्यक्ति के दिखने पर पूरी इमारत को गिराने की जरूरत नहीं है। इस बीच लेबनानी सुरक्षा बलों के अनुसार हिजबुल्लाह ने भी दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना पर ड्रोन हमले किए हैं जिसमें पांच इजरायली सैनिक घायल हुए हैं।

बहरहाल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे इस कूटनीतिक बदलाव से यह साफ है कि अमेरिका ईरान का अंतरिम समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य आपूर्ति संकट को संभालने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हालांकि दोनों देशों के बीच का यह कड़ा गतिरोध अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन इस नए शांति समझौते ने दुनिया को एक बड़े महायुद्ध की विभीषिका से फिलहाल जरूर बचा लिया है। आगामी 60 दिनों की वार्ता अब यह तय करेगी कि यह अंतरिम शांति समझौता एक स्थायी युद्धविराम में बदल पाता है या नहीं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय रक्षा नीतियों, दोनों देशों के विधिक समझौतों और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के तथ्य कूटनीतिक मापदंडों के अधीन पूरी तरह परिवर्तनशील हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

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