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प्रादेशिक

आरोपी डॉक्टर पर सरकारी कार्रवाई, पेंशन घटकर अब मात्र नौ हजार रुपये

आरोपी डॉक्टर पर सरकारी कार्रवाई करते हुए हरियाणा सरकार ने पेंशन 115000 से घटाकर 9000 की। नाबालिग से दुष्कर्म मामले में सरकार ने कड़ा संदेश दिया है।

By अजय त्यागी
1 min read
गिरफ्त में आरोपी डॉक्टर शैलेंद्र कुमार

गिरफ्त में आरोपी डॉक्टर शैलेंद्र कुमार

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हरियाणा सरकार ने कुरुक्षेत्र जिला अस्पताल में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी डॉक्टर पर सरकारी कार्रवाई करते हुए पेंशन पेंशन 1,15,000 से घटाकर 9,000 रुपये कर दी है। कुरुक्षेत्र जिला अस्पताल में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी डॉ. शैलेंद्र कुमार के खिलाफ यह सख्त कदम राज्य में महिला सुरक्षा पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है। इस ऐतिहासिक फैसले के जरिए सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि गंभीर अपराधों में संलिप्त सरकारी कर्मचारी न केवल अपनी नौकरी खोएंगे, बल्कि उन्हें मिलने वाली समस्त सरकारी सुविधाएं भी समाप्त कर दी जाएंगी। [1]

हरियाणा सरकार ने कुरुक्षेत्र जिला अस्पताल में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी डॉक्टर शैलेंद्र कुमार के खिलाफ शिकंजा कस दिया है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद, राज्य सरकार ने अपनी स्पष्ट नीति के तहत आरोपी डॉक्टर पर सरकारी कार्रवाई करते हुए उसकी मासिक पेंशन को न्यूनतम स्तर पर लाने का साहसी निर्णय लिया है। स्वास्थ्य विभाग की यह अभूतपूर्व पहल इस बात का प्रमाण है कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध गंभीर अपराध करने वालों को न केवल कानूनन सजा मिलेगी, बल्कि उनके आर्थिक हितों पर भी कड़ी चोट की जाएगी।

सख्त नीति का संदेश

विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी डॉक्टर की एक लाख पंद्रह हजार रुपये की मासिक पेंशन को घटाकर अब मात्र नौ हजार रुपये कर दिया गया है। भत्तों को शामिल करने के बाद भी यह राशि केवल पंद्रह हजार रुपये ही रह गई है, जो राज्य के इतिहास में एक बड़ी दंडात्मक मिसाल है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस प्रकार की आर्थिक कार्रवाई पहली बार की गई है। आरोपी डॉक्टर पर सरकारी कार्रवाई के माध्यम से सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराधी किसी भी स्थिति में सरकारी खजाने का लाभ लेने के पात्र नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि 29 मई को कुरुक्षेत्र जिला अस्पताल में परामर्शदाता चिकित्सक के रूप में कार्यरत डॉ. शैलेंद्र कुमार पर अस्पताल में आई एक नाबालिग के साथ कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। मामला संज्ञान में आते ही पुलिस ने तुरंत प्रभावी कार्यवाही करते हुए अगले ही दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से उसकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। बताया गया है कि यह डॉक्टर सेवानिवृत्ति के बाद दोबारा संविदा आधार पर नियुक्त था, जिसे बर्खास्त कर दिया गया।

न्याय की प्राथमिकता

डॉक्टर का पूर्व आपराधिक इतिहास भी बेहद चिंताजनक रहा है। जानकारी के मुताबिक, डॉ. शैलेंद्र कुमार का नाम इससे पहले भी एक महिला से दुष्कर्म के मामले में सामने आ चुका है और वह उस प्रकरण में जेल भी जा चुका है। बार-बार इस तरह की गतिविधियों में लिप्त होने के कारण सरकार ने इस बार आरोपी डॉक्टर पर सरकारी कार्रवाई करते हुए उसे आर्थिक रूप से पूरी तरह शिकंजे में लेने का निर्णय लिया है। यह निर्णय उन सभी के लिए एक कड़ा सबक है जो पद की मर्यादा को कलंकित करते हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की सख्त दंडात्मक कार्यवाही से समाज में अपराधियों के प्रति एक कड़ा संदेश जाएगा। राज्य सरकार का यह स्पष्ट दृष्टिकोण है कि सरकारी पद पर आसीन व्यक्ति यदि इस तरह के घृणित अपराधों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसे कानूनी सजा के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी दंडित किया जाना आवश्यक है। आरोपी डॉक्टर पर सरकारी कार्रवाई के जरिए यह सुनिश्चित किया गया है कि भविष्य में कोई भी कर्मचारी ऐसी हरकत करने से पहले सौ बार सोचे।

आधिकारिक बयानों के अनुसार, "महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराध करने वालों को न सिर्फ कानून के तहत सजा मिलेगी, बल्कि सरकारी सुविधाओं पर भी सख्त चोट की जाएगी।" सरकार की यह शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति दर्शाती है कि राज्य में कानून का शासन सर्वोपरि है। आरोपी डॉक्टर पर सरकारी कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि पीड़ित को न्याय दिलाने और अपराधियों को उनके कृत्यों का कड़ा आर्थिक दंड देने के लिए शासन पूरी तरह तत्पर है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसी एवं स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। कुरुक्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था और कानून व्यवस्था से संबंधित जानकारी समय के साथ बदल सकती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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